विश्व कप 2014 का पहला ड्रॉ मुक़ाबला

फ़ीफ़ा 2014 में ईरान और नाइजीरिया का मैच इमेज कॉपीरइट AFP

फ़ुटबॉल विश्व कप में सोमवार को ईरान और नाइजीरिया के बीच खेला गया मुक़ाबला गोलरहित ड्रॉ पर छूटा. यह इस विश्व कप का पहला ऐसा मैच रहा जो ड्रॉ रहा.

नोवी कपाड़िया इस मैच की समीक्षा करते हुए मानते हैं कि मैच तो बड़ी टक्कर का हुआ और नाइजीरिया ने शुरुआत भी शानदार की. अफ्रीकी टीम को गोल करने के अनेक अवसर भी मिले लेकिन तारीफ करनी होगी ईरान की जिसने उसके सारे हमले बेकार कर दिए.

ईरान को रेज़ा जैसे खिलाड़ियों का लाभ मिला जो विदेशी लीग खेलते हैं. टीम में इस तरह के तीन-चार अनुभवी खिलाड़ी मौजूद है. इसके अलावा ईरान के खिलाड़ियों के उनके लम्बे कद और दम-ख़म का भी लाभ मिला.

वो आठ खिलाड़ी जिन पर रहेगी सबकी नज़र

यही कारण था कि नाइजीरिया ने जहां भी फिज़ीकली खेलने की कोशिश की ईरान ने उसका बखूबी जवाब दिया. यह भी इत्तेफाक़ है कि इस मैच से पहले इस विश्व कप में 42 गोल हो चुके हैं. 12 मैचों में इतने गोल यानी औसत तीन गोल से अधिक हर मैच में. पिछले विश्व कप में गोल औसत हर मैच में 2.27 था.

रोमांचक मुक़ाबला

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सोमवार को तीसरा और अंतिम मैच ग्रुप-जी में घाना और अमरीका के बीच खेला गया. अभी दोनों टीमें मैदान में उतरी ही थी कि खेल के पहले ही मिनट में अमरीका के क्लिंट डेम्पसी ने गोल कर पिछले बार के क्वार्टर फ़ाइनलिस्ट घाना को हैरानी में डाल दिया.

इसके बाद भी डेम्पसी ने कई ज़बरदस्त हमले घाना के गोल पर बोले लेकिन घाना के गोलकीपर कवारासी ने शानदार बचाव किए. गोलकीपर के उत्साह का असर टीम पर पड़ा और आख़िरकार खेल के 82वें मिनट में आंद्रे अयेव ने अमरीका के दो रक्षकों और गोलकीपर को छकाते हुए घाना के लिए बराबरी का गोल कर दिया.

ब्राज़ील के वो 12 स्टेडियम...

1-1 से बराबरी के बाद अमरीका ने भी एक जवाबी हमले में चार मिनट बाद ही 86वें मिनट में दूसरा गोल कर स्कोर 2-1 कर दिया.

यह गोल स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर खेल रहे जॉन ब्रूक्स ने किया. इससे पहले केवल चार अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव रखने वाले ब्रूक्स का यह पहला अंतराष्ट्रीय गोल था.

लाजवाब खेल

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जर्मनी और पुर्तगाल के बीच खेल गए मैच को लेकर कपाड़िया का मानना है कि जर्मनी ने बेहद लाजवाब खेल दिखाया. इसकी सबसे बड़ी वजह जर्मनी की तैयारी रही.

कपाड़िया के अनुसार ब्राज़ील से ऐसी ख़बरें आ रही है कि जर्मनी की टीम अपने खिलाड़ियों के लिए 23 टन का सामान मनोरंजन और दूसरी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लाई है.

जर्मनी के खिलाड़ियों पर कोई मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं है. उनकी हर ज़रूरत की चीज़ टीम के पास मौजूद है, इससे दूसरी फुटबॉल फेडेरेशनों को भी सीखना चाहिए.

जर्मनी की टीम में आग है. यह तेज़ गति से खेल रही है. जर्मनी के थॉमस मुलर ने बेहतरीन खेल दिखाया. इस बड़ी हार में पुर्तगाल की अपनी ग़लती भी रही.

जब पेपे मुलर को टक्कर मारने के कारण मैच से बाहर हुए तो टीम 10 खिलाड़ियों से खेली. इस मैच के लिए रोनाल्डो को दोष नहीं दिया जा सकता क्योंकि पुर्तगाल को जितने भी अवसर मिले वह रोनाल्डो की बदौलत ही मिले. दूसरी तरफ जर्मनी ने बेहद परिपक्व और पेशेवर खेल दिखाया.

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