'स्टाइलिश स्पेन' का एक अधूरा सफ़र....

  • 19 जून 2014

गुरुवार को स्पेन के एक दैनिक अख़बार मार्का ने बड़े-बड़े शब्दों में लिखा- द एंड. साथ में मैदान से हताश, परेशान और निराश होकर बाहर जाते आंद्रेस इनिएस्टा की तस्वीर भी लगी है.

वही इनिएस्टा जो चार साल पहले दक्षिण अफ़्रीका के जोहानेसबर्ग में हुए विश्व कप फ़ुटबॉल के फ़ाइनल के हीरो थे.

यूरो 2008 और 2012 की चैम्पियन और मौजूदा विश्व विजेता स्पेन की टीम इस बार ग्रुप मुक़ाबले से आगे नहीं बढ़ पाई. पहले मैच में जहाँ नीदरलैंड्स ने उसे 5-1 से बुरी तरह हराया, तो चिली ने 2-0 से हराकर इस विश्व कप में उसका सफ़र ही ख़त्म कर दिया.

विसेंट डेल बॉस्क़ की टीम में एक सुनहरे दौर के कई खिलाड़ी हैं, जिन्होंने फ़ुटबॉल की दुनिया में असाधारण वर्चस्व स्थापित किया. उन्होंने छोटे-छोटे पास और मूवमेंट वाले अपने 'टिकी-टाका' स्टाइल से इस खेल को एक तरह से अपने वश में कर लिया.

चिली से मिली हार के बाद स्पेन के चर्चित मिडफ़ील्डर ज़ावी अलोंजो ने कहा, "हम नहीं जानते कि हम कैसे अपनी भूख और दृढ़ निश्चय को बरकरार रखें, जो एक टूर्नामेंट को जीतने के लिए आवश्यक है. जो सफलता और ख़ुशी का हमने अनुभव किया, वो अब ख़त्म हो गया है. शायद यही सबसे सही होगा कि हम बदलाव के लिए सोचें."

बड़े बदलाव की तैयारी?

डेल बॉस्क़ ने विश्व फ़ुटबॉल में स्पेन के वर्चस्व का ज़्यादातर समय देखा है. उन्होंने कहा कि उनकी टीम चिली के ख़िलाफ़ मिली हार वाले मैच में सुस्त थी और उन्होंने बहादुरी भी नहीं दिखाई. कप्तान इकेर कैसियास ने भी स्वीकार किया कि मैच के दौरान प्रतिबद्धता नहीं थी.

स्पेन की टीम चार टूर्नामेंटों की तीसरी चैम्पियन टीम है, जो ग्रुप मुक़ाबले से ही बाहर हो गई है. हालाँकि कम ही लोगों ने ये सोचा था कि विश्व कप में उनका सफ़र उतने नाटकीय तरीक़े और तेज़ी से ख़त्म हो जाएगा.

स्पेन की टीम पहली ऐसी टीम थी, जिसने दो यूरोपीय चैम्पियनशिप और एक विश्व कप लगातार जीता था. जिस पासिंग तकनीक और बेहतरीन मूवमेंट के कारण स्पेन की टीम को इतनी सफलता मिली, वो नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ मैच में ग़ायब थी. उनकी तेज़ी भी नहीं दिखी.

डेविड विया ने नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ 2-0 स्कोर करने का बेहतरीन मौक़ा गँवा दिया, तो सर्जियो बॉस्केट्स चिली के ख़िलाफ़ मैच में एक आसान सा मौक़ा चूक गए.

टीम में एटलेटिको मैड्रिड के स्टार स्ट्राइकर डिएगो कोस्टा भी स्पेन की उम्रदराज़ टीम को प्रभावित नहीं कर पाए. ब्राज़ील में जन्मे कोस्टा दो मैचों के दौरान एक भी शॉट गोल की ओर नहीं लगा पाए.

टीम के कोच डेल बॉस्क़ मानते हैं कि विश्व कप से उनकी टीम से जल्द बाहर हो जाने का असर ज़रूर होगा. उन्होंने संकेत दिया है कि छह साल का उनका कार्यकाल अब ख़त्म हो सकता है. अब ये उनकी ज़िम्मेदारी होगी या फिर उनके उत्तराधिकारी की, इतना तो तय है कि स्पेन की टीम अपने यूरोपियन ख़िताब की रक्षा करने का लक्ष्य बना रही है. वर्ष 2016 में यूरो कप फ़्रांस में होना है.

अगर टीम को ब्राज़ील में मिले शर्मनाक अनुभव को नहीं दोहराना है, तो शायद टीम में बड़े बदलाव की आवश्यकता हो सकती है.

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