सानिया के रंग को लेकर भी थी 'परिवार को चिंता'

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भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा विंबलडन में महिला डबल्स में जोरदार दावा पेश करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

उन्होंने अब तक के अपने सफ़र के बारे में बीबीसी स्पोर्ट्स आवर से खुलकर कई मुद्दों पर बात की.

भारत में महिलाओं के गोरे रंग को लेकर कुछ ज़्यादा ही चाहत होती है, ऐसे में धूप में टेनिस खेलने से क्या रंग के सांवले होने के डर ने सानिया मिर्ज़ा को परेशान नहीं किया?

इस सवाल के जवाब में सानिया कहती हैं, "भारतीय उपमहाद्वीप में लड़कियों के लिए गोरा रंग सबसे बेहतर माना जाता है. ऐसे में मेरी चाची, चाचा और चचेरे भाई-बहनों की चिंता थी कि अगर मेरा रंग काला पड़ गया तो शादी कैसे होगी. यह डर भारतीय संस्कृति का हिस्सा है."

मुश्किल थी शुरुआत

हालांकि ग्यारह साल के बाद सानिया मिर्ज़ा भारत की बड़ी खेल हस्ती बन चुकी हैं. महिला डबल्स में उनकी करियर रैंकिंग 6 तक पहुंच गई है. लेकिन सानिया कहती हैं, "शुरुआत बेहद मुश्किल भरी थी. मुझे हर कदम पर आलोचना सुनने को मिली. जब मैंने टेनिस का रैकेट पकड़ा तब ये तो कोई सोचता भी नहीं था कि लड़कियां विंबलडन खेलने जाएं. जब मैंने 2003 में जूनियर विंबलडन का ख़िताब जीत लिया तब जाकर लोगों ने मुझसे माफ़ी मांगी."

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सानिया के मुताबिक बीते 20 साल में काफी कुछ बदला है लेकिन बुनियादी चीजें अभी नहीं बदली हैं. तो क्या भारत में तेज धूप में टेनिस खेलने पर रंग के काला होने के डर से ही लड़कियां इस खेल में नहीं आतीं?

इस सवाल के जवाब में सानिया कहती हैं, "भारत में महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसको लेकर दृढ़ मान्यता रही है. धूप के चलते काले होने का डर एक वजह तो है ही जिसके चलते टेनिस और गोल्फ़ में लड़कियां नहीं नजर आतीं. इन खेलों में आपको देश दुनिया की यात्रा करनी होती है और दूसरी कई चीजों का त्याग करना होता है."

संस्कृति का असर

क्या धर्म और जाति का भी खेल पर कोई असर होता है. इसके जवाब में सानिया कहती हैं, "अगर कोई महिला प्रोफेशनल एथलीट बनना चाहती है तो इसमें धर्म और जाति की कोई भूमिका नहीं होती. लेकिन उप महाद्वीप की संस्कृति का असर जरूर पड़ता है."

2005 में एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह ने सानिया मिर्ज़ा के स्कर्ट में टेनिस खेलने को लेकर धमकी दी थी.

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2008 में सानिया ने घोषणा की थी कि वे भारत के लिए नहीं खेलेंगी, तब उन पर ऑस्ट्रेलिया के अंदर भारतीय राष्ट्र ध्वज के अपमान का आरोप लगा था. इन आरोपों के तहत भोपाल में उन पर मामला दर्ज हुआ था.

इन अनुभवों के बारे में सानिया कहती हैं, "मेरे घर-परिवार वाले हमेशा मेरा साथ देते हैं. इस वजह से मैं इन विवादों से उबर पाती हूं."

पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक के साथ उनकी जोड़ी को दक्षिण एशिया की सेलेब्रटी कपल्स में गिना जाता है.

क्रिकेटर से शादी का फ़ायदा

सानिया मिर्ज़ा अपने पति के बारे में कहती हैं, "जो खेल को समझते हों और उच्चतम स्तर पर ख़ुद खेल चुके हों, उनसे शादी का फ़ायदा तो होता ही है. एक मैच हारने पर आपको उन्हें 'शट अप' कहने की ज़रूरत नहीं होती. आप कुछ घंटों तक चुप रहें और उन्हें ख़ुद इससे उबरने दें. मानिए या नहीं मगर शादी में इन बातों की अपनी भूमिका होती है."

सानिया की कामयाबी के बाद भी भारत में महिला टेनिस खिलाड़ियों का अभाव है. टॉप 500 खिलाड़ियों में महज दो भारत की हैं और दोनों में कोई भी ग्रैंड स्लैम में हिस्सा नहीं लेता.

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शायद यह भी एक वजह रही हो, जिसके चलते सानिया ने बीते साल हैदराबाद में टेनिस अकादमीशुरू की है.

सानिया कहती हैं, "लोग मुझसे बार-बार पूछते हैं कि मेरे बाद कौन? बीते दस साल से तो मैं ही हूं. ऐसे में मैंने इस दिशा में कुछ करने की कोशिश की है, ताकि भारत में टेनिस को कायम रखा जा सके. नहीं तो मेरे रिटायर होने के बाद तो कोई होगा ही नहीं."

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