फ़ुटबॉल के बुख़ार के बीच विंबलडन शुरू

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टेनिस की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट विंबलडन सोमवार से शुरू हो गया है. इसे जीतना हर टेनिस खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना होता है.

इस बार इस टूर्नामेंट में पुरुष वर्ग में सर्बिया के नोवाक जोकोविच को शीर्ष वरीयता दी गई है. हालांकि विश्व रैंकिंग में स्पेन के रफ़ाएल नडाल इस समय दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी है.

विंबलडन अकेला ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट है जिसमें विश्व रैंकिंग के आधार पर वरीयता नहीं दी जाती है. इसमें खिलाड़ी के टूर्नामेंट में पिछले दो साल के प्रदर्शन को भी देखा जाता है. नडाल गत दो बार दूसरे राउंड से आगे नहीं बढ़ पाए थे.

पिछले साल फ़ाइनल में जोकोविच को हराकर तहलका मचाने वाले ब्रिटेन के एंडी मरे को तीसरी वरीयता दी गई है. मरे ने साल 1936 के बाद ब्रिटेन को विंबलडन का ख़िताब दिलाया था.

सात बार के विंबलडन चैंपियन स्विट्ज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर को चौथी और उनके हमवतन ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन स्टानिस्लास वावरिंका को पांचवीं वरीयता दी गई है.

शारापोवा की चुनौती

महिला वर्ग में पांच बार की चैंपियन अमरीका की सरीना विलियम्स को शीर्ष वरीयता दी गई है.

ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन चीन की ली ना को दूसरी वरीयता मिली है. फ्रेंच ओपन के फ़ाइनल में रूस की मारिया शारापोवा से हारने वाली रोमानिया की सिमोना हालेप को तीसरी और पोलैंड की एग्निएस्का रदवांस्का को चौथी वरीयता दी गई है.

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शारापोवा को पांचवीं वरीयता मिली है. फ्रेंच ओपन जीतकर रूसी खिलाड़ी का मनोबल बढ़ा है और वह टूर्नामेंट में प्रबल दावेदार के रूप में उतरेंगी.

विंबलडन में पुरुष एकल वर्ग में भारत की चुनौती सोमदेव देववर्मन पेश करेंगे. पहले दौर में सोमदेव का सामना 15वीं वरीयता हासिल पोलैंड के जॉर्जी जानोविच से होगा.

युगल वर्ग में भारत के सबसे अनुभवी खिलाड़ी लिएंडर पेस और उनके जोड़ीदार चेक गणराज्य के रादेक स्तेपानेक को पांचवीं वरीयता दी गई है.

जोकोविच दावेदार

भारत के ही रोहन बोपन्ना और उनके पाकिस्तानी जोडीदार एसाम उल हक़ क़ुरैशी को आठवीं वरीयता दी गई है. युगल वर्ग में भारत के दिविज शरण और पूरव राजा भी अपने हाथ आज़माएंगे.

महिला युगल वर्ग में भारत की सानिया मिर्ज़ा और उनकी जोडीदार ज़िम्बाब्वे की कारा ब्लैक को चौथी वरीयता दी गई है. यह जोड़ी फ्रेंच ओपन के क्वार्टरफ़ाइनल में हारी थी.

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विंबलडन में खिलाड़ियों के संभावित प्रदर्शन को लेकर भारत के पूर्व डेविस कप कोच नंदन बल मानते हैं कि परंपरागत रूप से ऑल इंग्लैंड क्लब के आयोजकों को रैंकिंग में कुछ बदलाव करने की छूट दी गई है, और इस बार जोकोविच ही ख़िताब के सबसे बड़े दावेदार हैं.

वह कहते हैं कि इसके दो कारण है. एक तो यहां का ग्रास कोर्ट काफ़ी तेज़ होगा जो नडाल की टाइमिंग के अनुरूप नहीं है. जोकोविच आक्रामक टेनिस खेलते हैं जो उनके लिए लाभदायक है.

दूसरी तरफ नौवीं बार फ्रैंच ओपन का ख़िताब जीतने वाले नडाल के लिए क्ले कोर्ट से ग्रास कोर्ट पर अपने आपको ढालना थोड़ा मुश्किल होगा.

मरे से उम्मीद

उनके अनुसार नडाल के लिए पहले दो-तीन राउंड बेहद महत्वपूर्ण है. अगर वह इसमें जीतते हैं तो उसके बाद समां बदल सकता है. जोकोविच का शीर्ष वरीयता के साथ खेलना ठीक है.

मरे को दर्शकों का पूरा समर्थन मिलेगा. वैसे भी मरे विंबलडन में हमेशा एक बेहद ख़तरनाक खिलाड़ी माने जाते हैं. हो सकता है आलोचक इस बात से सहमत न हों लेकिन इन दिनों फ़ेडरर जिस तरह से खेल रहे हैं, उसे देखते हुए उनसे भी बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती.

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दूसरी तरफ़ महिला वर्ग में चुनौती अधिक है. पुरुष वर्ग में जहां दो-तीन खिलाड़ियों की बात होती है वहां महिलाओं में सेरेना निश्चित रूप से पहली पसंद है, लेकिन शारापोवा, ली ना, एना इवॉनिविच, जर्मनी की सबीन लिसीकी भी मज़बूत दावेदार हैं.

इस वर्ग में चैंपियन की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती.

भारतीय चुनौती को लेकर नंदन बल कहते हैं, "महिला युगल वर्ग में सानिया मिर्ज़ा और उनकी जोड़ीदार कारा ब्लैक के लिए विम्बलडन का ग्रास कोर्ट फ़ायदेमंद है. सानिया की टाइमिंग यहां सही रहती है तो नेट पर कारा ब्लैक से बेहतर खिलाड़ी इस समय कोई नहीं है. इस जोड़ी को सेमीफ़ाइनल या फ़ाइनल तक पहुंचना चाहिए."

भारतीय चुनौती

वह कहते हैं कि पुरुष युगल वर्ग में बोपन्ना और ऐसाम उल हक़ का प्रदर्शन इस साल कुछ अच्छा नहीं रहा है. अब अगर उन्हें आठवीं वरीयता दी गई है तो उन्हें क्वॉर्टर फ़ाइनल तक तो पहुंचना ही चाहिए. क्वार्टर फ़ाइनल में अगर मज़बूत विरोधी मिल गए तो फिर इन्हें दिक़्क़त होगी.

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पेस टूर्नामेंट में स्तेपानेक के साथ खेलेंगे, लेकिन यह जोड़ी पिछले तीन महीनों से अधिक समय से साथ नहीं खेली है.

पेस अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर भी परेशान रहे हैं. अभी वह अमरीका में अभ्यास टूर्नामेंट भी खेले जहां उनका प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा.

नंदन बल कहते हैं, "यह जोड़ी भी क्वॉर्टर फ़ाइनल तक पहुंच सकती है इसके बाद ब्रायन बंधुओं से इनका सामना हुआ तो दिक़्क़त होगी. महेश भूपति से अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि इन दिनों वह खिलाड़ी से अधिक बिजनेसमैन बन गए हैं."

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