ब्राज़ील: कप हारा, दिल जीता

  • 16 जुलाई 2014
नाटाल, ब्राज़ील का स्टेडियम Image copyright Reuters

ब्राज़ील के साओ पाउलो शहर में 12 जून को कहीं स्टेडियम की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा था तो कहीं बस स्टॉप की दीवारें और हवाई अड्डे की कुर्सियां पेंट की जा रहीं थी.

नज़ारा काफ़ी कुछ किसी भारतीय शादी से मिलता-जुलता था जहां बारात दरवाज़े पर आने तक दुल्हन के घर में अफरा-तफरी का माहौल रहता है. फिर जैसे ही बारात आती है, सब कुछ यकायक ठीक हो जाता है. ये ''व्यवस्थित अव्यवस्था'' का एक बेहतरीन नमूना होता है और ऐसा ही माहौल एक महीने पहले ब्राज़ील में था विश्व कप की शुरुआत से ठीक पहले.

लेकिन भारतीय शादी की ही तरह जैसे दुल्हन के आते ही जैसे माहौल बदल जाता है, ब्राज़ील में भी स्थानीय हीरो नेयमार के क्रोएशिया के ख़िलाफ़ पहला गोल करते ही माहौल बदल गया.

और उस लम्हे से विश्व कप सुचारू रूप से चलने वाली मशीन की तरह बन गया.

बेहतरीन टूर्नामेंट

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Image caption ब्राज़ील के नेयमार (बाएं) ने क्रोएशिया के ख़िलाफ़ पहला गोल किया था.

उद्घाटन समारोह में काफ़ी ड्रामा हुआ. भीगी आंखों से 70 हज़ार ब्राज़ीली नागरिकों ने एक स्वर में राष्ट्रीय गान गाया और स्टेडियम के एक हिस्से के दर्शकों ने राष्ट्रपति जील्मा रूसेफ़ को बुरा-भला भी कहा. लेकिन जैसे ही ब्राज़ील ने क्रोएशिया को 3-1 से हराया, सौ ख़ून माफ़ हो गए.

उसके बाद 30 दिन तक दुनिया के बेहतरीन फ़ुटबॉलरों का खेल देखने को मिला.

इस विश्व कप में 2.7 की औसत से गोल हुए जो अब तक का सबसे ज़्यादा औसत है. कई जाने-माने खिलाड़ियों ने निराश किया और उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे लेकिन कई नए सितारे और नए नाम उभरे.

उतार-चढ़ाव

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Image caption पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने इस विश्व कप में काफ़ी निराश किया.

ये विश्व कप उतार-चढ़ावों से भरा था.

टूर्नामेंट के नॉक-आउट स्टेज से पहले ही स्पेन, इटली, इंग्लैंड और पुर्तगाल जैसे यूरोपीय फ़ुटबॉल के दिग्गज देश प्रतियोगिता से बाहर हो गए. वहीं कोलंबिया, कोस्टा रिका, नाइजीरिया, घाना और अल्जीरिया जैसे देशों ने प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई.

क्वार्टर-फ़ाइनल के बाद फ्रांस और बेल्जियम की भी वतन वापसी हो गई जबकि ब्राज़ील और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमरीकी देश अगले दौर में पहुंचे.

लेकिन विश्व कप में निराशा भी कम नहीं थी. पहला मौका था जब पहले सेमीफ़ाइनल में जर्मनी ने मेज़बान ब्राज़ील को 7-1 से रौंदा. और तीसरे स्थान के लिए मैच में हॉलैंड के हाथों 3-0 से मात के बाद तो ब्राज़ील का तिलिस्म पूरी तरह टूट गया.

20 करोड़ ब्राज़ीलियों को तसल्ली बस इस बात की थी कि फ़ाइनल में उनके प्रतिद्वंद्वी अर्जेंटीना को जर्मनी ने हरा दिया.

मार्केटिंग तमाशा?

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Image caption माराडोना ने लियोनेल मेसी (दाएं) को गोल्डन बॉल दिए जाने को मार्किटिंग तमाशा क़रार दिया.

लेकिन फ़ाइनल में विडंबना ये थी कि जर्मनी के थॉमस मुलर, कोलंबिया के हामेस रॉड्रिगेज़ और हॉलैंड के आर्येन रॉबेन को नज़रअंदाज़ करते हुए अर्जेंटीना के खिलाड़ी लियोनेल मेसी, जो नॉक-आउट स्टेज में एक भी गोल नहीं कर पाए, उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

मेसी को मिले सम्मान को अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी माराडोना तक ने ''मार्केटिंग तमाशा'' क़रार दिया.

इसके अलावा भी हैरान करने वाली एक बात हुई. मैदान पर ब्राज़ील भले ही हार गया हो लेकिन मैदान के बाहर उसने बाज़ी मार ली.

ग़ज़ब माहौल

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Image caption बहुत से लोग ब्राज़ील के विश्व कप को अच्छी तरह से आयोजित करने पर सवाल उठा रहे थे.

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले हर कोई भविष्यवाणी कर रहा था कि ये विश्व कप पूरी तरह नाक़ामयाब होगा. लेकिन 13 जुलाई आते-आते हर किसी की ज़ुबान पर ''कप ऑफ़ कप्स'' के लिए बस अच्छी बातें ही थीं.

स्टेडियम बेहतरीन थे और माहौल ग़ज़ब. हवाई अड्डों पर क़तारें छोटी रहीं और जल्दी-जल्दी आगे बढीं और उड़ानें समय पर गईं. होटलों में बढ़िया इंतज़ाम था और गर्मजोशी से स्वागत हुआ.

यहां तक कि ब्राज़ील के बदनाम टैक्सी ड्राइवरों का रवैया भी बेहद दोस्ताना था.

मुस्कुराते लोग

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Image caption विश्व कप ख़त्म होते-होते लोग ब्राज़ील की तारीफ़ों के पुल बांध रहे थे.

लेकिन इस विश्व कप में ब्राज़ील के लोग उसकी ख़ासियत बन कर उभरे. मैच देखने के लिए देश भर में घूम रहे कई यूरोपीय पत्रकार अक्सर इस बात पर हैरान होते थे कि ब्राज़ील के निवासी ''इतने अच्छे और हमेशा मुस्कुराते'' क्यों रहते हैं.

जिन लोगों को ब्राज़ील आने से पहले सड़कों पर चोरी और लूट-पाट के बारे में चेताया गया था, वे सड़कों पर नाच-गाने और जश्न की यादों के साथ वापस गए.

ये सच है कि सेमीफ़ाइनल में ब्राज़ील की हार ने स्थानीय लोगों के उत्साह पर पानी फेर दिया लेकिन जिन लोगों ने ब्राज़ील के हारने पर अफ़रा-तफ़री और हिंसा की आशंका जताई थी, वे सब ग़लत साबित हुए. ब्राज़ीलियों ने हार को बहुत गरिमा से स्वीकार किया.

ब्राज़ील भले ही विश्व कप में हार गया हो लेकिन मैदान के बाहर, वो दुनिया का दिल जीतने में क़ामयाब रहा.

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