पुरुषों से लड़ने वाली महिला बॉक्सर

किरीबाती की बॉक्सर ताओरिबा बिन्याती

ऐसी महिला बॉक्सर के बारे में आप क्या कहेंगे जिसने ग्लासगो खेलों में हिस्सा लेने से पहले हमेशा पुरुष मुक्केबाज़ों के साथ ही अभ्यास किया हो और किसी प्रतियोगिता में भी भाग न लिया हो? ये हैं ताओरिबा बिन्याती.

इन दिनों ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने से पहले किरीबाती की 18 साल की ताओरीबा बिन्याती कभी भी किसी महिला मुक्केबाज़ के साथ नहीं भिड़ी थीं.

बिन्याती महिलाओं के लाइटवेट वर्ग में अपना पहला ही मुक़ाबला हार गईं.

ताओरिबा बिन्याती का बॉक्सिंग सफ़र विस्तार से

ऐसा नहीं है कि वे ऐसा करना नहीं चाहती थीं करना चाहती थीं बल्कि इसलिए कि इस छोटे से द्वीप समूह में कोई और महिला बॉक्सर है ही नहीं. इसलिए मजबूरन बिन्याती को लड़कों के साथ ही अभ्यास करना पड़ता था.

किरीबाती प्रशांत महासागर में एक द्वीप समूह है जिसकी आबादी एक लाख से कुछ ही ज़्यादा है.

ब्रिटेन के एक पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक एंड्रयूआर्था 47 साल पहले किरीबाती गए और इस ख़ूबसूरत द्वीप पर ही बस गए. वे यहां मुक्केबाज़ी को प्रचलित कर रहे हैं.

मुक्केबाज़ी की शुरुआत

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Image caption ताओराबी बिन्याती (नीली शर्ट में) लाइटवेट वर्ग के पहले दौर में मॉरिशस की इसाबेला रतना से हार गईं.

बिन्याती ने जुलाई 2013 में मुक्केबाज़ी शुरु की.

डेरेक बताते हैं, “हमारे क्लब ने एक महिला मुक्केबाज़ के लिए विज्ञापन दिया था. हम चाह रहे थे कि हम ग्लासगो खेलों के लिए एक महिला मुक्केबाज़ को तैयार कर सकें.”

डेरेक को उम्मीद थी कि कई लड़कियां सामने आएंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं. वे बताते हैं, “हफ़्तों बाद सरकार के एक मंत्री इस छोटी सी लड़की के साथ आए और कहा कि ये मुक्केबाज़ी करना चाहती है.”

डेरेक एंड्रयूआर्था कहते हैं कि बिन्याती को लड़कों के साथ अभ्यास करना पड़ता है.

वे कहते हैं, “मुश्किल ये है कि लड़के बिन्याती को तेज़ मारने से शर्माते हैं. मैं चाहता हूं कि वे ऐसा करें. ऐसे हालात में (ताओरिबा) जितनी मेहनत से ट्रेनिंग कर सकती है, करती है.”

ताओरिबा बिन्याती महिलाओं के लाइटवेट वर्ग में हिस्सा ले रही थीं जहां वे पहले दौर में ही हार गईं.

डेरेक एंड्रयूआर्था कहते हैं कि हार से बिन्याती दुखी हैं. लेकिन बिन्याती उम्मीद कर रही हैं कि उनके देश में अब और भी लड़कियां इस खेल में दिलचस्पी दिखाएंगी.

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