ज़्यादा पास न जाना 'उठा के पटक देगी'!

बबीता और विनेश फोगट

"हमारे घर वालों ने कभी हमें लड़की माना ही नहीं, वो तो कहते हैं तुम कुश्ती लड़ो बाक़ी सब हम पर छोड़ दो."

ये कहना है ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए महिला कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाली फ़ोगाट बहनों, बबीता और विनेश का.

53 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक विजेता बबीता का कहना था, "हमारे पिता महावीर जी ख़ुद पहलवान थे और उन्होंने हमें इस खेल के लिए तैयार किया है."

बबीता और विनेश हरियाणा में भिवानी ज़िले के बलाली गांव की रहने वाली हैं.

उनका कहना है कि उनके परिवार में भले ही पहलवानी को तरजीह दी जाती हो लेकिन गांव में बाक़ी घरों में इसे अच्छा नहीं माना जाता.

हिम्मत

48 किलो भारवर्ग में स्वर्ण जीतने वाली विनेश ने बताया, "कई बार हमें शॉर्ट्स पहनने पर ताने कसे जाते, लड़कों के साथ आने जाने पर लड़के कंधों पर हाथ रख देते, लेकिन हमारे माता-पिता ने न सिर्फ़ हमें हिम्मत दी बल्कि उन सब को ठीक भी कर दिया जो हमें परेशान करते थे."

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फ़ोगाट परिवार से कुश्ती में पहले ही गीता, बबीता और विनेश भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

ये दोनों पहलवान नहीं मानतीं कि लड़कियों का करियर जल्द ख़त्म हो जाता है.

विनेश का कहना है, "अभी मैं सिर्फ़ 21 साल की हूं और मैंने अपना खेल शुरू किया है और मैं इसे तब तक जारी रखूंगी जब तक शरीर जवाब नहीं दे देगा."

मेरी कॉम का उदाहरण

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बबीता मणिपुर की महिला मुक्केबाज़ मेरी कॉम के उदाहरण के साथ कहती हैं, "एक लड़की पहले बेटी, फिर बहन और फिर मां का किरदार निभाती है और ये रिश्ते निभाने वाले को आप कमज़ोर कैसे मान सकते हैं? ये सब बस कहने की बात है."

वहीं एक लड़की की ज़िंदगी के एक अहम सवाल 'शादी' पर उनका कहना था कि इसके लिए पूरी उम्र पड़ी है.

फोगाट बहनों के जीवन पर एक फ़िल्म भी बन रही है जिसमें मुख्य क़िरदार बबीता को बनाया जाना है.

फ़िल्म में उनका क़िरदार कौन निभाएगा और ये फ़िल्म कब बनेगी ये अभी तय नहीं है.

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