कहाँ खड़ा है भारत में फ़ुटबॉल?

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भारत में फ़ुटबॉल खिलाड़ियों के लिए 'इंडियन सुपर लीग' पैसों का खजाना ले कर आई है.

आठ शहरों के फ्रेंचाइजी पर होने वाले ख़र्च को सुनकर तो आंखे चौंधिया जाएं. 84 भारतीय खिलाड़ियों पर कुल 24 करोड़ रुपए खर्च हुए.

इसमें 49 विदेशी खिलाड़ियों पर होने वाले 20 करोड़ के खर्च को जोड़ लिया जाए तो हर एक अपने आप को बहुत बड़ा आदमी महसूस करता है.

खर्चों और ज़रूरतों की सूची आगे और है. ऐसा माना जा रहा है कि एक फ्रेंचाइजी 40 से 50 करोड़ रुपए खर्च करने वाला है.

भारतीय फ़ुटबॉल का भविष्य

वैसे इंडियन सुपर लीग की शुरूआत के बाद ही चलेगा कि भारतीय फ़ुटबॉल में कितना सुधार हो सकता है.

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यह कदम अंडर-17 विश्व कप की तैयारी में मददगार होगा.

आईएसएल दुनिया भर के दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर चुका है.

नामी गिरामी विदेशी क्लबों का आईएसएल के प्रति सकारात्मक रुख भारत में पेशेवर फ़ुटबॉल के विकास में फ़ायदेमंद होगा.

ज़रा सोचिए कि चैंपियन लीग के रनर अप 'एथलीटिको मैड्रिड' कोलकाता के फ्रेंचाइजी के साथ, इटली का दिग्गज 'फ़िओरेंटीना' पुणे के फ्रेंचाइजी के साथ, डच दिग्गज 'फ़ेयरनॉर्ड' दिल्ली के फ्रेंचाइजी के साथ क्या गुल खिलाएगी.

आईएसएल में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम, रणवीर कपूर, सलमान खान मौजूद होंगे.

फ़ुटबॉल की नई दुनिया

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भारतीय फ़ुटबॉलरों के लिए विदेशी खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने का यह पहला मौका होगा और विश्व स्तरीय अनुभवी कोचों के प्रशिक्षण में खेलने का भी.

कुछ मिलाकर फ़ुटबॉल की एक नई दुनिया का भारत में आगाज़ होने जा रहा है.

आईएसएल का स्थायित्व एक बड़ा सवाल है. भारी खर्च की वजह से यह सवाल फ्रेंचाइजी को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर निर्भर करेगा.

आईएसएल लगभग पूरी तरह से आयोजकों की कमाई पर निर्भर है ना कि टीवी प्रसारण के अधिकार बेचकर कमाए जाने वाले लाभ पर.

जबकि दुनिया भर इसके विपरीत टीवी प्रसारण के अधिकार बेचकर ऐसे आयोजनों से कमाई की जाती है.

आईपीएल से तुलना

क्रिकेट के पीछे पागल इस देश में फ़ुटबॉल लीग की लोकप्रियता भी एक बड़ा सवाल है. आईएसएस का स्वरूप भी क्रिकेट के इंडियन प्रीमियर लीग की तरह ही है. दोनों में बस फर्क इतना है कि आईपीएल में दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी भाग लेते हैं जबकि आईएसएल में भूतपूर्व खिलाड़ी और कम प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी.

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दूसरी अहम बात आईएसएल को लेकर यह है कि यह 10-12 हफ़्तों तक चलने वाला आयोजन होगा जिसमें तीन चार दिनों के अंतराल पर ही मैच होंगे.

इन तीन चार दिनों में टीमों को इतने बड़े देश में एक जगह से दूसरे जगह जाना भी होगा. खिलाड़ी इस दौरान थकावट से उबर पाएंगे कि नहीं यह भी देखना होगा.

स्टेडियम के साथ–साथ टीवी पर देखने वाले दर्शकों की तदाद भी एक बड़ा मसला होगा. यह भी एक सवाल है कि क्या कम समय में ज़्यादा फ़ुटबॉल मैच पचा पाने की स्थिति में भारतीय फ़ुटबॉल प्रशंसक हैं. क्या भारत में फ़ुटबॉल को लेकर ऐसी दिवानगी है?

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