एशियाई खेल: भारत के सामने मुश्किल चुनौती

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राष्ट्रमंडल खेलों में सुर्खियां बटोरने के दो महीने से भी कम समय के बाद भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर अंतराष्ट्रीय मंच पर अपनी किस्मत आज़माने कोरियाई शहर इंचियोन पहुंच गए हैं.

यहां शुक्रवार से सत्रहवें एशियाई गेम्स शुरू हो रहे हैं. आम भारतीय खेल प्रेमी एक बार फिर उन 64 पदकों की आशा रखेगा जो भारतीय खिलाडियों ने कॉमनवेल्थ खेलों में जीते थे.

लेकिन खुद खिलाड़ियों और उनके कोचों को यह अच्छी तरह मालूम है की इंचियोन में पदक जीतना उतना आसान नहीं होगा जितना ग्लासगो में था.

आसान नहीं चुनौती

इंचियोन में राष्ट्रमंडल के कई खिलाडियों के जीते स्वर्ण पदक शायद रजत या कांस्य में बदल सकते हैं और कई को तो खाली हाथ ही घर लौटना पड़े. एशियाई गेम्स में चीन, जापान और कोरिया के खिलाड़ी होंगे जो ग्लासगो में नहीं थे और यही फर्क भारत को पदक तालिका में पीछे खिसका सकता है.

बैडमिंटन एक ऐसा खेल है जिसमें चीन, जापान और कोरिया के आने से भारत को बहुत फर्क पड़ेगा और भारत के कोच गोपीचंद इस बात को बखूबी जानते हैं. उनका कहना है की बैडमिंटन में मेडल आना बहुत मुश्किल है.

एक तो स्तर का फर्क और स्टार खिलाडी सायना नेहवाल का गोपीचंद से अलग हो जाना भारत के लिए और भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

भारत छोड़ने से पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर जहाँ एक तरफ गोपीचंद और महिला कोच मधुमिता बिष्ट के साथ टीम थी वहीं सायना अलग खड़ी थीं. हालांकि उनके नए कोच विमल कुमार ने कहा कि यह बहुत आम बात है कि कोई खिलाड़ी किसी एक कोच को छोड़कर दूसरे के पास चला जाए.

कुश्ती में उम्मीद

महिला हॉकी के कोच सी कुमार ने भी माना की इंचियोन में मुक़ाबला तगड़ा होगा. बुधवार को गेम्स विलेज के बाहर कुमार ने बीबीसी को बताया की कम से कम पहले तीन स्थान के लिए तो भारतीय लड़कियों को बहुत मशक्क़त करनी पड़ेगी.

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उनका कहना था कि इन खेलों के दौरान ओलंपिक क्वालिफाई करने का मौका होगा इसलिए भारत को अच्छा प्रदर्शन दिखाना होगा.

ग्लासगो में महिला कुश्ती में भारत ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. विनेश और बबिता को तो किसी रॉक स्टार की तरह ही पब्लिसिटी मिली थी. लेकिन उनके कोच पूर्व पहलवान और अर्जुन अवॉर्ड जीत चुके कृपाशंकर ने साफ़ कहा है कि इंचियोन में मेडल जीतना बहुत ही मुश्किल है.

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