दिल को ठंडा रखने का सरिता का नुस्खा

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इंचियोन में कौन नहीं छोड़ सकता घी खाना और कौन हैं जो अपने दिल की ठंडक के लिए बर्फ़ का सहारा ले रहे हैं.

नौरिस प्रीतम की डायरी.

एशियाई खेल ख़त्म होने से दो दिन पहले ही सही कम से कम आयोजकों को ख़्याल तो आया कि खेलों में भाग लेने वाले 45 देशों के झंडे इंचियोन शहर की सड़कों पर दिख जाए.

कम से कम उन सड़कों पर जहां से विदेशी पत्रकार निकल रहे हैं वहां अब यह झंडे लहरा रहे हैं. जिस सड़क पर 50 किलोमीटर पैदल चाल रेस हुई वहां तो इन झंडों की भरमार थी.

और तो और सियासी संदेश देने के लिए कई खंभों पर कोरिया और उत्तरी कोरिया के झंडे साथ साथ लहरा रहे हैं.

बॉर्डर वाले ब्रिगेडियर चांदपुरी को सैल्यूट

भारतीय दल में सिर्फ मैरी कॉम का ही बॉलीवुड से संबंध नहीं है. 50 किलोमीटर पैदल चाल के जज सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर चांदपुरी भी हिंदी फ़िल्म से जुड़े हैं.

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1971 के भारत-पाक युद्ध में मेजर रहे चांदपुरी लोंगोवाल में नियुक्त थे. एक रात पाकिस्तानियों ने अचानक हमला किया और थोड़ी ही देर में भारतीय जवानों की गोलियां तक ख़त्म हो गई थी.

उस वक़्त अपनी जान की परवाह ना करते हुए एक बंकर से दूसरी बंकर में जाकर मेजर चांदपुरी ने भारतीय जवानों का हौसला बढ़ाया और किसी तरह अपने जवानों को लेकर चौकी की रक्षा करते रहें.

और जब सुबह हुई तो भारतीय वायु सेना ने बमों की वर्षा करके पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया.

चांदपुरी को सेना की ओर से काफ़ी सराहा गया और बाद में इस घटना को बॉलीवुड के पर्दे पर बॉर्डर फ़िल्म के रूप में उतारा जेपी दत्ता ने.

जब मैदान में खड़े बाकी अधिकारियों को चांदपुरी के बारे में पता चला तो कई अधिकारियों ने जो खुद सेना के रिटायर्ड अफसर हैं, चांदपुरी को सैल्यूट मारा.

दिल ठंडा करने के लिए बर्फ

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अपना कांस्य पदक लौटा कर जब सरिता मीडिया से रू-ब-रू हुईं तो उनके हाथ में एक प्लास्टिक की थैली थी जिसमें बर्फ थी.

हाथ में दर्द की वजह से उन्होंने वो बर्फ की थैली मेडिकल सेंटर से ली थी.

लेकिन जब एक पत्रकार ने पूछा कि यह आपने हाथ में दर्द के कारण लिया है तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि नहीं दिल को ठंडा करने के लिए!

छूट नहीं सकता घी खाना

कुश्ती में योगेश्वर दत्त के गोल्ड मेडल लेने के बाद पूर्व खिलाड़ी और अब भारतीय टीम के कोच विनोद कुमार ने पत्रकारों को समझाया कि कैसे भारतीय कुश्ती में बदलाव आया है और अब पहलवान वैज्ञानिक तरीके से ट्रेनिंग कर रहे हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि अब घी खाने के दिन लद गए हैं और पहलवान अब अच्छी डाइट लेते हैं. लेकिन जब बाद में योगेश्वर से मुलक़ात हुई तो सबसे पहले उन्होंने घी का ही नाम लिया.

योगेश्वर का तो कहना था कि वो तो छूट ही नहीं सकता. अब किसकी मानें, कोच की या पहलवान की!

लाल चिप

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50 किलोमीटर पैदल चाल के दौरान सड़क के दोनों ओर खड़े कोरिया के दर्शक यह देख कर बड़े हैरान थे कि फिनिश लाइन पर कोई एथलीटों का समय नोट नहीं कर रहा था.

यह लोग ज़्यादा हैरान इसलिए भी थे कि जब भी कोई एथलीट अपनी रेस ख़त्म कर रहा तो कुछ वालंटियर्स भाग कर एथलीट की जूती में से लाल रंग के प्लास्टिक के टुकड़ें निकाल रहे थे.

बाद में उन्हें पता चला कि वो लाल रंग का टुकड़ा एक कंप्यूटर से वाई फाई से जुड़ी चिप है. जैसे ही धावक फिनिश लाइन से गुजरता है वो चिप अपने आप उस धावक का समय रिकॉर्ड कर लेती है.

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