32 साल बाद भारत-पाक हॉकी फ़ाइनल

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एशियाई खेलों में होने वाला भारत-पाकिस्तान फ़ाइनल हॉकी मुक़ाबला जहां दोनों टीम की खिलाड़ियों के लिए अहम हैं वहीं दोनों टीम के कोच भी चर्चा में रहेंगे.

1998 में बैंकॉक के एशियाई खेलों में महाराज किशन कौशिक भारत के कोच थे और भारतीय टीम ने कोरिया को हराकर गोल्ड पर क़ब्ज़ा किया था. आज फिर वही कौशिक कोच होंगे तो क्या कौशिक एक बार फिर लकी साबित होंगे?

उधर पाकिस्तान के बेंच पर शाहनाज़ शेख कोच का रोले अदा करेंगे. जी हाँ वो ही शेख जिन्हें बतौर एक मज़बूत सेंटर हाफ़ खिलाड़ी तीन एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने का गौरव हासिल है.

हॉकी मैदान पर उन्होंने कुछ पत्रकारों से कहा की वो अपनी टीम को यही बात समझा रहे हैं कि जब मैं कर सकता हूं तो तुम क्यों नही. ''शायद यही मेरी टीम का हौंसला बढ़ाने का सबसे बड़ा सबब है.''

32 साल बाद आमने-सामने

बहरहाल यह कांटे का मुक़ाबला 32 साल बाद होगा.

इससे पहले एशियाई खेल के फ़ाइनल में भारतीय टीम आख़िरी बार पाकिस्तान से 1982 में नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में भिड़ी थी.

इस मुक़ाबले में पाकिस्तान ने भारत को 7-1 से करारी मात दी थी.

पाकिस्तानी फॉरवर्ड लाइन ने जिसके स्टार हसन सरदार थे गोलकीपर मीर रंजन नेगी पर सात गोल ठोक कर नेगी का तो कैरियर ही ख़त्म कर दिया था.

वो अलग बात है कि इसी थीम पर बनी चक दे इंडिया फ़िल्म की बदौलत नेगी एक बार फिर सुर्ख़ियों में आए और किसी हद तो उन्हें खोया हुआ सम्मान वापस मिला. और आज देखना होगा की श्रीजेश किस प्रकार भारतीय गोल की रक्षा करते हैं.

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भारत और पाकिस्तान के बीच एशियाई खेलों में कुल छह मुक़ाबले हो चुके हैं जिसमें से दो भारत और चार पाकिस्तान ने जीते हैं. भारत ने आख़िरी बार पाकिस्तान को 1966 बैंकॉक एशियाई खेल में शिकस्त दी थी.

दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला इसलिए भी काफ़ी अहम है क्योंकि ख़िताब जीतने वाली टीम को सीधे 2016 रियो ओलंपिक में जगह मिल जाएगी.

देखना है कि आज यहां इंचियोन में भारतीय तिरंगा लिए स्थानीय भारतीयों की आवाज़ गूंजेगी या फिर ग्रीन शर्ट का सितारा बुलंद होगा.

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