महिला फ़ुटबॉलरों ने पहली बार पहने शॉर्ट्स

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शुक्रवार को ख़त्म हुआ साउथ एशियन फ़ुटबॉल फैडरेशन महिला चैंपियनशिप इस मामले में ख़ास रही कि इसमें पहली बार महिला फ़ुटबॉलरों को शॉर्ट्स पहनकर खेलने की इजाज़त दी गई.

हो सकता है कि बाक़ी दुनिया के लिए यह बड़ी बात न हो, लेकिन पाकिस्तानी महिला ख़िलाडि़यों के लिए यह ख़ास बात है.

इसके अलावा पाकिस्तान में पहली बार इस स्तर के महिला टूर्नामेंट का आयोजन हुआ, जो देश में महिला खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा क़दम है.

नेपाल को 6-0 से हराकर भारत शुक्रवार को लगातार तीसरी बार चैंपियनशिप का विजेता बना. हर दो साल पर होने वाला यह टूर्नामेंट 2010 में शुरू हुआ था.

असर

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इस्लामाबाद के जिन्ना स्टेडियम में हुए फ़ाइनल मैच के दौरान पाकिस्तानी टीम की कप्तान हाजरा ख़ान भी थीं.

उनसे हमने पूछा कि इस टूर्नामेंट के पाकिस्तान में होने से खेल के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा.

हाजरा कहती हैं, "इस स्तर का टूर्नामेंट आयोजित होना और उसका टीवी पर प्रसारण होना महिला खेलों के लिए बड़ी बात है."

पाकिस्तान को रूढ़िवादी देश माना जाता है. महिलाओं के खेलों में आने को ज़्यादा सराहा नहीं जाता.

इस पर हाज़रा का कहना था, "लड़कियों को खेल में आने में समस्या होती है. ख़ासकर तब जब वो रूढ़िवादी परिवारों से आती हों. लेकिन अब अभिभावक लड़कियों को खेल में आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं."

उम्मीद

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फ़ाइनल के दौरान स्टेडियम लगभग खाली था. लेकिन यहां मौजूद फ़ीफ़ा प्रतिनिधि मोनिका स्टाब खेल के भविष्य को लेकर काफ़ी आशावान हैं.

वह कहती हैं, "आप कहीं न कहीं से शुरुआत करते हैं. लड़कियों ने दिखा दिया है कि वो भी खेल सकती हैं और उन्होंने काफ़ी बेहतर खेल दिखाया."

अभी तक पाकिस्तान एक बार भी यह टूर्नामेंट नहीं जीत सका लेकिन हाजरा को उम्मीद है कि बहुत जल्द उनकी टीम फ़ाइनल खेलेगी.

टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के अलावा श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान की टीमों ने भाग लिया.

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