क्या कार्लसन को मात दे पाएंगे आनंद?

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शतरंज की बिसात पर पांच बार के विश्व चैंपियन भारत के विश्वनाथन आनंद और नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन एक दिन के विश्राम के बाद रविवार को एक बार फिर आमने-सामने होंगे.

रूस के सोची शहर में खेली जा रही विश्व चैंपियनशिप में शतरंज के मोहरों को अपनी चाल का रूप देने में माहिर दोनों दिग्गजों के बीच अब मुक़ाबला बेहद दिलचस्प मोड़ ले चुका है.

दस गेम के बाद दोनों खिलाड़ियों में केवल एक अंक का अंतर है. कार्लसन के साढ़े पांच और आनंद के साढ़े चार अंक हैं.

दरअसल कार्लसन ने छठी बाज़ी में आनंद को मात दी और एक अंक हासिल किया. अब वही बढ़त आनंद को भारी पड़ सकती है.

पढ़ें आदेश गुप्त की रिपोर्ट

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जाने-माने शतरंज विशेषज्ञ वी कृष्णास्वामी मानते हैं कि आनंद के लिए बड़ी विकट स्थिति है.

न तो वह जोखिम ले सकते हैं और न बेहद सावधानी से खेल सकते हैं क्योंकि अब केवल दो गेम बाक़ी हैं. इनमें भी एक गेम जीतना ज़रूरी है.

आनंद ने 10वें गेम में अच्छी बाज़ी खेली है. इस पर वी कृष्णास्वामी कहते हैं कि इसमें उन्होंने कार्लसन को मुश्किल में भी डाला. यहां आनंद को थोड़ा जोखिम उठाना चाहिए था.

अगर आनंद ड्रॉ की जगह जीतने के लिए खेलते तो बेहतर होता लेकिन हो सकता है कि उनके दिमाग़ में यह भी चल रहा हो कि कहीं इस गेम में हार के साथ ही खेल ही समाप्त न हो जाए.

टाई ब्रेकर

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अब दो गेम बाक़ी हैं और एक गेम में वह सफ़ेद मोहरों से खेलेंगे. सवाल उठता है कि अब आगे क्या होगा.

इसे पर वी कृष्णास्वामी मानते हैं कि अब अगर 11वीं बाज़ी कार्लसन जीत जाते हैं तो टूर्नामेंट वहीं समाप्त हो जाएगा.

ग्यारहवीं बाज़ी भी अगर ड्रॉ रही तो आनंद बारहवीं बाज़ी सफ़ेद मोहरों से खेलेंगे. वहां उनकी कोशिश यही होगी कि किसी तरह जीतकर बाज़ी टाईब्रेकर तक ले जाए.

शतरंज प्रेमियों को याद ही होगा कि इससे पहले जब आनंद टोपोलोव के ख़िलाफ विश्व शतरंज की बाज़ी खेले थे तब उन्होंने आख़िरी गेम जीतकर ख़िताब अपने नाम किया था.

देखना है कि क्या आनंद एक बार फिर वह चमत्कार दोहरा पाते हैं या नहीं.

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