फुटबॉल विश्वकपः भ्रष्टाचार के नए आरोप

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वर्ष 2018 और वर्ष 2022 में होने वाले फ़ुटबॉल विश्वकप आयोजन की बोली प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार के और आरोप लगाए गए हैं.

इंग्लैंड के हाउस ऑफ कॉमन्स मीडिया एंड स्पोर्ट सेलेक्ट कमिटी ने संडे टाइम्स अख़बार के उपलब्ध करवाए गए ऐसे दस्तावेज़ प्रकाशित किए हैं जो अभी तक नहीं देखे गए थे.

रूस और कतर ने विश्व कप के लिए बोली जीती हैं.

संडे टाइम्स की रिपोर्ट में इंग्लैंड के 2018 के सदस्यों ने अफ़वाहों और निजी कंपनियों के साथ ही ब्रितानी दूतावासों की जुटाई गुप्तचर सूचनाओं को ब्यौरा एकत्र है.

'जांच में मुक्त'

हालांकि इस बारे में अख़बार ने की साफ़ सबूत नहीं दिया है.

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इसके बजाय इसमें तफ़सील से यह ब्यौरा दिया गया है कि 2010 के चुनाव में किस तरह कथित रूप से वोट खरीदे और बेचे गए- और कैसे फ़ीफ़ा के अस्पष्ट नियमों का बोली लगाने वाले देशों ने फ़ायदा उठाया.

अख़बार का दावा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपने देश के बोली जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें फ़ीफ़ा के अद्यक्ष सेप ब्लैटेर को वोटों को अपने पक्ष में शामिल करना भी है.

यह भी दावा किया गया है कि रूस ने यूरोपीय फ़ुटबॉल संघ अध्यक्ष और वोटर मिशेल प्लैटिनि को अपने पक्ष में करने के लिए पिकासो की एक पेंटिंग दी.

क़तर के बारे में आरोप है कि प्राकृतिक गैस उद्योग में अपनी प्रभुता का इस्तेमाल उसने द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के ज़रिए वोट हथियाने के लिए किया.

विश्व कप 2018 के लिए बोली जीतने वाले रूस और 2022 के विजेता क़तर दोनों ही किसी भी तरह के ग़लत बर्ताव का विरोध करते रहे हैं और हाल ही में फ़ीफ़ा की एक जांच में उन्हें मुक्त भी कर दिया गया है.

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