पुराने रिकॉर्डों के बीच नए खिलाड़ी

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केरल में शनिवार को एक भव्य उद्घाटन समारोह के साथ ही भारत के 35वें राष्ट्रीय खेलों का शुभांरभ हो गया.

इन खेलों के गुडविल एम्बैसडर भारत रत्न और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ रहे सचिन तेंदुलकर हैं.

14 फ़रवरी को इन खेलों का समापन समारोह होगा. बार इन खेलों में कुल मिलाकर 33 स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा.

(पढ़ेंः गोटी या कंचा खेलना...)

इनमें सबसे अधिक 50 पदक तैराकी की स्पर्द्धाओं में दांव पर होंगे. इसके बाद एथलेटिक्स में 44 और निशानेबाज़ी में 38 तथा कैनोइंग में 36 और कुश्ती में भी 24 पदकों के लिए खिलाड़ी संघर्ष करेंगे.

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Image caption ओलम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार इन खेलों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

सचिन तेंदुलकर के जुड़ने से राष्ट्रीय खेलों को एक अलग पहचान मिली है, वहीं दूसरी तरफ कुछ स्पर्द्धाओं में देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

इससे इन खेलों की उपयोगिता पर बड़े सवाल पैदा होते हैं.

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एक तरफ भारतीय मुक्केबाज़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान बनाई है लेकिन अपने ही देश में उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ और बॉक्सिंग इंडिया के बीच चल रही लड़ाई का ख़ामियाज़ा भुगतना पड रहा है.

भारतीय ओलंपिक संघ ने अभी तक बॉक्सिंग इंडिया को मान्यता नहीं दी है. यही कारण है कि स्टार मुक्केबाज़ों ने इन खेलों से दूर रहने का फ़ैसला किया है.

घरेलू खेल मेला

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इसके अलावा बीजिंग ओलंपिक के कांस्य और लंदन ओलंपिक के रजत पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार और लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतने वाली साइना नेहवाल का जलवा भी इन राष्ट्रीय खेलों में देखने को नहीं मिलेगा.

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इन खेलों के आयोजन की तिथि पहले से ही तय थी. इसके बावजूद लगभग तीन साल बाद इनका आयोजन किया जा रहा है.

इससे साफ़-साफ़ पता चलता है कि भारत अपने घरेलू खेल मेले को लेकर कितना गंभीर है और जिस राज्य में इसका आयोजन होता है, वह भी कितनी गंभीरता से इसकी ज़िम्मेदारी लेते हैं.

दर्ज रिकॉर्ड

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Image caption 1954 के राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन के मौके पर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद.

सुनने में तो यह भी आया कि अभी कि कुछ स्पर्द्धाओं के लिए तैयारी पूरी नहीं है लेकिन अब जैसे-तैसे आयोजन को कामयाब बनाया जाएगा.

इससे पहले भी केरल साल 1987 में इन खेलों का आयोजन कर चुका है लेकिन उसके बाद अगले राष्ट्रीय खेलों का आयोजन साल 1994 में पुणे में हुआ. एथलेटिक्स में आज भी कई रिकॉर्ड टूटने का इंतज़ार कर रहे हैं.

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Image caption साइना भी 35वें राष्ट्रीय खेलों में हिस्सा नहीं ले रही हैं.

मैराथन में शिवनाथ सिंह का 1978 में जांलधर में, 800 मीटर दौड़ में 1976 में मॉन्ट्रियल ओलंपिक में श्रीराम सिंह का, 1998 में बैंकॉक एशियाई खेलों में चार गुना चार सौ मीटर में पुरुष टीम का रिकॉर्ड, 1995 में चेन्नई में 1500 मीटर में बहादुर प्रसाद और साल 2005 में दिल्ली में अनिल कुमार और साल 2010 में भी दिल्ली में ही अब्दुल नजीम क़ुरैशी के 100 मीटर दौड़ के रिकॉर्ड आज भी किताबों में बने हुए हैं.

इसके अलावा एथलेटिक्स के और भी कई रिकॉर्ड वर्तमान एथलीटों की चुनौती बने हुए हैं. अभी तो इन खेलों की शुरुआत है.

देखना है कि कितने नए खिलाड़ी नए रिकॉर्ड के साथ भारत को मिलते हैं. वैसे भारत में पहले राष्ट्रीय खेलों का आयोजन साल 1924 में मद्रास में हुआ था.

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