अंपायरिंग विवाद दुर्भाग्यपूर्ण: आईसीसी

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विश्व कप क्रिकेट के क्वार्टर फ़ाइनल में भारत ने बांग्लादेश को हराकर सेमी फ़ाइनल में जगह तो बना ली है, लेकिन इस मैच के दौरान अंपायरिंग को लेकर विवाद फ़िलहाल थमता नज़र नहीं आ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के अध्यक्ष मुस्तफ़ा कमाल ने अंपायरिंग की काफ़ी आलोचना की थी. अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का कहना है कि मुस्तफ़ा कमाल को ये मुद्दा आईसीसी के सामने उठाना चाहिए.

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्ड्सन ने भी इस मामले पर बयान जारी करके अंपायरों के प्रति अपना समर्थन जताया है और कहा कि मुस्तफ़ा कमाल का बयान उनका निजी विचार है.

रिचर्ड्सन ने अपने बयान में कहा है, "आईसीसी ने मुस्तफ़ा कमाल के बयान का संज्ञान लिया है, जो काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन ये उनके निजी विचार हैं. आईसीसी अध्यक्ष के रूप में उन्हें मैच अधिकारियों की आलोचना करते समय ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए क्योंकि मैच अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाए जा सकते."

विवाद

भारत के ख़िलाफ़ मैच में बांग्लादेश 109 रनों से हार गया था. इस मैच के दौरान रोहित शर्मा जिस गेंद पर कैच आउट हुए थे, वो नो बॉल करार दी गई थी.

इसी को लेकर काफ़ी विवाद उठ रहा है, क्योंकि उस समय रोहित शर्मा को आउट नहीं दिया गया और बाद में रोहित शर्मा ने शतक लगाया.

रोहित की पारी ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.

पाकिस्तान के अंपायर अलीम दार ने उस गेंद को कमर से ऊँची मानते हुए नो बॉल करार दिया था, हालाँकि टीवी रीप्ले से पता चल रहा था कि मामला क़रीब था और किसी भी ओर जा सकता था.

सम्मान

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रिचर्ड्सन ने अपने बयान में कहा- अंपायर का फ़ैसला 50-50 था. लेकिन क्रिकेट की भावना ये कहती है कि अंपायर का फ़ैसले अंतिम होता है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए.

दूसरी ओर बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने मुस्तफ़ा कमाल को सलाह दी है कि वे इस गंभीर मुद्दे को आईसीसी के सामने उठाएँ.

मुस्तफ़ा कमाल बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं. उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल मैच में अंपायरिंग को काफ़ी ख़राब कहा था.

बांग्लादेश में अंपायरिंग को लेकर काफ़ी शोर-शराबा हुआ है और लोगों ने अंपायर अलीम दार का पुतला भी जलाया. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी कहा है कि वो इसकी शिकायत आईसीसी से करेंगे.

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