'टीम इंडिया नहीं, टीम धोनी की है हार'

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क्रिकेट विश्व कप में जब भारतीय टीम हिस्सा लेने गई थी तो खिलाड़ी नारा लगा रहे थे, 'वी वोन्ट गिव इट बैक' यानी हम वर्ल्ड कप वापस नहीं देंगे.

लेकिन, ऑस्ट्रेलिया ने सेमी फ़ाइनल में भारत का विजय रथ रोक दिया.

सेमी फ़ाइनल में 95 रन से मिली करारी हार के बाद क्रिकेट फैंस निराश हैं और क्रिकेट एक्सपर्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की रणनीतियों पर सवाल उठा रहे हैं.

'कप्तानी छोड़ें धोनी'

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वरिष्ठ खेल पत्रकार चंद्रशेखर लूथरा तो बतौर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के प्रदर्शन, टीम के चुनाव और रणनीति से इस कदर ख़फा हैं कि उन्हें कप्तानी छोड़ने की सलाह दे रहे हैं.

लूथरा ने बीबीसी से कहा, ''ये टीम धोनी खेल रही थी, टीम इंडिया नहीं. टीम धोनी जब हार गई है तो मैं उम्मीद करूंगा कि एक-दो दिन में भारत आने पर उनके संन्यास की ख़बर आनी चाहिए. अगर वो रिटायर नहीं होते तो मैं सेलेक्टर्स से उम्मीद करूंगा कि उनकी कप्तानी छीन लें. बतौर प्लेयर अगर उनकी वनडे और टी-20 में जगह बनती है तो रखें.''

'करियर बचाने को खेले धोनी'

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लूथरा मानते हैं कि क्योंकि भारतीय टीम सेमी फ़ाइनल में पहुंचने में कामयाब रही, इसी वजह से हार के बावजूद धोनी और टीम की आलोचना नहीं हो रही, जबकि हकीक़त ये है कि वर्ल्ड कप में भारत को ऑस्ट्रेलिया के पहले किसी टीम ने 'टेस्ट' ही नहीं किया. जब अच्छा खेलने का मौका आया तो खिलाड़ी फ़ेल हो गए.

लूथरा ने कहा, ''कप्तानी में धोनी कन्फ्यूज़ दिखे. उन्हें अश्विन को 11वें या 12वें ओवर में लाना चाहिए था. वो बॉलर के पास नहीं जा रहे थे वो बॉलर को रोटेट नहीं कर पा रहे थे. धोनी ने रन भी किए तो ऐसा लगा कि अपने पचास रन करने या अपना करियर बचाने के लिए खेल रहे हैं.''

'क्यों नहीं बदला बैटिंग ऑर्डर?'

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1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे मदन लाल ने भी सेमी फ़ाइनल में धोनी की बल्लेबाज़ी और रणनीति की आलोचना की.

मदन लाल ने कहा, ''हमने मैच बीच में आकर छोड़ दिया. जब अजिंक्य रहाणे और धोनी बैटिंग कर रहे थे तब हमें थोड़ा सा अग्रेसिव होना चाहिए था. जब धोनी पिछले वर्ल्ड कप में नंबर तीन पर आए तो इस बार क्यों नहीं आए नंबर चार पर. चार नंबर पर नहीं आते पांच नंबर पर आते. कहते मैं गेम को प्लान करता हूं.''

'किस काम के रैना?'

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क्रिकेट एक्सपर्ट की नाराज़गी सिर्फ खराब प्रदर्शन को लेकर नहीं है. वो टीम के चयन को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं.

खासकर सुरेश रैना और रवींद्र जडेजा की टीम में मौजूदगी को लेकर धोनी से सवाल पूछे जा रहे हैं.

चंद्रशेखर लूथरा ने सवाल किया, "सुरेश रैना पर बहुत बड़ा सवालिया निशान है. वो किस कोटे में खेल रहे हैं. जब तेंदुलकर को 10 साल का एक्सपीरियेंस था, तब वो ब्रैडमैन के बराबर बन गए थे. आप रैना को अब तक छुपाते चले आ रहे हैं. जडेजा ने आज तक कभी बैटिंग नहीं की. कब तक मौका दोगे? ये इंटरनेशनल क्रिकेट है. प्रदर्शन करना होगा या जाना होगा."

पेस के आगे पस्त!

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ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल मुक़ाबले में रैना सिर्फ़ 7 रन बना सके जबकि जडेजा के बल्ले से सिर्फ़ 16 रन निकले. मदन लाल ने भी रैना की काबिलियत पर सवालिया निशान लगाया.

मदन लाल कहते हैं, "रैना की मुश्किल है रन बनाना. जब तेज़ गेंदबाज़ी होती है उसके लिए मुश्किल आती है. हम मैच देख रहे थे तो लग रहा था कि वो आउट हो जाएँगे."

'सीएसके फैक्टर है हावी'

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कप्तान धोनी के आलोचक रैना और जडेजा जैसे खिलाड़ियों की भारतीय टीम में बने रहने को आईपीएल की चेन्नई सुपरकिंग्स टीम से जोड़कर देखते हैं.

लूथरा ने कहा, " मुझे जो लगता है कि चेन्नई सुपर किंग्स वाला मामला पूरे भारतीय क्रिकेट पर हावी हो चुका है. ये सिर्फ़ धोनी की बात नहीं है."

हालाँकि, हार के बाद शुरू हुई आलोचनाओं के बीच धोनी साफ़ कर चुके हैं कि अभी क्रिकेट को अलविदा कहने का उनका कोई इरादा नहीं है. आलोचकों को जवाब देने का मोर्चा धोनी के फैन्स ने संभाल लिया है, जो सोशल साइट्स पर आलोचकों के हर वार कर रहे हैं पलटवार.

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