क्लार्क: मुश्किल दौर का कप्तान

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Image caption अपनी अंतिम पारी में 74 रन बनाकर क्लार्क ने साबित किया कि अभी उनमें बड़ी पारियाँ खेलने का दम बाक़ी था.

ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में खेले गए फ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को सात विकेट से हराकर विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया.

एक तरफ जहां स्टेडियम में मौजूद दर्शक जीत के जश्न में डूबे थे वहीं उनके मन में मलाल भी था कि अब कप्तान माइकल क्लार्क एकदिवसीय क्रिकेट में खेलते हुए नज़र नहीं आएंगे.

क्लार्क ने फाइनल से पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा कहने जा रहे हैं.

माइकल क्लार्क को जैसी विदाई उनकी टीम ने दी ऐसी शानदार विदाई कम ही खिलाडियों को मिल पाती है.

माइकल क्लार्क ने अपने करियर में 245 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले. उन्होंने 8 शतक और 58 अर्धशतक सहित 7981 रन बनाए. उन्होंने 57 विकेट भी लिए.

मुश्किल वक़्त में कमान

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उन्होंने ऐसे समय में टीम की कमान संभाली थी जब सभी कह रहे थे कि अब विश्व क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा नहीं रहा.

माइकल क्लार्क ने फाइनल में 74 रनों की पारी खेलकर दिखाया कि उनमें अभी भी दमख़म है लेकिन शायद ऑस्ट्रेलियाई खिलाडियों का क्रिकेट को अलविदा कहने का यही अंदाज़ हैं कि शीर्ष पर रहते हुए छोड़े.

अगले महीने दो अप्रैल को वह 34 साल के हो जाएंगे. अब यह उम्र तो दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेट फॉर्मेट को छोड़ने की नहीं होती लेकिन शायद अपनी कमर के दर्द से परेशान होकर उन्होंने यह क़दम उठाया हो.

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