बॉक्सिंग के सबसे महंगे मुक़ाबले की ख़ास बातें

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अमरीका के लॉस वेगस शहर में रविवार को बॉक्सिंग का वो मुक़ाबला हो रहा है जिसे “फ़ाइट ऑफ़ द सेंचुरी” यानी सदी का सबसे बड़ा मुक़ाबला कहा जा रहा है.

मुक़ाबला है दुनिया के सबसे धनी कहे जानेवाले खिलाड़ी फ़्लॉएड मेवैदर और फिलीपींस के मैनी पैकयाओ के बीच और ये बॉक्सिंग के 125 साल पुराने इतिहास का सबसे मंहगा मुक़ाबला है.

लगभग 17000 लोग शहर के एमजीएम एरीना में इस मुक़ाबले को देखेंगे. इन दर्शकों में कई सेलेब्रिटे - रॉबर्ट डी नीरो और क्लिंट ईस्टवुड के भी होने की संभावना है.

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मेवैदर आज तक कोई मुक़ाबला हारे नहीं हैं और पैकयाओ वेल्टरवेट या 63.5-67 किलोग्राम वर्ग में विश्व चैंपियन रह चुके हैं.

लेकिन बॉक्सिंग से कहीं ज़्यादा हंगामा इस बात पर है कि ये दोनों मुक्केबाज़ आमने सामने हैं और इसमें कुल पचास करोड़ डॉलर की कमाई या फिर कहें लेन-देन होने जा रहा है.

इसमें से 18 करोड़ डॉलर मेवैदर को मिलेंगे और 12 करोड़ पैकयाओ के खाते में जाएंगे.

लाखों की टिकट

अगर आप टीवी पर इस टक्कर को देखना चाहें तो (अमरीका में) कीमत है लगभग साढ़े छह हज़ार रुपए....जहां ये मुक़ाबला हो रहा है उसके ठीक सामने बने होटल के बार में लगे टीवी पर देखना चाहें तो टिकट है लगभग 25,000 रुपए.

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अगर एरीना के अंदर बैठकर मुक़ाबला देखना हो तो सबसे सस्ती टिकट है लगभग एक लाख रुपए की, जो री-सेल पर छह लाख रुपए की मिल रही है.

कुछ टिकटों की कीमत एक लाख डॉलर यानि 65 लाख रुपए तक की है. हॉलीवुड के सितारे और उद्योग जगत के अरबपति इनके लिए कतार में हैं.

बॉक्सिंग को कितना फायदा?

इसकी आलोचना भी हो रही है कि ये मुक़ाबला बॉक्सिंग की घटती लोकप्रियता को बढ़ाने में शायद ही कोई मदद करे.

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कहा जा रहा है कि बहुत थोड़े लोग, बहुत ज़्यादा पैसा देकर ये मुक़ाबला देखेंगे और नए दर्शक इससे जुड़ नहीं पाएंगे.

इसके अलावा इस बात की भी आलोचना हो रही है कि बॉक्सिंग का स्तर भी साधारण ही रहेगा क्योंकि मेवैदर अब 38 साल के हो चुके हैं वहीं पैकयाओ की उम्र अब 36 की हो चुकी है.

बॉक्सिंग विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि मुक़ाबला 12 राउंड तक चले और काफ़ी हद तक रक्षात्मक बॉक्सिंग देखने को मिले.

बदल गई बॉक्सिंग

अमरीका में बॉक्सिंग की परंपरा बेहद पुरानी है.

अफ़्रीका से गुलाम बनाकर लाए गए काले मज़दूरों को आपस में लड़वाया जाता था, शर्त लगाई जाती थी और 19वीं सदी में इसे ग़ैरक़ानूनी करार दिए जाने के बाद भी लुक-छिपकर ये चलता रहता था.

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बीसवीं सदी में मुहम्मद अली, माइक टायसन जैसे सितारों ने पूरी दुनिया में इसे काफ़ी लोकप्रियता दी.

लेकिन कहा जा रहा है कि पिछले कई सालों में टीवी के राइट्स और पैसे ने इस खेल को पूरी तरह से अपने शिकंजे में ले लिया है और ये आम दर्शकों को तो इस खेल के एक तरह से बाहर ही कर दिया है.

वहीं ये सोशल मीडिया के युग का सबसे बड़ा मुक़ाबला है तो चर्चा काफ़ी हो रही है इसकी, पार्टियां हो रही हैं, बीयर गटकी जा रही है और एक जश्न का माहौल बना हुआ है.

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