फ़ीफ़ा स्कैंडल का भारत पर क्या होगा असर?

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दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. लेकिन गलत कारणों से. ज़्यूरिख में अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ(फ़ीफ़ा) के सात उच्च अधिकारियों की षडयंत्र और भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी के बाद विश्व खेल जगत में सनसनी फैल गई है.

गिरफ्तार अधिकारियों पर दस करोड़ डॉलर (करीब साढ़े छह अरब रुपए) रिश्वत लेने का आरोप है. गिरफ्तार लोगों में फ़ीफ़ा के एक उपाध्यक्ष भी शामिल हैं.

दुनिया के सबसे अमीर खेल संघ फ़ीफ़ा के कुछ अधिकारियों पर अक्सर इल्ज़ाम लगते रहे हैं और इनमें और तेज़ी आई जब रूस को 2018 के विश्व कप की मेज़बानी का अधिकार दिया गया. और जब क़तर के शहर दोहा को 2022 विश्व कप मेज़बानी सौंपी गयी.

मीडिया में बार बार यह कहा जाता रहा था कि फ़ीफ़ा के अधिकारिओं ने पैसा खाकर ये फैसले लिए थे. लेकिन अब जब ये गिरफ्तारियां हुई हैं तो मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है.

निगाहें फ़ीफ़ा पर

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Image caption फ़ीफ़ा के गिरफ़्तार अधिकारी

अमरीका में फ़ीफ़ा के 14 पूर्व और वर्तमान अधिकारियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच शुुरू होने के बाद दुनिया की निगाहें फ़ीफ़ा पर हैं.

फ़ीफ़ा से 209 देशों के राष्ट्रीय फ़ुटबॉल संघ जुड़े हैं जिनमे 47 एशिया में हैं. इनमें भारत का आल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन भी शामिल है और इस बड़ी घटना का असर भारत पर भी पड़ेगा.

अक्सर राष्ट्रीय खेल महासंघों पर अंतरराष्ट्रीय संघों के साथ सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं. जब भी भारत के खेल मंत्रालय ने इनपर लगाम लगाने की कोशिश की तो यह देसी संघ अंतरराष्ट्रीय संघों का हवाला देकर और ऑटोनॉमी की बात करके अपने को बचा लेते हैं.

क्योंकि इन देसी संघों के पास अंतरराष्ट्रीय संघों के चुनाव में कम से कम दो वोट होते हैं इसलिए यह अंतरराष्ट्रीय संघ भी इनका पक्ष लेते हैं. ऐसे में लगता नहीं कि भारतीय फुटबॉल महासंघ, फ़ीफ़ा अध्यक्ष सेप ब्लैटर के खिलाफ जाएगा.

शुक्रवार को चुनाव

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Image caption प्रिंस अली बिन अल हुसैन(बाएँ) और सेप ब्लैटर

फ़ीफ़ा अधिवेशन गुरुवार से शुरु हो रहा है, जिसमें शुक्रवार को उसके अगले अध्यक्ष का चुनाव होना है. सेप ब्लैटर का लगातार पांचवीं बार अध्यक्ष चुने जाने की पूरी संभावना है.

अध्यक्ष पद के लिए ब्लैटर के एकमात्र विरोधी जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन हैं. प्रिंस अली फ़ीफ़ा उपाध्यक्ष भी हैं. ब्लैटर की ही कमान में भारत को 2017 में 17 वर्ष से कम उम्र के खिलाडियों के विश्व कप की मेज़बानी मिली है.

इन टूर्नामेंट के अलावा देसी फुटबॉल संघों को फ़ीफ़ा की तरफ से खेल के विस्तार के लिए साल 2014 में लगभग दो करोड़ रुपए मिले थे. वहीं एशियाई फ़ुटबॉल संघ भी भारत को समय समय पर फ़ुटबॉल के विकास के लिए आर्थिक मदद देता रहता है. साल 2013 में एशियाई संघ ने भारत को 50 हज़ार डॉलर दिए थे.

फ़ीफ़ा की तरफ से इस समय एशिया में 167 प्रोजेक्ट चल रहे हैं. पिछले साल फ़ीफ़ा ने भारत में कई फुटबॉल अकादमियाँ भी स्थापित की हैं. हाल की गिरफ्तारियों से भारत के फुटबॉल पर भी सीधा असर पड़ेगा.

एशिया का समर्थन

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एशियाई फुटबॉल फेडरेशन ने खुले रूप से शुक्रवार को होने वाले चुनाव में एकजुट होकर सेप ब्लैटर को वोट देने की बात कही है.

लेकिन सवाल यह है कि क्या भारतीय फुटबॉल संघ प्रधानमंत्री मोदी के रिश्वत मुक्त भारत की अवहेलना करके ब्लैटर को वोट देगा या फिर चुनाव से दूर रहकर दोनों नावों में सवार होने की कोशिश करेगा.

भारतीय फ़ुटबॉल संघ के अध्यक्ष एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल हैं. वो ज्यूरिख में हो रही बैठक में शामिल होने गए हैं. लेकिन अभी तक यह नहीं पता चला है कि भारत का इसपर आधिकारिक रुख क्या है.

ऐसे में भारत में 2017 में होने वाले विश्व कप पर इसका क्या असर पडेगा यह सोचने वाली बात है.

भारत पर असर

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भारतीय खेल मंत्रालय के लिए भी यह चुनौती है कि क्या ऐसे अंतरराष्ट्रीय खेल संघ की अकादेमी भारत में चलनी चाहिए जिसके सात उच्च अधिकारी कथित रूप से घूसखोरी में गिरफ्तार हुए हों?

उधर कई नामी गिरामी कंपनियों ने भी मामले को जल्द न सुलझाने की स्थिति में फ़ीफ़ा से स्पॉन्सरशिप वापस लेने की बात कही है.

इन कंपनियों में वीसा, कोका कोला, एडीडाज़, मैकडोनाल्ड आदि शामिल हैं. और यह सब भारतीय फ़ुटबॉल से भी जुड़ी हैं. यह भारतीय फुटबॉल के लिए समस्या पैदा कर सकता है.

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