फ़ीफ़ा स्कैंडलः सवाल जो उठ रहे हैं?

फ़ीफ़ा गिरफ़्तार अधिकारी इमेज कॉपीरइट AFP

फ़ुटबॉल का अंतरराष्ट्रीय महासंघ फ़ीफ़ा भ्रष्टाचार के दो मामलों में जाँच का सामना कर रहा है.

अमरीकी अधिकारियों के अनुरोध पर स्विट्ज़रलैंड में फ़ीफ़ा के सात अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है.

इन अधिकारियों पर क़रीब 15 करोड़ डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप है.

इस गिरफ़्तारी के कुछ देर बाद ही स्विट्ज़रलैंड ने भी 2018 और 2022 विश्वकप की मेजबानी पाने की प्रक्रियाओं में रिश्वतखोरी की जाँच शुरू कर दी.

स्विट्ज़रलैंड की पुलिस ने ज्यूरिख़ में फ़ीफ़ा के मुख्यालय पर छापा मारकर इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए हैं.

ये अहम क्यों हैं?

इमेज कॉपीरइट Reuters

फ़ीफ़ा दुनियाभर में फ़ुटबॉल का संचालन करने के लिए ज़िम्मेदार संस्था हैं. हाल के सालों में उस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. ख़ासकर क़तर को 2022 विश्वकप की मेजबानी देने के कारण.

दिसंबर 2014 में फ़ीफ़ा ने भ्रष्टाचार की अपनी आंतरिक जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया था. फ़ीफ़ा का कहना है कि जाँच में बिडिंग प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध नहीं हुए थे. रिपोर्ट बनाने वाले अमरीकी नागरिक माइकल गार्सिया ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

फ़ुटबॉल विश्वकप दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन होता है. इससे अरबों डॉलर की कमाई होती है. इन गिरफ़्तारियों और जांच ने पिछले तीन विश्वकपों की मेजबानी देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी पर शक़ पैदा किया है.

क्या हैं ये दो जाँचें?

इमेज कॉपीरइट Getty

अमरीकी अभियोग- इसके तहत 1991 के बाद से अब तक के मामलों की जाँच की जा रही है. ये बेहद गंभीर मामला है क्योंकि इसमें अभियुक्तों को जेल भी हो सकती है. ज्यूरिख में गिरफ़्तार सात लोगों के अलावा सात अन्य लोगों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया गया है.

स्विट्ज़रलैंड में मुकदमा - स्विस पुलिस की जाँच अभी शुरुआती चरण में है लेकिन इसका असर आने वाले विश्वकपों पर हो सकता है. ऐसा पहली बार हुआ है जब अभियोग चलाने के अधिकार रखने वाली एजेंसी के पास बिडिंग प्रक्रिया की जाँच कर रही है.

हालांकि अपनी जाँच में स्विट्ज़रलैंड पुलिस ने फ़ीफ़ा को पीड़ित पक्ष बताया है. इसका मतलब यह है कि वह उन लोगों की जाँच कर रही है जिन्होंने बिडिंग प्रक्रिया का फ़ायदा उठाकर काले धन को सफ़ेद बनाया है.

किन पर है भ्रष्टाचार के आरोप

अमरीकी अधिकारियों के आग्रह पर गिरफ़्तार किए गए लोग उत्तरी अमरीका, लातिन अमरीका और कैरीबिया द्वीप के फ़ुटबॉल जगत के शीर्ष लोग हैं.

इनका संबंध कंफ़ेडेरेशन ऑफ़ नॉर्थ, सेंट्रल अमरीका एंड कैरिबियन एसोसिएशन फ़ुटबॉल (कोनकाकाफ़) से है. यह संस्था फ़ीफ़ा का हिस्सा है और इस क्षेत्र में फुटबॉल के लिए ज़िम्मेदार है. यह अमरीका में विश्वकप के टीवी और स्पांसरशिप सौदों के लिए ज़िम्मेदार है.

इमेज कॉपीरइट AFP

जेफ़री वेब कोनकाकाफ़ के अध्यक्ष हैं और उन्हें फ़ीफ़ा अध्यक्ष सेप ब्लैटर का उत्तराधिकारी माना जा रहा था. उनके पूर्ववर्ती अध्यक्ष जेक वार्नर का नाम भी अभियोग में शामिल है. वार्नर पर धोखाधड़ी के आरोप लगने के बाद वेब अध्यक्ष बने थे.

एक और अन्य अहम शख़्स हैं चार्ल्स ब्लेज़र, ये फ़ीफ़ा में अमरीका के पूर्व प्रतिनिधि हैं. वो जांच में एफ़बीआई की मदद कर रहे हैं और उन्होंने आरोपों को स्वीकार करते हुए 19 लाख डॉलर लौटा दिए हैं.

गिरफ़्तार किए गए अन्य लोगों में फ़ीफ़ा के सेंट्रल और दक्षिण अमरीका के अधिकारी शामिल हैं.

क्या सेप ब्लैटर भी गिरफ़्तार किए गए हैं?

नहीं, फ़ीफ़ा के अध्यक्ष और फ़ुटबॉल की दुनिया के सबसे ताक़तवर आदमी सेप ब्लैटर का नाम अमरीकी अभियोग पत्र में नहीं है.

हालांकि जो लोग गिरफ़्तार हुए हैं वे उनकी अध्यक्षता वाली फ़ीफ़ा के लिए काम कर रहे थे. ब्लैटर ने अभी तक कोई बयान भी नहीं दिया है.

हाल ही में उन्हें उन रिपोर्टों का खंडन करना पड़ा था जिनमें कहा गया था कि वे गिरफ़्तारी से बचने के लिए के डर से अमरीका नहीं जा रहे हैं.

अधिकारी क्यों गिरफ़्तार किए गए?

इमेज कॉपीरइट AFP

एफ़बीआई पिछले तीन सालों से फ़ीफ़ा की जाँच कर रही है. इस जांच में 2018 के विश्वकप की मेजबानी रूस और 2022 के विश्वकप की मेजबानी क़तर को मिलने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद तेजी आई. लेकिन इसका दायरा बढ़ाकर पिछले 20 सालों के आयोजनों को भी जाँच में शामिल कर लिया गया.

अमरीकी न्याय विभाग में चल रहे महाभियोग में कहा गया है कि भ्रष्टाचार की योजना अमरीका में बनाई गई थी भले ही यह अमरीका के बाहर ही क्यों न किया गया हो. पैसा भेजने के लिए अमरीकी बैंकों का इस्तेमाल किया जाना जाँच में अहम माना जा रहा है.

स्विट्ज़रलैंड ही क्यों?

स्विट्ज़रलैंड फ़ीफ़ा का घर है. कंपनी यहाँ एक चैरिटी के रूप में पंजीकृत है और मामूली टैक्स देती है.

स्विट्ज़रलैंड को भले ही ऐसे देश के रूप में देखा जाता है जहाँ कम पारदर्शिता वाली कंपनियों का भी स्वागत होता है, ख़ासकर अगर बात टैक्स की हो. लेकिन अमरीका के साथ उसकी प्रत्यर्पण संधि की वजह से स्विट्जरलैंड अपराधियों को अमरीका को सौंप देगा.

ऐसा लगता है कि अमरीकी अधिकारियों ने इस बात का फायदा उठाया कि फ़ीफ़ा की सालाना कांग्रेस में शामिल होने के लिए सभी संदिग्ध स्विट्जरलैंड में जुटेंगे.

कितना पैसा?

इमेज कॉपीरइट Getty

कहा जा रहा है कि बहुत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है.

अमरीकी अभियोग के मुताबिक यह रक़म 15 करो़ड़ डॉलर हो सकती है लेकिन इसमें अमरीका से बाहर दुनिया के दूसरे देशों में हुआ भ्रष्टाचार शामिल नहीं है.

फ़ीफ़ा अपनी क़रीब सारी कमाई विश्वकप से करता है. यह दुनिया का सबसे चर्चित खेल आयोजन जो होता है. इसके सामने ओलिंपिक भी फ़ीका रहता है. पिछले साल के वर्ल्ड कप में ब्राज़ील ने क़रीब चार अरब डॉलर ख़र्च किए. बावजूद इसके फ़ीफ़ा ने दो अरब डॉलर की कमाई की.

अगले विश्व कपों को इससे भी ज़्यादा ख़र्चीला माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि क़तर छह अरब डॉलर से अधिक ख़र्च कर रहा है.

विश्वकप की मेज़बानी पाने की प्रक्रिया ही बेहद ख़र्चीली है. इंगलिश फ़ुटबॉल एसोसिएशन ने 2018 विश्वकप के लिए अपनी नाकाम कोशिश पर सवा दो करोड़ डॉलर ख़र्च किए थे.

क्या रूस और क़तर से विश्वकप की मेजबानी वापस ली जाएगी?

इमेज कॉपीरइट Reuters

इसकी संभावना नहीं है लेकिन ये नामुमकिन भी नहीं है.

अमरीकी अभियोग में बीते सालों के भ्रष्टाचार की जाँच हो रही है. इसमें 2010 में दक्षिण अफ़्रीका में हुए विश्व कप का ज़िक्र है. हालांकि इसमें आने वाले विश्पकपों का ज़िक्र नहीं है.

स्विट्ज़रलैंड की जाँच आने वाले विश्वकपों पर भी केंद्रित होगी. यदि जांच में भ्रष्टाचार के बड़े सबूत मिलते हैं तो शायद मेज़बानी की प्रक्रिया दोबारा की जाए.

वास्तव में, 2018 के रूस विश्वकप को हटाना बहुत मुश्किल होगा. बहुत कम देशों के पास ही इतने कम समय में विश्वकप आयोजित करने के लिए ज़रूरी सुविधाएं और स्टेडियम हैं.

ज़्यादातर इंगलिश स्टेडियमों को भी फ़ीफ़ा के मानकों पर ख़रा उतरने के लिए मरम्मत की ज़रूरत होगी. जर्मनी सबसे अच्छा विकल्प होगा क्योंकि वहां 2006 का विश्वकप आयोजित किया गया था.

क़तर इस तुलना में कहीं ज़्यादा कमज़ोर है क्योंकि जब से उसे मेज़बान घोषित किया गया है तब से ही वह विवादों में घिरा हुआ है. भ्रष्टाचार के आरोप, गर्मियों के बजाए सर्दियों में आयोजन और अप्रवासी मज़दूरों की स्थिति को लेकर विवाद के बावजूद संभावना यही है कि विश्वकप क़तर में ही हो.

क्या सेप ब्लैटर पाँचवी बार फ़ीफ़ा अध्यक्ष बनेंगे?

इमेज कॉपीरइट Reuters

फ़ीफ़ा अध्यक्ष का चुनाव शुक्रवार को होना है. माना जा रहा है कि ब्लैटर जीत जाएंगे. लेकिन ताज़ा घटनाक्रम से सबकुछ बदल सकता है.

ब्लैटर को अफ़्रीका और एशिया का समर्थन है. सवाल यह है कि क्या अगले 48 घंटों में पाला बदलेगा और उनके प्रतिद्वंदी प्रिंस अली बिन अल हुसैन की दावेदारी मज़बूत होगी.

209 सदस्ययी वाली संस्था में अब ज़बर्दस्त ख़ेमेबाज़ी होगी. यूरोपीय देश शीर्ष पद पर बदलाव चाहते हैं लेकिन क्या वे बाक़ी दुनिया को इसके लिए मना पाएंगे?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार