मैं हमेशा चाहती हूँ भारत ही जीते: सानिया

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Image caption सानिया मिर्ज़ा और मार्टिना हिंगिस की जोड़ी ने विंबलडन महिला डबल्स 2015 का ख़िताब जीता.

विंबलडन में महिला डबल्स जीतने वाली सानिया मिर्ज़ा ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के मैच में वो हमेशा ही चाहती हैं कि मैच भारत ही जीते, भले ही उनके पति शोएब मलिक जितने भी रन बनाएँ.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें और शोएब को दोनों देशों के बीच कोई फर्क नहीं महसूस होता.

उन्होंने कहा, "मुझे पाकिस्तान में बहुत प्यार मिलता है, शोएब को भी भारत में बहुत प्यार मिलता है. दोनों देशों में रहन-सहन खान-पान में समानताएं हैं, तो कोई मुश्किल होती नहीं हैं."

Image caption टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा और बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव.

सानिया बुधवार को हैदराबाद में बीबीसी गूगल हैंगआउट में शामिल हुईं. हैंगआउट में उन्होंने बीबीसी हिन्दी के पाठकों के सवालों के जवाब दिए.

सानिया मिर्ज़ा के साथ बीबीसी गूगल हैंगआउट यहाँ देखें

सानिया ने बताया कि वो छह साल की उम्र से टेनिस खेल रही हैं लेकिन 11-12 की उम्र में एडीडास के नेशनल मैच, अंडर-14 और अंडर-16 जीतने के बाद इसे अपना करियर बनाने को लेकर वो गंभीर हो गईं.

कड़ा मुक़ाबला

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सानिया मानती हैं कि भारत में पुरुष टेनिस की स्थिति महिला टेनिस से बेहतर है.

हालांकि उन्हें प्रार्थना थोंबरे, अंकिता रैना और करमन कौर थंडी जैसी युवा महिला खिलाड़ियों से काफ़ी उम्मीद है.

सानिया से जब उनके अक्सर विवादों में घिर जाने के बार में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं ख़ुशनसीब हूँ कि पिछले 10 सालों से मैं इतनी लोकप्रिय हूँ कि मैं जो करूँ या जो न भी करूँ वो ख़बर बन जाती है."

टेनिस सिंगल्स में विश्व स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों ज़्यादा अच्छे प्रदर्शन न करने पर सानिया ने कहा कि इसकी वजह है भारत में टेनिस का लोकप्रिय खेल न होना.

उन्होंने कहा, "भारत में लोग यहाँ लोग घर से बाहर निकल क्रिकेट खेलते हैं, टेनिस नहीं."

सानिया मानती हैं कि टेनिस में मुक़ाबला भी काफ़ी कड़ा होता है क्योंकि दुनिया में डेढ़ सौ से अधिक देशों में टेनिस खेली जाती है.

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