'भारत में सिर्फ़ क्रिकेट बिकेगा'

क्रिकेट स्टम्प

भारतीय क्रिकेट में हाल की घटनाओं के बाद ये सवाल खड़ा हो गया था कि क्या देश की क्रिकेट से स्पॉन्सर पहले की तरह जुड़े रहेंगे?

इसी बात को ध्यान में रखते हुए बाकी खेलों के आयोजकों को थोड़ी आशा बंधी थी कि स्पॉन्सर शायद टेनिस, गोल्फ जैसे खेलों को ज्यादा तरज़ीह देंगे.

कबड्डी की तरह अक्सर न बिकने वाले कुश्ती जैसे खेल में भी आगामी प्रो रेस्लिंग लीग में अच्छे खासे स्पॉन्सर मिलने की उम्मीद जगी थी.

लेकिन क्रिकेट ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि भारत में उसकी जड़ें बहुत मज़बूत हैं और घोटालों के बावजूद भी उन्हें हिलाना आसान नहीं है.

ई-कॉमर्स कंपनी पेटीएम ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नए मुख्य प्रायोजक के रूप में जुड़कर यह साबित कर दिया है कि भारत में सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट ही बिकेगा.

210 करोड़ रुपए का अनुबंध

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बीसीसीआई ने पेटीएम के साथ 210 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है. यह अनुबंध अगले चार साल के लिए है.

अनुबंध हासिल करने लिए माइक्रोमैक्स और पेटीएम दोनों ने बोली लगाई थी, लेकिन ख़बरों के अनुसार पूर्व मुख्य प्रायोजक माइक्रोमैक्स ने अपने सारे दस्तावेज़ जमा नहीं किए थे जिससे ये अनुबंध पेटीएम को मिल गया.

नए करार के मुताबिक, हर मैच के लिए बीसीसीआई को 2.42 करोड़ रुपए मिलेंगे जबकि पहले माइक्रोमैक्स के ज़रिए बीसीसीआई को 2.02 करोड़ रुपए मिलते थे.

यानी अब बीसीसीआई को हर मैच 40 लाख रुपए और चार साल में करीब 30 करोड़ रुपए का ज्यादा फ़ायदा होगा.

साथ ही बीसीसीआई को लगभग 20 प्रतिशत रकम का फ़ायदा होगा.

वर्ष 2019 तक के लिए किए गए अनुबंध के तहत अब घरेलू रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट को भी पेटीएम रणजी ट्रॉफी के नाम से जाना जाएगा.

चीनी कनेक्शन

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पेटीएम कंपनी का रिश्ता चीन की अलीबाबा कंपनी से है और अलीबाबा ने पेटीएम में पैसा भी लगाया है.

यह अलग बात है कि चीन में क्रिकेट का नामो-निशान नहीं है.

ऐसा माना जा रहा है कि चूंकि भारत में ई-कॉमर्स में एफ़डीआई की इजाज़त नहीं है, इसलिए अलीबाबा पेटीएम के रास्ते मार्केट-प्लेस मॉडल के ज़रिये बिज़नेस कर रहा है.

मार्केट-प्लेस मॉडल के ज़रिए ही पेटीएम, स्नैपडील और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां भारत में विदेशी धन लगा रही हैं.

ख़ुश है बीसीसीआई

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घरेलू सीरीज़ों के लिए पेटीएम के रूप में नया टाइटल स्पॉन्सर पाकर बीसीसीआई ख़ुश है क्योंकि यह नई पीढ़ी की कंपनी है.

बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर के अनुसार, आने वाले चार वर्ष में यह जुड़ाव भारतीय क्रिकेट को अधिक मज़बूती और निरंतरता प्रदान करेगा.

हालांकि इस अनुबंध को लेकर प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं.

गोवा क्रिकेट के एक अधिकारी के मुताबिक यह अनुबंध बहुत बड़ा नहीं है.

उनका कहना है कि छह साल पहले क्रिकेट संघों को बीसीसीआई से 55 करोड़ रुपए सालाना अनुदान मिलता था.

लेकिन मुश्किल हालात की वजह से पिछले साल इन संघों को अनुदान के तौर पर 18 करोड़ रुपए ही मिले थे.

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