खेल के लिए विलेन क्यों अच्छे होते हैं?

अमरीकी धावक जस्टिन गैटलिन और उसैन बोल्ट इमेज कॉपीरइट AP AFP

बॉक्सर सोनी लिस्टन को जब खेलने का मौका मिला तो उन्होंने कहा था, “बॉक्सिंग का मैच एक फ़िल्म जैसा होता है जिसमें एक कुछ अच्छे लोग होते हैं और कुछ बुरे लोग. और जिस लिए लोग टिकट खरीदते हैं, वो है बुरे आदमी को पिटता देखना.”

लिस्टन हैवीवेट बॉक्सिंग के बैड बॉयज़ में से एक थे. वो हथियार छीनने के दोषी ठहराए गए, पुलिस अधिकारियों को पीटने के दोषी ठहराए गए.

उनके 24 भाई बहन थे.

वरिष्ठ खेल समीक्षक रेड स्मिथ पूछते हैं, “क्या हिंसक आपराधिक रिकॉर्ड वाले एक आदमी को चैंपियन बनने का मौक़ा देना चाहिए.”

लेकिन रेड स्मिथ बॉक्सिंग के अतीत को आसानी से भूल गए.

जब लिस्टन ने 1962 में फ़्लॉयड पैटर्सन को दो मिनट छह सेकेंड में हरा कर हैवीवेट का ताज पहना तो एक बहस शुरू हो गई.

लिस्टन एक ऐसे बैड बॉय थे जिसे चैंपियन के रूप में देखना कोई नहीं चाहता था.

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Image caption बॉक्सर पैटर्सन (बाएं)

अगर सोनी लिस्टन को जस्टिन गैटलिन और फ़्लॉयड पैटर्सन की जगह उसैन बोल्ट को रखें तो कहानी कुछ वैसी ही बनेगी.

दो बार ड्रग कारोबार के दोषी ठहराए गए अमरीकी एथलीट गैटलिन रविवार को बीजिंग में 100 मीटर दौड़ की विश्व चैंपियन प्रतियोगिता में उतरेंगे जहां उनके सामने होंगे स्टार धावक उसैन बोल्ट.

गोल्फ़ खिलाड़ी टाइगर वुड्स के कोच बुच हार्मन टेलीविज़न समीक्षक हैं और उनकी एक आदत है. वो कैमरे की ओर देखते हुए कहते हैं, “क्या कमाल का खिलाड़ी है और कितना प्यारा नौजवान है.”

लेकिन प्यारे लगने वाले आदमी कुछ बोरिंग भी हो सकते हैं.

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शायद इसीलिए जब वुड्स के सेक्स स्कैंडल सामने आए तो उनमें बहुत से लोगों की रुचि बढ़ गई.

हाल ही में हुई गोल्फ़ प्रतियोगिता (यूएसपीजीए- यूएस प्रोफ़ेशन गोल्फ़ एसोसिएशन) का सबसे उम्दा पल वो था जब शॉट लगाते हुए पूर्व चैंपियन जॉन डेली ने अपनी छह स्टिक लेक मिशिगन में फेंक दी थी.

बैड बॉय

ऑस्ट्रेलियाई टेनिस खिलाड़ी निक किरियोस भी कोई प्यारे नौजवान नहीं हैं. हमारे दिखावटी समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं.

बीस साल के किरियोस ने हाल ही में स्तान वावरिंका के ख़िलाफ़ एक मैच के दौरान इस फ्रेंच ओपन चैंपियन की गर्लफ़्रेंड के बारे में एक ऐसा बयान दिया था कि अगर किसी पब में ऐसा कहा होता तो मारपीट हो जाती.

लेकिन 1951 में शीर्ष अमरीकी टेनिस खिलाड़ी जॉन मैकेनरोए अर्ल कोहेल पर अंपायर की कुर्सी तोड़ते, माइक्रोफ़ोन छीनते और रेफ़री के साथ गाली गलौच करने के बाद आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया था.

युद्ध, अकाल और मृत्यु की ख़बरें यूं ही नहीं सुर्खियों में रहती हैं.

टेनिस कोर्ट पर चीखना हो या फ़ुटबॉल के मैदान में विरोधी को काटना (जैसे उरुग्वे के स्ट्राइकर लुई सुआरेज़) या साथी आइस स्केटर के साछ छल करना (1994 में अपने ओलंपिक प्रतिद्वंदी नैंसी केरिगन के साथ टोनी हार्डिंग का व्यवहार) सुर्खियां बनती रही हैं.

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Image caption लुई साआरेज़.

साल 1963 में लिस्टन के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में पैटर्सन महज 17 सेकेंड तक ठहरे.

उन पर ‘खेल को बचाने’ का बहुत दबाव था और ये बात उन्होंने बाद में स्वीकारी भी थी.

और मैच हारने के बाद इतने शर्मिंदा हुए कि काला चश्मा लगाकर शिकागो से निकल गए.

बोल्ट ने भी एथलेटिक्स के रक्षक के रूप में खुद को देखे जाने पर पहले ही संदेह जता दिया है.

उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं, इस खेल के लिए मुझे जीतने की ज़रूरत है, लेकिन यह केवल मैं अपने दम पर ही नहीं कर सकता. यह ज़िम्मेदारी सभी एथलीटों की है.”

गैटलिन बेफ़िक्र

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Image caption अमरीकी धावक जस्टिन गैटलिन.

वहीं गैटलिन इन सब से बेफ़िक्र हैं.

साल 2010 में दूसरी बार प्रतिबंध लगने के बाद लौटे पूर्व ओलंपिक और विश्व चैंपियन ने कहा, “मैं उन्हीं की तरह एक धावक हूँ.”

इस साल उन्होंने 100 मीटर की सबसे तेज़ स्पर्धा में भाग लिया था.

वो कहते हैं कि कोई अच्छा धावक या बुरा धावक नहीं होता.

लेकिन जनता खेल को मनोरंजन की तरह देखना चाहती है और नैतिकता का आम सबक निकालना चाहती है.

जनता चाहती है कि गैटलिन को बैड बॉय और बोल्ट को गुड बॉय के रूप में देखना चाहती है.

इसीलिए जब रविवार को बीजिंग में स्पर्धा का फ़ाइनल होगा तो पूरी दुनिया के लाखों लोग बैड बॉय को हारते देखने के लिए टेलीविज़न पर नज़रें गड़ाए होंगे.

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