'अभी एक-डेढ़ साल और खेल सकता था, लेकिन...'

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कोलंबो टेस्ट श्रीलंका के कुमार संगकारा का आखिरी टेस्ट था. संगा इस टेस्ट की दोनों पारियों में कुछ ख़ास नहीं कर सके, लेकिन दुनिया इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ को जीनियस क्रिकेटर के तौर पर याद करती रहेगी.

भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ शुरू होने से पहले संगा की बीबीसी एशियन नेटवर्क के अंकुर देसाई से बातचीत के ख़ास अंश.

रिटायरमेंट पर

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जब रिटायर्मेंट के बारे में सोचते हैं और इसकी तरफ बढ़ते हैं तो कुछ राहत तो मिलती है, लेकिन साथ में दुख भी होता है.

क्रिकेट ने मेरे जीवन में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन जीवन के कुछ दूसरे पहलू भी होते हैं, इन्हें भी जीना होता है.

टॉप पर रिटायर होने पर

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नहीं, आप टॉप पर भी रिटायरमेंट ले सकते हैं. मैं एक-डेढ़ साल तक और अच्छा खेल सकता हूँ, लेकिन जब आप 38 साल की तरफ बढ़ रहे होते हैं तो अंदर से एक आवाज़ आती है कि बस बहुत हुआ.

मैं विश्व कप के बाद ही रिटायर हो जाना चाहता था, लेकिन फिर इसे चार टेस्ट मैच के लिए आगे खिसका दिया. मुझे इस फ़ैसले को लेकर कोई दुविधा नहीं है.

मेरे पिता ने मुझसे कुछ साल पहले पूछा था कि तुम रिटायरमेंट के बारे में क्यों नहीं सोच रहे हो.

तब मुझे हैरानी हुई थी, क्योंकि मैं अच्छा खेल रहा था. लेकिन फिर जब मैंने इस पर सोचा तो मुझे अहसास हुआ कि उनका सवाल तर्कसंगत था.

महेला-संगा के बिना श्रीलंका क्रिकेट कैसी

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मैं मानता हूँ कि श्रीलंका क्रिकेट बहुत अच्छी तरह से चलेगा. मैं ही क्या मुरली, महेला, वास, अरविंद डीसिल्वा और कई अन्य खिलाड़ी आए और गए.

ऐसा हमारे साथ ही नहीं है बल्कि दूसरे देशों के साथ भी होता है. श्रीलंका में कई प्रतिभावान क्रिकेटर हैं. इन खिलाड़ियों को अपनी भूमिका का मज़ा लेना चाहिए और ज़िम्मेदारी से खेलना चाहिए.

राजनीति में आएँगे क्या?

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राजनीति में तो नहीं जाऊँगा, इतना तय है. मैं उनमें से हूँ जो राजनीति के बारे में बात तो करते हैं, लेकिन इसमें उतरते नहीं हैं.

क्रिकेट को कुछ लौटाने में दिलचस्पी है, फिर चाहे वो कोचिंग हो, प्रशासनिक रूप में या कमेंट्री. अभी सोचूँगा, फिर तय करूँगा.

सबसे पहले तो मैं अपने परिवार और माता-पिता के साथ अधिक से अधिक समय गुजारना चाहता हूं. बैठकर सोचूँगा कि क्या किया जा सकता है.

कैसे बढ़ेगा विश्व क्रिकेट?

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मुझे लगता है कि क्रिकेट के विकास के लिए ज़रूरी है कि छोटे देशों को बड़ा मंच दिया जाए. युवा खिलाड़ी इससे बहुत प्रभावित होते हैं कि उनकी टीम विश्व मंच पर कैसा प्रदर्शन कर रही है.

टूर्नामेंट में सिर्फ नई टीमों को भरने से काम नहीं चलेगा, लेकिन अफ़ग़ानिस्तान, आयरलैंड की टीमों को देखिए, उन्होंने विश्व कप में कितना शानदार प्रदर्शन किया.

महेला के साथ रिश्ता

हम दोनों के बीच बेहतरीन समझदारी थी. उसकी वजह ये थी कि एक तो हम दोनों की उम्र लगभग एक है. जब मैं टीम में आया तब वो उप कप्तान थे.

रिकॉर्ड के बारे में

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रिकॉर्ड के बारे में सुनना अच्छा लगता है. संतुष्टि मिलती है. आप उम्मीद करते हैं कि आपकी टीम का ही कोई खिलाड़ी आगे चलकर इन्हें तोड़े.

लेकिन इससे बड़ी बात है कि हमने कितना अच्छा समय ड्रेसिंग रूम में गुज़ारा, टीम के अच्छे और बुरे दौर को देखा.

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