डालमिया के बाद कौन बनेगा बीसीसीआई अध्यक्ष?

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जगमोहन डालमिया के निधन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की आंतरिक राजनीति में नया मोड़ आ गया है.

डालमिया का रविवार रात कोलकाता में निधन हो गया था.

बीसीसीआई के संविधान के अनुसार, अगर अध्यक्ष का पद कार्यकाल के बीच में ख़ाली हो जाए तो सचिव को 15 दिनों के अंदर स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग बुलाने का अधिकार है और उस बैठक में अध्यक्ष का चुनाव होता है.

श्रीनिवासन की डगर मुश्किल

नया अध्यक्ष उसी ज़ोन से नामांकित होता है, जिस ज़ोन के अध्यक्ष ने पद ख़ाली किया होता है और नया अध्यक्ष अगले चुनाव तक पद की ज़िम्मेदारी निभाता है.

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ऐसे में यह तय है कि जब तक जगमोहन डालमिया के उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए स्पेशल जनरल बॉडी मीटिंग नहीं बुला ली जाती है, तब तक बीसीसीआई की कमान सचिव अनुराग ठाकुर के हाथों में ही रहेगी.

मार्च में जब डालमिया बोर्ड अध्यक्ष बने थे तभी से ये अटकलें चल रहीं थीं कि उनके ख़राब स्वास्थ्य को बहाना बनाकर श्रीनिवासन कैंप उनकी जगह किसी और को अध्यक्ष बनाने की जुगत में लगा है.

दोनों कैंप (श्रीनिवासन और डालमिया) अभी अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे होंगे.

सबसे बड़ी अड़चन ये है कि नामांकन करने की बारी पूर्वी क्षेत्र की है. अभी तक की परिस्थितियों से ये लग रहा है कि पूर्वी क्षेत्र अभी तक एकजुट है और इस गुट की यही कोशिश होगी कि श्रीनिवासन या उनके किसी प्रतिनिधि का नामांकन नहीं हो सके.

गांगुली को कैब की कमान?

सुनने में तो ये भी आ रहा है कि पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बन सकते हैं, वो अभी वहाँ संयुक्त सचिव पद पर हैं.

गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हो सकते थे, लेकिन बोर्ड के संविधान के अनुसार बोर्ड अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए कम से कम दो साल तक राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि के तौर पर बोर्ड की बैठकों में शामिल होना अनिवार्य है.

डालमिया: योगदान और विवाद

डालमिया का ये संक्षिप्त कार्यकाल तो कुछ ख़ास नहीं रहा, लेकिन उनके पूर्व कार्यकाल उपलब्धियों से भरे रहे हैं.

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सबसे बड़ा काम उन्होंने बोर्ड के ख़ज़ाने को भरने का किया. पहले जहाँ बोर्ड मैच दिखाने के लिए दूरदर्शन को पैसे देता था, उस ढाँचे को उन्होंने तोड़ा.

इसके अलावा उन्होंने आईसीसी को लोकतांत्रिक बनाने में अहम भूमिका निभाई.

2001 की उस घटना को नहीं भूलना चाहिए, जिसमें दक्षिण अफ़्रीका में एक टेस्ट के दौरान सचिन तेंदुलकर पर बॉल टैंपरिंग का आरोप लगा, वीरेंद्र सहवाग पर एक मैच का बैन लगा था.

इसके बाद डालमिया ने कड़ा क़दम उठाते हुए आईसीसी को चेतावनी दी कि अगर सहवाग से बैन न हटाया गया तो भारतीय टीम दौरे में आगे नहीं खेलेगी.

आईसीसी को अपने घुटने टेकने पड़े और सहवाग पर लगा बैन वापस हुआ.

वोट बैंक की राजनीति

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डालमिया ने भारतीय क्रिकेट को दुनिया का सुपर पावर बनाया, लेकिन इसमें भी शक नहीं है कि उन्होंने बोर्ड में वोट बैंक की राजनीति का इस्तेमाल भी किया.

उन्होंने अपने कई समर्थकों को टीम का मैनेजर बनाया. ऐसे कई हथियारों का इस्तेमाल कर वे विपक्ष पर हावी रहे.

भारत के सुपर पावर बनने का सबसे ज़्यादा फ़ायदा एशिया को हुआ. उन्होंने वनडे क्रिकेट को बढ़ावा दिया.

विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफ़ी जैसे बड़े टूर्नामेंटों का एशिया में आयोजन कराया. यही नहीं, बांग्लादेश को उस वक़्त टेस्ट का दर्जा दिलाया, जब वो बहुत मज़बूत टीम नहीं हुआ करती थी.

(खेल पत्रकार आदेश कुमार गुप्त के साथ बातचीत पर आधारित)

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