विश्व मुक्केबाज़ी से मिलेगा रियो का टिकट

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दोहा में मंगलवार से विश्व एमेच्योर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप शुरू होने जा रही है.

यह अगले साल होने वाले रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाइंग चैंपियनशिप भी है.

भारत के लिए भी इसका विशेष महत्व है क्योंकि उसके 6 मुक्केबाज़ भी वहां अपना दमख़म दिखाएंगे.

इनमें एल देवेंद्रो सिंह 49 किलो, मदन लाल 52 किलो, शिव थापा 56 किलो, मनोज कुमार 64, विकास कृष्णन 75 और सतीश कुमार 91 किलो से अधिक भार वर्ग में हिस्सा लेंगे.

इस विश्व चैंपियनशिप के माध्यम से 10 विभिन्न भार वर्ग में रियो ओलंपिक के 23 कोटा स्थान तय होंगे.

जीते है कांस्य

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उल्लेखनीय है कि विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में आज तक भारत के केवल दो मुक्केबाज़ ही पदक जीत सके हैं.

विजेंदर सिंह ने साल 2009 में मिलान, इटली में कांस्य पदक जीता.

उनके बाद साल 2011 में विकास कृष्णन यादव ने अज़रबैजान में हुई विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था.

इस विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाज़ अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी संघ के झंडे तले उतरेंगे क्योंकि इन दिनों भारतीय मुक्केबाज़ी संघ निलंबित है.

ऐसी स्थिति को लेकर टीम के कोच गुरबक्श सिंह संधू कहते है कि यह भारत के लिए मुश्किल दौर है.

ऐसे में पहले से तय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने में मुश्किल होती है. कोच संधू को उम्मीद है कि भारतीय मुक्केबाज़ इसके बावजूद शानदार प्रदर्शन करेंगे.

बढ़ी मुश्किलें

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उल्लेखनीय है कि एशियन चैंपियनशिप में किए गए प्रदर्शन के आधार पर भारत के 6 मुक्केबाज़ो ने विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में जगह बनाई.

ऐसा पहली बार हुआ जब विश्व चैंपियनशिप के लिए भी मुक्केबाज़ों को क्वालिफाई करना पड़ा.

एशियन चैंपियनशिप के माध्यम से भारत के अलावा कज़ाखिस्तान के 9, उज़्बेकिस्तान के 8 मुक्केबाज़ों ने विश्व चैंपियनशिप के लिए जगह बनाई.

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