'मैच से पहले नर्वस था, अब हर दिन नया दिन'

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'मैं जब रिंग में उतरा तो तिरंगा मेरे साथ ही था, और आज भी तिरंगा मेरे दिल में बसता हैं.'

यह कहना हैं बीजिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज़ विजेन्दर सिंह का.

विजेंदर सिंह इन दिनों प्रोफेशनल मुक्केबाज़ी में अपना हाथ आजमा रहे हैं.

यही कारण है कि वह अब विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप, एशियाई खेल या फिर राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल का हिस्सा नहीं होंगे.

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पहले दोनों मुक़ाबले नॉकआउट रूप से जीतने वाले विजेंदर सिंह ने बीबीसी से कहा कि देखने में यह मुक़ाबले भले ही आसान लगे हों, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था.

ख़ासकर पहले मुक़ाबले के दौरान सोनी विटिंग के ख़िलाफ वह अपने आपको थोड़ा नर्वस महसूस कर रहे थे.

यह उनके लिए एक नया अनुभव था जिसके अनुरूप वह अपने आपको ढ़ाल रहे थे.

विजेंदर ने कहा, "लम्बे समय बाद मुक्केबाज़ी रिंग में उतर रहा था. पहले पेशेवर मुक़ाबले की शुरुआत ठीक से करना चाहता था, इसलिए मुश्किल भी लगा."

उन्होंने बताया कि इसके अलावा और भी बहुत कुछ नया था, जैसे प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रोफेशनल रिंग और प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग क्लब्स भी.

विजेंदर कहते हैं कि दूसरे मुक़ाबले तक पहुंचते-पहुंचते वह आत्मविश्वास हासिल कर चुके थे.

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विजेंदर ने कहा, "15-20 साल अमेच्योर मुक्क़ेबाज़ी करने के बाद ऐसा करना आसान नहीं होता. अब तो हर दिन नया दिन, नई रात है."

विजेन्दर सिंह ने साल 2008 में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक के अलावा साल 2009 में मिलान में आयोजित विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता था.

विजेन्दर सिंह ने साल 2010 में चीन के ग्वांगझू शहर में आयोजित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता.

इतना ही नहीं उन्होंने 2006 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक, साल 2010 में कांस्य पदक और साल 2014 में रजत पदक जीता.

पेशेवर मुक्केबाज़ी में उतरने के अपने फ़ैसले को लेकर विजेन्दर सिंह कहते है कि यह सही निर्णय था.

उन्होंने कहा, "एक बार निर्णय लेने के बाद पीछे हटने का सवाल ही नहीं था. अब भारत वापस आकर बेहद खुश हूं."

विजेंदर ने कहा कि दीवाली उनके लिए खुशियां लेकर आई है. उन्होंने कहा, "बहुत सी मिठाइयां खाईं और घर का खाना भी."

विजेंदर का अगला मुक़ाबला 19 दिसंबर को मैनचेस्टर में होगा.

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