डीडीसीए में 'सफाई' का सही समय

इमेज कॉपीरइट DDCA
Image caption दिल्ली का फ़िरोज शाह कोटला ग्राउंड.

दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन यानी डीडीसीए को लेकर आम आदमी पार्टी और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है.

आम आदमी पार्टी का कहना है कि वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली के डीडीसीए अध्यक्ष रहते आर्थिक अनियमितताएं हुई हैं.

लेकिन वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैगज़ीन का कहना है कि वित्तीय और दूसरी तरह की गड़बड़ियों के हालिया आरोप दरअसल काफ़ी पुराने हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये मामले मीडिया, क्रिकेट से जुड़े लोग, राजनेता और यहां तक कि आम जनता की नज़रों के सामने रहे हैं. इन पर बीच-बीच में थोड़ी बहुत चर्चा भी होती रही है.

इमेज कॉपीरइट BCCI

उनके मुताबिक़, रसूखदार लोगों के इसमें जुड़े होने की वजह से ये मामले दबा दिए जाते रहे हैं. अंतर सिर्फ़ इतना है कि ये मामले एक बार फिर सबके सामने हैं.

तमाम राजनीतिक दलों के राजनेता बीसीसीआई और इससे जुड़े दूसरे बोर्डों से जुड़े रहे हैं.

वो कहते हैं कि इसकी वजह यह है कि बोर्ड से जुड़े होने से इन नेताओं को लोगों से जुड़ने का मौका मिलता है, टेलीविज़न और दूसरे संचार माध्यमों पर उन्हें तरज़ीह मिलती है, उन्हें बोर्डों में मौजूदगी का सियासी फ़ायदा मिलता है.

शरद पवार महाराष्ट्र बोर्ड के सदस्य लंबे समय तक रहे. इसी तरह अरुण जेटली भी डीडीसीए में साल 1998 से 2013 तक रहे हैं.

प्रदीप मैगज़ीन का कहना है कि हाल फ़िलहाल डीडीसीए पर जिन गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं, वे जेटली के कार्यकाल में ही हुए हैं. वे इंकार करते हैं, इसलिए इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए.

इमेज कॉपीरइट PTI

कुछ दिनों पहले वीरेंद्र सहवाग ने बहुत दुखी होकर डीडीसीए के कामकाज पर सवालिया निशान लगाए थे.

उन्होंने बहुत ही भावुक हो कर कहा था कि ऐसा ही चलता रहा तो दिल्ली में क्रिकेट ख़त्म हो जाएगा.

प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "अभी भी समय है. डीडीसीए की तमाम गंदगी को साफ़ किया जा सकता है. लेकिन यह काम तुरंत शुरू कर देना होगा और गहराई में जाकर करना होगा."

(क्रिकेट विशेषज्ञ प्रदीप मैगजीन से बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह की बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार