सिरीज़ तो गई क्या साख भी बचेगी?

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अपनी ज़मीन पर लगातार 18 मैच जीतकर दबदबा साबित करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम से भारतीय क्रिकेट टीम बुधवार को कैनबरा में चौथे एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में साख बचाने के लिए भिड़ेगी.

पांच एकदिवसीय मैचों की इस सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया पहले ही 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुका है.

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पिछली तीन एकदिवसीय सिरीज़ गंवाई हैं.

पहले तो भारत बांग्लादेश से उसी की ज़मीन पर तीन मैचों की सिरीज़ 2-1 से हारा.

उसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने भारत को पांच मैचों की सिरीज़ में 3-2 से हराया.

इसके बावजूद मंगलवार को भारतीय टीम के तकनीकी निदेशक पूर्व कप्तान रवि शास्त्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम जिस अंदाज़ में खेल रही है, उसे देखकर जैसे परिणाम मिले है उसमें शर्म जैसी कोई बात नही है.

उन्हे भरोसा है कि इस सिरीज़ के बाद गेंदबाज़ सीखेंगे और भारत सही जगह होगा.

विदेशी पिचो पर भारत की इस तरह की हार और भारतीय गेंदबाज़ी पर उठते सवाल नए नहीं हैं.

हैरानी तो इस बात को लेकर है कि इशांत शर्मा, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, आर अश्विन और रविंद्र जडेजा कौन से नए गेंदबाज़ है.

आर अश्विन 102, रविंद्र जडेजा 124, इशांत शर्मा 78, भुवनेश्वर कुमार 56 और उमेश यादव 55 एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं.

भला कौन सी टीम के पास इतने अनुभवी गेंदबाज़ हैं.

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दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ जोएल पेरिस और स्कॉट बोलैंड ने तो अपना पहला एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच ही भारत के ख़िलाफ़ खेला.

पार्ट टाइम गेंदबाज़ केन रिचर्डसन ने 10, जॉन हेस्टिंग्स ने 15 और जेम्स फॉक्नर ने ज़रूर 47 मैच खेले हैं.

ग्लेन मैक्सवैल भी पार्ट टाइम गेंदबाज़ ही हैं और उन्होंने 58 मैच खेले हैं.

अब अगर ऐसे अनुभवहीन गेंदबाज़ ऑस्ट्रेलिया को जीत दिला सकते हैं तो इसकी वजह उनका कठिनाई से टीम में जगह बनाना है.

दूसरी तरफ भारत के मोहम्मद शमी तो एक भी मैच खेले बिना ही अनफिट हो गए.

यह वही गेंदबाज़ हैं जिनकी धज्जिया पहले तो बांग्लादेश के युवा खिलाड़ियों ने और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका के एबी डीविलियर्स, फॉफ डू प्लेसिस और क्विंटन डी कॉक और जेपी डूमिनी ने उडाई थीं.

रोहित शर्मा के दो शतक, विराट कोहली के एक शतक और दो अर्धशतक के अलावा अजिंक्य रहाणे और एक मैच में शिखर धवन ने शानदार बल्लेबाज़ी की है.

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इसके बावजूद मध्यमक्रम भारत की रन गति को कभी भी वैसी रफ्तार नही दे सका जैसी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ी ने टीम को दी.

ऑरोन फिंच, कप्तान स्टीव स्मिथ, ग्लेन मैक्सवैल, जॉर्ज बैली और जेम्स फॉक्नर ने तेज़ गति से रन ठोके.

ऐसे में धोनी का यह मानना कि 15-20 रन और बन जाते तो जीत जाते, सही नज़र नही आता.

वैसे धोनी को अगर अपने बल्लेबाज़ो पर इतना ही भरोसा था तो उन्होने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का साहस क्यों नही दिखाया, जैसा स्टीव स्मिथ ने तीसरे मैच में दिखाया था.

वैसे भारत पिछले दौरे पर भी विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया में कोई मैच नही जीता था.

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