ये हैं बीसीसीआई के पांच सरदर्द

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफ़ारिशें पूरी तरह लागू करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने ये भी कहा कि बोर्ड को इस संबंध कोई दिक्क़त है तो अदालत को बताए और 4 मार्च तक अपना जवाब दाख़िल करे.

जस्टिस लोढ़ा की सिफ़ारिशें यदि अमल में आई तो इन पाँच बदलावों से बोर्ड का चेहरा-मोहरा पूरी तरह से बदल जाएगा.

1- ज़ोनल सियासत ख़त्म होगी

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बीसीसीआई चुनाव फिर ज़ोनल आधार पर नहीं हो सकेंगे. यानी 2013 जैसी घटना फिर दोबारा नहीं हो पाएगी, जब बीसीसीआई अध्यक्ष बनने की बारी दक्षिणी ज़ोन की थी और एन श्रीनिवासन बिना किसी चुनाव के अध्यक्ष बन गए थे क्योंकि दक्षिणी ज़ोन की सभी छह इकाइयों ने श्रीनिवासन के प्रति आस्था जताई थी.

शायद यही वजह है कि लोढ़ा कमेटी ने चुनावों में पद का लालच देकर वोट हासिल करने की संभावना को न्यूनतम करने के लिए उपाध्यक्ष के मौजूदा पाँच पदों को घटाकर एक तक सीमित करने का सुझाव दिया है.

2- भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा

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लोढ़ा कमेटी ने कहा है कि सभी राज्य क्रिकेट संघों के बही खातों का ऑडिट किया जाना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.

भारतीय क्रिकेट में कई क्रिकेट संघों पर करोड़ों रुपए का घपला करने के आरोप लगते रहे हैं.

इनमें से कई की ख़र्च की गई करोड़ों-अरबों की राशि की कोई जवाबदेही नहीं है.

दिल्ली और गोवा क्रिकेट संघ इसके उदाहरण हैं जिन पर कुप्रबंधन और भारी आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं.

3- नामी क्रिकेट संघ ख़त्म होंगे

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‘एक राज्य-एक वोट’ की सिफ़ारिश यदि अमल में आई तो कई क्रिकेट संघों का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा. मसलन महाराष्ट्र में अभी तीन क्रिकेट संघ - मुंबई, महाराष्ट्र और विदर्भ हैं, यही हाल गुजरात का भी हैं, जहाँ तीन क्रिकेट संघ - गुजरात, बड़ौदा और सौराष्ट्र हैं.

साथ ही रेलवे, सेना जैसे सदस्यों को ग़ैर-मताधिकार सदस्य का दर्जा देने को कहा गया है.

यानी मौजूदा 30 सदस्यों की बजाय तब 21 सदस्य बीसीसीआई का अध्यक्ष चुनेंगे.

4- अनुराग ठाकुर का क्या होगा

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‘एक व्यक्ति, एक पद’ की सिफ़ारिश सुनने में और काग़जों में अच्छी लगती है. बहुत सी राजनीतिक पार्टियों ने भी इस सिद्धांत को अपनाया है.

अभी बीसीसीआई पर जिन लोगों का प्रभुत्व है, उनमें से कई उस पद पर इसीलिए हैं, क्योंकि अपने राज्य के क्रिकेट संघ पर उनका ख़ासा असर है.

जैसे अनुराग ठाकुर अभी बीसीसीआई के सचिव हैं और वो हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा सौरभ गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और साथ ही आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल में भी हैं.

5- पवार, श्रीनिवासन नहीं दिखेंगे

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लोढ़ा कमेटी ने ये भी सिफ़ारिश की है कि बीसीसीआई या राज्य संघों में कोई भी पदाधिकारी 70 साल से अधिक का नहीं होगा.

यानी मुंबई क्रिकेट संघ के अध्यक्ष शरद पवार (75+), तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन (71+), निरंजन शाह (71+) जैसे दिग्गजों का क्रिकेट की सियासत से नाता पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा.

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