तो टूट जाएगा सचिन का वनडे शतकों का रिकॉर्ड?

सचिन तेंदुलकर (फ़ाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट Associated Press Archive

एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इन दिनों जिस रफ़्तार से शतक बन रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड ज़्यादा लंबे समय तक नहीं टिकेगा.

सचिन तेंदुलकर ने चार साल पहले मार्च 2012 में जब अपना आख़िरी वनडे खेला था, तब उनके नाम 49 शतक थे और कई विशेषज्ञों से लेकर क्रिकेटप्रेमियों का मानना था कि इस रिकॉर्ड को तोड़ना लगभग नामुमकिन होगा.

सचिन ने 1989 से 2012 तक के अपने वनडे करियर में 463 मैचों की 452 पारियों में 44.83 की औसत से 18,426 रन बनाए.

लेकिन वनडे क्रिकेट में जिस तरह से शतक बन रहे हैं, उससे ये रिकॉर्ड दूर की कौड़ी तो बिल्कुल नहीं लगता.

दिलचस्प ये है कि इस साल यानी जनवरी से अब तक खेले गए 21 वनडे मुक़ाबलों में 21 शतक बने हैं, यानी औसतन हर मैच में एक शतक.

पिछले चार सालों में वनडे में शतक बनने की ये रफ़्तार सबसे तेज़ है. 2015 में जहाँ ये औसत 1.36 मैचों की थी, वहीं 2014 में 1.53 मैचों की और 2013 में ये 1.77 मैचों की हो गई.

आलम ये है कि तीन साल पहले वनडे में पदार्पण करने वाले दक्षिण अफ्रीका के क्विंटन डी कॉक 57 पारियों में ही 10 शतक जड़ चुके हैं, यानी तकरीबन हर छठे मैच में शतक.

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डी कॉक सबसे कम उम्र में 10 वनडे शतक बनाने वाले बल्लेबाज़ भी हैं. उन्होंने 23 साल 54 दिन की उम्र में ये उपलब्धि हासिल की है.

कमोबेश यही रफ़्तार उनके ही देश के हाशिम अमला की भी है जो 128 पारियों में 22 शतक लगा चुके हैं.

भारत के टेस्ट कप्तान विराट कोहली औसतन हर सातवें वनडे में शतक लगा रहे हैं. वो अब तक 163 पारियों में 25 शतक जड़ चुके हैं.

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इस साल भी कुल 21 शतकों में से डी कॉक, अमला, कोहली और अंग्रेज़ बल्लेबाज़ जो रूट ने दो-दो शतक लगाए हैं.

दरअसल, वनडे फॉर्मेट में बल्लेबाज़ों की मौज़ के तीन बड़े कारण नज़र आते हैं.

पहला नियम-क़ायदों में संशोधन कर उन्हें बल्लेबाज़ों के अनुकूल बनाना, दूसरा टी-20 क्रिकेट का ख़ूब खेला जाना और इसमें बल्ले की दबंगई और तीसरा तकरीबन सभी देशों में बल्लेबाज़ों के मुफ़ीद विकेट तैयार करना.

चार दशक पहले जितने वनडे मैच खेले जाते थे, उनकी तादाद अब बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है. ऐसे में खिलाड़ियों के पास तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ने के मौके भी बढ़ गए हैं.

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