टी20: भारत के दिग्गज नागपुर में दिखाएंगे करिश्मा?

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मंगलवार शाम जब नागपुर क्रिकेट स्टेडियम में भारत और न्यूज़ीलैंड की भिड़ंत होगी तब चर्चा कई दूसरी चीज़ों पर भी होगी.

2016 में टी20 विश्व कप की मेज़बानी करने वाले भारत का ये पहला मैच है और निश्चित तौर पर ज़्यादा दबाव टीम इंडिया पर ही रहेगा. इस सवाल के कई जवाब हैं कि दवाब धोनी के धुरंधरों पर ज़्यादा क्यों रहेगा? चंद दिन पहले भारत ने टी-20 एशिया कप जीता है.

इसी वर्ष जनवरी के अपने ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भारत ने तगड़ी ऑस्ट्रेलियाई टीम को टी-20 में उन्हीं के घरेलू मैदान में 3-0 से रौंदा था. भारत ही वो टीम थी जिसने महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में पहला टी-20 विश्व कप जीत कर तहलका मचा दिया था.

निश्चित तौर पर धोनी और युवराज सिंह जैसे दिग्गजों के लिए ये आखिरी वर्ल्ड टी-20 साबित हो सकता है और इन पर बेहतरीन प्रदर्शन का दबाव होगा.

धोनी टेस्ट क्रिकेट से तो संन्यास ले ही चुके हैं और अगला एकदिवसीय विश्व कप 2019 में होना है. तब धोनी 37 वर्ष के हो चुके होंगे. नागपुर में भारत ने धोनी के नेतृत्व में 2009 में एक ही इंटरनेशनल टी-20 खेला है, जिसमें श्रीलंका ने उन्हें धूल चटा दी थी.

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साथ ही इस विश्व कप में भारत की डगर आसान नहीं कही जा सकती क्योंकि सेमी फ़ाइनल तक पहुँचने के लिए इन्हें न्यूज़ीलैंड के अलावा पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों से जीतना होगा. बहरहाल, बात नागपुर के मैच और फ़ॉर्म की हो तो न्यूज़ीलैंड के मुकाबले भारत ज़्यादा मज़बूत दिखती है.

टी-20 दुनिया की शीर्ष टीम होने के अलावा भारत के पास रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना और खुद कप्तान धोनी जैसे मंझे हुए और फ़ॉर्म में चल रहे बल्लेबाज़ हैं.

भले ही भारत की तेज़ गेंदबाज़ी अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे आशीष नेहरा जैसे गेंदबाज से शुरू होती हो लेकिन मोहम्मद शमी की फ़िटनेस ने अगर उनका साथ दिया तो कुछ भी संभव है.

ज़ाहिर है, भारतीय पिचों पर आर आश्विन की ऑफ़ स्पिन पर कप्तान धोनी ही नहीं पूरी टीम को भरोसा है और वे कम रन देकर विकेट झटकने में माहिर हैं और हरभजन सिंह जैसे स्पिनर और मज़बूती देते हैं.

ख़ुद न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन ने कहा, "हम इस प्रतियोगिता में स्पिन के फैक्टर को बड़ा मान रहे हैं और हमें अपने गेम प्लान को इसी के हिसाब से बदलते रहना पड़ेगा. रहा सवाल भारत का, तो वे तो बेहद मज़बूत टीम है ही."

पिछले कुछ वर्षों में न्यूज़ीलैंड टीम अपने अनुभवी पूर्व कप्तान ब्रेंडन मैकुलम के बिना पहली किसी बड़ी प्रतियोगिता में भाग ले रही है लेकिन उसके पास एंडरसन, बोल्ट और गुप्टिल जैसे धुरंधर खिलाडी हैं जो मैच को कभी भी पलट सकते हैं.

सोमवार को नागपुर के स्टेडियम में अभ्यास करने से पहले विराट कोहली ने भी माना कि इस बड़ी प्रतियोगिता में एकाग्रता बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, "दूसरी टीमें क्या कर रही हैं और कैसे खेल रही हैं, उस पर ध्यान देने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी ये है कि हम अपने खेल और रणनीति पर ध्यान देते रहें. पिछले कई मैचों मैं हमने बेहतर प्रदर्शन किया है और इसे आगे भी जारी रखना है.”

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ज़ाहिर है, भारतीय टीम इस विश्व कप को जीतने की पूरी फ़िराक में रहेगी क्योंकि ये जीत कप्तान धोनी, युवराज और हरभजन जैसे बड़े क्रिकेटरों के करियर के अंतिम दिनों का बड़ा तोहफा साबित हो सकती है.

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