वो एक फ़ैसला जो टीम इंडिया को ले डूबा

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वर्ल्ड टी20 में नागपुर में घरेलू दर्शकों के सामने टीम इंडिया की शुरुआत बेहद ख़राब रही.

न्यूज़ीलैंड ने भारत को 47 रन से हराया. जिन बल्लेबाज़ों के दम पर टीम इंडिया को ख़िताब का मज़बूत दावेदार माना जा रहा था, वे पूरी तरह से नाकाम साबित हुए.

भारतीय बल्लेबाज़ों की नाकामी का आलम ये रहा है कि पूरी टीम महज 18.1 ओवर में ढेर हो गई. इतना ही नहीं शीर्ष पांच में से चार बल्लेबाज़ दहाई अंक भी नहीं पहुंच पाए.

कुल मिलाकर सात बल्लेबाज़ दहाई अंक में नहीं पहुंच सके. कप्तान धोनी ने ज़रूर 30 और कोहली ने 23 रन बनाए, लेकिन ये प्रयास टीम को जीत दिलाने में नाकाम रहा.

वैसे टीम इंडिया की ये गत न्यूज़ीलैंड के स्पिनरों ने बनाई, जबकि भारतीय बल्लेबाज़ दुनिया भर में स्पिन को खेलने में माहिर माने जाते हैं.

भारत को जीत के लिए 128 रन की चुनौती मिली थी. इसके सामने केन विलियम्सन ने ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ नैथन मैक्कलम से गेंदबाज़ी की शुरुआत कराई.

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पांचवीं गेंद पर मैक्कलम ने शिखर धवन को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद मैक्कलम ने युवराज को अपनी ही गेंद पर लपका. कुल 3 ओवरों में 15 रन देकर उन्होंने तीन विकेट चटकाए.

लेकिन मैच के हीरो साबित हुए मिचेल सैंटनर. बाएं हाथ के आर्थोडॉक्स स्पिनर सैंटनर का ये कुल मिलाकर महज छठा टी20 मैच था, लेकिन उन्होंने मैच के तीसरे और अपने पहले ही ओवर में रोहित शर्मा और सुरेश रैना को पवेलियन भेज दिया. एक ही ओवर में दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ उनके सामने पस्त हो गए.

इसके बाद उन्होंने हार्दिक पांड्या और उसके बाद भारतीय संघर्ष की इकलौती उम्मीद धोनी को भी पवेलियन भेज दिया.

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चार ओवरों में महज 11 रन देकर चार विकेट झटक कर भारत की हार पक्की कर दी.

इन दोनों के अलावा लेग ब्रेक गेंदबाज़ ईश सोढ़ी की घूमती गेंदों का जबाव भी भारतीय बल्लेबाज़ों के पास नहीं दिखा. सोढ़ी ने 4 ओवरों में 18 रन देकर तीन विकेट चटकाए. इसमें विराट कोहली का बेशकीमती विकेट शामिल था. इसके अलावा उन्होंने रवींद्र जडेजा और आर अश्विन को पवेलियन भेजा.

भारतीय पिचों पर तीन स्पिनरों के साथ खेलने का फ़ैसला आत्मघाती भी हो सकता था, लेकिन तारीफ़ करनी होगी न्यूज़ीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन की, जिन्होंने ना केवल अपने तीन स्पिनरों पर भरोसा जताया बल्कि उनका बेहतरीन इस्तेमाल भी किया.

पहले ओवर में मैक्लम ने विकेट झटक लिया था, लेकिन विलियम्सन ने उन्हें तीसरे ओवर में गेंद नहीं थमाई. सैंटनर को गेंद थमाई और उन्होंने दो विकेट चटका लिए.

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केन विलियम्सन ने मैच जीतने के बाद कहा कि उनके गेंदबाज़ों को दबाव बनाकर विकेट झटकना आता है.

वहीं भारतीय कप्तान धोनी ने माना कि ख़राब बल्लेबाज़ी के चलते टीम हारी. भारतीय टीम के लिए राहत के बात बस यही रही है कि गेंदबाज़ों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक ही दिखा.

इस जीत के साथ ही न्यूज़ीलैंड का भारत के ख़िलाफ़ टी20 मैच में जीत हासिल करने का सिलसिला बना हुआ है. वर्ल्ड टी20 में दूसरा और कुल मिलाकर न्यूज़ीलैंड ने भारत को पांच टी20 में हराया है.

वैसे भारतीय फ़ैंस को एक उम्मीद ज़रूर होगी कि 2007 में भी भारत न्यूज़ीलैंड के हाथों हार गया था और उसके धोनी की कप्तानी में भारत ने ख़िताब भी जीता था.

लेकिन खेल के मैदान में हर दिन चमत्कार नहीं होते. ये धोनी और टीम इंडिया के खिलाड़ी जरूर जानते होंगे.

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