कोहली को उड़ाने वाले न्यूज़ीलैंड के सोढी..

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नागपुर में भारत के लिए ये मैच खोने का दिन नहीं था और वह भी अपने ही घर में....सिर्फ़ 100 रनों की ही तो बात थी.

अकेले शिखर धवन ही इतने रन बना सकते थे. रोहित अपने दम पर इतने रन ठोक सकते थे. सुरेश रैना इस मैच को जीत की ओर बढ़ा सकते थे. युवराज सिंह इसका एक चौथाई रन सिर्फ़ एक ओवर में ले सकते थे.

तो क्या हुआ कि मैच भारत के हाथ से निकल गया. इसका कारण बने एक भारतीय मूल के न्यूज़ीलैंड के खिलाड़ी.

मगर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने विराट कोहली, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन आश्विन को एक के बाद एक ईश सोढी की चक्कर खाती गेंदों के आगे लुढ़कते देखा. सिर्फ़ 18 रन देकर उन्होंने तीन विकेट झटक लिए...

तो कौन हैं ये 23 साल के ईश सोढी जिनकी घूमती गेंदों का जवाब भारतीय बल्लेबाज़ों के पास नहीं था.

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लुधियाना में पैदा हुए लेग ब्रेक गेंदबाज़ ईश सोढी उर्फ़ इंदरबीर सिंह सोढी राइट आर्म लैग स्पिनर हैं.

उनके क्रिकेट करियर पर नज़र डालें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेग स्पिनर हैं. उनकी टीम न्यूज़ीलैंड के चयनकर्ताओं ने जब उनके आक्रामक तेवरों को देखा, तभी उन्हें पूरे सीज़न में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उतारा था. इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में उनकी शुरुआत हुई.

ईश सोढी की अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट में यात्रा तमाम मुश्किलों पर क़ाबू पाकर अपने जज़्बे को बरक़रार रखने की कहानी है.

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सोढी ने दक्षिणी ऑकलैंड में क्रिकेट खेलना शुरू किया जहां उनके माता-पिता उनके बचपन के दौरान प्रवास करके पहुँचे थे.

वहां का पापाटोटो हाईस्कूल उन्हें उनके क्रिकेट के लिए नहीं जानता था. नतीजा ये हुआ कि सोढी को स्थानीय टीमों में जगह बनाने में काफ़ी मुश्किलें पेश आईं.

उन्हें ऑकलैंड की पिचों के साथ दोस्ती करने में भी समस्या आ रही थी क्योंकि वो स्पिन बॉलरों के लिए बहुत मददगार नहीं थीं. वे उन टीम कप्तानों को भी अपनी प्रतिभा का कायल नहीं कर पाए थे, जो नहीं जानते थे कि सोढी का इस्तेमाल वो कैसे करें.

मगर सोढी को ख़ुद के हुनर पर न जाने क्यों यक़ीन था. उन्होंने जल्द ही स्कूल छोड़ा और दीपक पटेल और मैट हॉर्न के साथ ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी. और यही वो समय था जब उनके करियर को स्पिन मिलना शुरू हुआ.

साल 2012-13 के बेहद कामयाब सीज़न के बाद सोढी ने न्यूज़ीलैंड ए के साथ अपना महाद्वीपीय दौरा शुरू किया और यही वो दौरा था जिसने न्यूज़ीलैंड टीम में उनकी जगह पक्की कर दी.

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ईश सोढी ने अक्तूबर 2013 में बांग्लादेश दौरे पर बांग्लादेश के ख़िलाफ़ टेस्ट में अपनी पहचान बनाई और जुलाई 2014 में वह पहली बार टी-20 में वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध खेले. उसी साल नवंबर में वो पाकिस्तान टीम के ख़िलाफ़ तीन टेस्ट मैचों की सिरीज़ के लिए चुने गए.

पहले मैच में उन्होंने 63 रन ठोके जो उनका तब तक का बेहतरीन स्कोर था और न्यूज़ीलैंड क्रिकेट टीम के 10वें खिलाड़ी के लिए टेस्ट में सबसे अच्छा स्कोर था.

एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार वे पिछले साल अगस्त में ज़िंबाब्वे के ख़िलाफ़ मैदान में उतरे.

इसी साल फ़रवरी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हैमिल्टन में हुए एकदिवसीय मैच में उन्हें मिशेल सैंटनर को चोट लगने के बाद तीसरे स्थान पर उतारा गया.

उन्होंने मैदान पर आते ही स्टीव स्मिथ और ग्लेन मैक्सवेल के अहम विकेट झटक लिए. नतीजा ये हुआ कि उन्हें मैन ऑफ़ द मैच अवॉर्ड से नवाज़ा गया.

नागपुर मैच में तो उनका प्रदर्शन अब आपके सामने ही है.

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