वो ऐतिहासिक टेस्ट और लक्ष्मण का कमाल

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उस ऑस्ट्रेलियाई टीम को अगर अजेय कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. लगातार 16 टेस्ट जीतने के बाद वो कोलकाता पहुंचे थे.

एक हफ़्ते पहले ही उन्होंने मुंबई में भारतीय टीम को दस विकेट से हराया था. ईडेन गार्डेन में टॉस जीतने के बाद जब माइकल स्लेटर ने ज़हीर ख़ाँ की गेंद पर स्टांस लिया तो स्टेडियम में बैठे एक बंगाली दर्शक ने बंगाली में कहा, ‘एटाओ जाबे’.... यानि हम ये मैच भी हारेंगे.

स्लेटर, लैंगर और हेडन सबने रन बनाए और पहले दिन ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट पर 291 रनों का स्कोर खड़ा किया. लेकिन दिन रहा कमबैक कर रहे हरभजन सिंह के नाम, जिन्होंने लगातार तीन गेंदों पर पोन्टिंग, गिलक्रिस्ट और शेन वार्न को पैवेलियन भेज कर टेस्ट क्रिकेट में भारत की तरफ़ से पहली हैट्रिक ली.

उस मैच में अंपायरिंग कर रहे श्याम कुमार बंसल ने मैच को याद करते हुए बीबीसी के बताया, “हरभजन सिंह मेरे ही एंड से गेंद कर रहे थे. शुरू के एक दो ओवर वो बिल्कुल असर नहीं डाल पाए. रिकी पोन्टिंग और मैथ्यू हेडेन उनके ऊपर दो चार चौके लगा चुके थे. वो डिस्टर्ब दिखाई दे रहे थे लेकिन अचानक उन्होंने ऑफ़ स्टंप के बाहर एक गेंद की. पोन्टिंग चूक गए. गेंद उनके पैर पर लगी और उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट देने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं रहा. अगली गेंद पर गिलक्रिस्ट भी एलबीडब्ल्यू हो गए. उसके बाद शेन वार्न आए. उन्होंने सॉर्ट लेग की तरफ़ जहाँ एस रमेश खड़े हुए, गेंद खेली. मैं उस समय ब्लाइंड हो गया. मुझे नहीं पता चल पाया कि ये कोच सफ़ाई से लिया गया है या नहीं. मुझे उसे थर्ड अंपायर को रेफ़र करना पड़ा. थर्ड अंपायर ने सिग्नल दिया कि वार्न आउट हैं.’’

Image caption बीबीसी हिंदी के स्टूडियो में एसके बंसल के साथ रेहान फ़ज़ल.

दूसरे दिन स्टीव वॉ और जेसन गिलेस्पी स्कोर को 445 रनों तक ले गए. भारतीय टीम की मेग्रा, गिलेस्पी, कासप्रोविक्स और वार्न के आगे एक न चली और पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह ढहती चली गई.. ईडेन गार्डेन पर बैठे उसी दर्शक के मुंह से निकला, ‘एटाओ गैलो’ यानि ये मैच भी गया. थोड़ी बहुत इज़्ज़त बचाई वीवीएस लक्ष्मण की 59 रनों की पारी ने. 171 रनों पर भारत को आउट करने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फ़ॉलो ऑन किया और भारतीय टीम के मैनेजर चेतन चौहान के मन में एक नई रणनीति ने जन्म लिया.

चौहान याद करते हैं, “मुझे याद है, पहली पारी के बाद में लक्ष्मण के पास गया और पूछा आपने कभी तीन नंबर पर बैटिंग की है? उन्होंने कहा मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी तीन नंबर पर ही बैटिंग की है. फिर मैंने जॉन राइट से कहा लक्ष्मण बहुत अच्छी फ़ॉर्म में हैं. आप इन्हें दूसरी पारी में प्रमोट क्यों नहीं कर देते. सवाल उठा कि तीन नंबर पर बैटिंग कर रहे राहुल द्रविड़ को इस फ़ैसले के बारे में कौन बताएगा. फिर ये ज़िम्मेदारी मुझे ही दी गई. मैंने राहुल से कहा कि हम बैटिंग आर्डर में थोड़ा चेंज करना चाहते हैं. आपको कोई आपत्ति है अगर हम आपको नीचे भेजें? राहुल शालीनता की मूर्ति थे. उन्होंने कहा आप टीम हित में जो करना चाहें करें. इस तरह वीवीएस लक्ष्मण तीन नंबर पर बैटिंग करने गए.”

बाद में भारतीय टीम के कोच जॉन राइट ने अपनी किताब इंडियन समर्स में लिखा, “मुझे याद है इयान चैपल तर्क दिया करते थे कि आपका नंबर तीन स्ट्रोक प्लेयर होना चाहिए जो विपक्ष के ख़ेमें में घुस कर हमला करे और किसी भी ख़राब गेंद को बख़्शे नहीं. राहुल द्रविड़ हमारे नियमित वन डाउन बल्लेबाज़ थे लेकिन वो धीमा खेलते थे. इसलिए जब लक्ष्मण 59 रनों पर आउट हो कर लौटे और हमें फ़ॉलो ऑन मिला, मैंने लक्ष्मण से कहा, लैक्स, अपने पैड मत उतारो. तुम इस पारी में नंबर तीन पर जाओगे.”

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शुक्र ये रहा कि शिवसुंदर दास और रमेश ने पहले विकेट के लिए 52 रन जोड़े और लक्ष्मण को थोड़ा आराम करने का मौक़ा मिल गया. रमेश के आउट होने के बाद लक्ष्मण क्रीज़ पर उतरे और पहली गेंद से ही उन्होंने गेंद को बल्ले के बीचोंबीच लेना शुरू किया. दास और तेंदुलकर उनका ज़्यादा साथ नहीं दे पाए.

गांगुली थोड़ा जमे लेकिन 48 के अपने व्यक्तिगत स्कोर पर वो भी पैवेलियन लौट गए. नंबर छह पर द्रविड़ उतरे और क्रीज़ पर आते ही पोन्टिंग ने उन्हें स्लेज किया, “नंबर तीन से नंबर छह और नंबर छह से टीम से बाहर!” द्रविड़ पर इसका कोई असर नहीं हुआ. उन्होंने एक छोर संभाल लिया. तब तक लक्ष्मण अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने लगे थे. उन्होंने पहले शतक पूरा किया, फिर दोहरा शतक और फिर उन्होंने गावस्कर का 236 रनों का सर्वश्रेष्ठ भारतीय पारी का पंद्रह साल पुराना रिकार्ड तोड़ा. चौथे दिन लक्ष्मण और द्रविड़ पूरे दिन खेलते रहे. इस बीच द्रविड़ ने भी अपना शतक पूरा किया.

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दिन समाप्त होते होते द्रविड़ की पिंडली में क्रैंप्स होने लगे थे. उनसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. भारतीय टीम के फ़िज़ियो एंड्रू लीपस ने बाद में लिखा, “मुझे याद है जैसे ही द्रविड़ को क्रैंप्स शुरू हुए, जान राइट मुझ पर चिल्लाए, द्रविड़ को ठीक करो. हमारे लिए बहुत ज़रूरी था कि द्रविड़ पिच पर बनें रहे और रिटायर्ड हर्ट न हों. क्रैंप्स का तुरंत कोई इलाज नहीं होता. सिर्फ़ मनोवैज्ञानिक इलाज ही किया जा सकता है. मैंने मैदान पर ही द्रविड़ को लाल रंग की विटामिन बी की गोलियाँ दीं और कहा इनसे तुम्हारा दर्द जाता रहेगा. राहुल ने मुझपर विश्वास किया और मैदान पर इस उम्मीद से डटे रहे कि गोली अपना रंग दिखाएगी. मैं नहीं कह रहा कि सिर्फ़ मेरे झूठ ने असर दिखाया. राहुल के जीवट ने भी उन्हें वहाँ डटे रहने की क्षमता दी.”

चौथे दिन का खेल ख़त्म होने पर जब दोनों बल्लेबाज़ पैवेलियन लौटे तो वो बहुत मुश्किल से चल पा रहे थे. जॉन राइट ने अपनी किताब, इंडियन समर्स में लिखा, “द्रविड़ डिहाइड्रेशन के शिकार थे. उस ज़माने में गर्दन को ठंडा रखने वाले रुमालों का चलन नहीं हुआ था. इसलिए हम तौलिए को काट कर उसके छोटे छोटे टुकड़े करते थे और उन्हें बर्फ़ में डुबो कर गर्दन पर लगाने के लिए भेज देते थे. जब दिन का खेल ख़त्म होने के बाद ये दोनों पैवेलियन लौटे तो आधा दर्जन डॉक्टर उन पर काम करने के लिए उनका इंतज़ार कर रहे थे. लक्ष्मण को तुरंत खाने की मेज़ पर लिटाया गया और द्रविड़ को फ़िज़ियो की मेज़ पर और दोनों को तुरंत ड्रिप चढ़ाई गई.”

पांचवे दिन लक्ष्मण 281 और द्रविड़ 181 रनों पर आउट हुए. भारत ने पारी समाप्ति की घोषणा की और ऑस्ट्रेलिया को 75 ओवरों में 384 रन बनाने की चुनौती दी. चाय तक ऑस्ट्रेलिया ने 3 विकेट पर 161 रन बना भी लिए थे और मैच ड्रा की तरफ़ जा रहा था. तभी तेंदुल्कर ने अपना कमाल दिखाया.

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अंपायर बंसल याद करते हैं, “मुझे तेंदुलकर के बहुत सारे मैच कराने का मौका मिला है. उनकी ख़ूबसूरती है कि वो लेग ब्रेक के साथ ऑफ़ ब्रेक भी करा लेते हैं और नियंत्रण के साथ डालते हैं. जब ऑस्ट्रेलिया के राइट हैंड बल्लेबाज़ आए तो उन्होंने ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ी की और जब उनके लेफ़्ट हैंड बल्लेबाज़ आए तो उन्होंने लेग ब्रेक गेंदबाज़ी की. कहने का मतलब ये कि उन्होंने दोनों छोर से इस तरह की गेंदबाज़ी की कि अगर वो मिस हो जाए और टाँगों पर लगे तो एलबीडब्ल्यू देने के अलावा कोई गुंजाइश ही न रहे. शेन वार्न ने उनकी गेंद छोड़ दी थी, ये समझ कर कि वो लेग ब्रेक है, बाहर जाएगी. गेंद अंदर आई और वो एलबीडब्ल्यू हो गए.”

मैच भारत की गिरफ़्त में तब आया जब हरभजन ने एक बार फिर पोन्टिंग को सिफ़र पर दास के हाथों कैच कराया. अंतिम सत्र में ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट गिरे और जब हरभजन ने मैक्ग्रा को एलबीडब्ल्यू आउट किया और भारत ने असंभव को संभव कर दिखाया. उस भारतीय टीम के विकेटकीपर नयन मोंगिया ने बीबीसी को बताया, “ये सच है कि पूरे चौथे और पांचवे दिन हम सब लोग ड्रेंसिंग रूम में उसी कुर्सी पर बैठे रहे या खड़े रहे तो अपनी जगह से हिले नहीं. जैसे जैसे लक्ष्मण और द्रविड़ रन बटोरते गए बयान नहीं किया जा सकता कि हम लोग कितने उत्तेजित और ख़ुश हो रहे थे.”

ये संभवत: टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा टेस्ट मैच था जब किसी टीम ने फ़ालो ऑन होने के बाद दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम को हराया था. ईडन गार्डेन के दर्शक तो हतप्रभ थे ही, टेलीविज़न पर मैच देख रहे करोड़ों लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए थे. ये भारतीय क्रिकेट का स्वर्णिम क्षण था.

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जॉन राइट ने अपनी किताब में लिखा, “मैंने क़रीब 80 टेस्ट खेले हैं और इतने ही क़रीब देखे भी हैं लेकिन इस टेस्ट का कोई मुक़ाबला नहीं था. उस दिन भारतीय ड्रेसिंग रूम का हिस्सा होना मेरे लिए एक सम्मान की बात थी.”

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