क्रिकेट पिच को क्यों पिलाते हैं आरओ पानी

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डीडीसीए ने कहा है कि फ़िरोज़शाह कोटला मैदान की पिच के लिए आरओ का पानी इस्तेमाल किया जाता है.

इससे पहले, महाराष्ट्र में भीषण सूखे के कारण अदालत ने आईपीएल के 13 मैचों को राज्य से बाहर कर दिया गया है.

पूर्व क्रिकेटर और डीडीसीए उपाध्यक्ष चेतन चौहान ने बताया कि पिच के लिए आरओ का पानी पिछले दो-तीन साल से इस्तेमाल हो रहा है.

चेतन चौहान ने कहा, ''दिल्ली का ग्राउंड वॉटर बेहद खारा है, जिससे पिच की घास मर जाती है. सिर्फ़ पिच के लिए हम आरओ का पानी इस्तेमाल करते हैं...हमने आरओ प्लांट लगा दिया है. वह ज़मीन के खारे पानी को ठीक करता है और केवल पिच के लिए हम इस्तेमाल करते हैं.''

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शुक्रवार को फ़िरोज़शाह कोटला में दिल्ली डेयरडेविल्स और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच आईपीएल मैच होगा. यानी इस मैच से पहले भी पिच पर आरओ का पानी डाला जाएगा.

क्रिकेट की दुनिया से जुड़े लोगों के लिए पिच के लिए विशेष या आरओ पानी का इस्तेमाल शायद आम बात हो. मगर जो लोग क्रिकेट की बारीकियों से वाकिफ़ नहीं, उन्हें ताज्जुब होगा, ख़ासकर जिस तरह की रिपोर्ट और तस्वीरें सूखाग्रस्त क्षेत्रों से आ रही हैं.

रिपोर्टों के अनुसार जाने-माने पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने डीडीसीए के आरओ का पानी इस्तेमाल करने पर नाराज़गी जताई है.

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पानी को आरओ मशीन और प्लांट से साफ़ करने की प्रक्रिया के दौरान भी पानी बर्बाद होता है. दिल्ली में गिरता जलस्तर पर्यावरणविदों की चिंताओं का कारण रहा है.

ऐसे में डीडीसीए का यह कहना कि क्रिकेट पिच के रखरखाव के लिए ज़मीन के पानी को आरओ प्लांट के सहारे साफ़ करके फिर उसे क्रिकेट पिच पर इस्तेमाल किया जाता है, विवाद का रूप ले सकता है.

चेतन चौहान ने बताया कि दो-तीन साल पहले ज़मीनी पानी की जांच करवाई गई थी और नतीजों में पता चला कि पानी बेहद खारा है. उसमें बहुत नमक है, जिसके बाद आरओ प्लांट लगाया गया.

चेतन चौहान को भरोसा है कि इससे महाराष्ट्र में आईपीएल मैचों की तर्ज पर कोई विवाद नहीं होगा.

वह कहते हैं, ''घर में सभी जगह आरओ का पानी इस्तेमाल होता है. हम पानी को बर्बाद नहीं करते. हम हाथ से पानी डालते हैं.'' अभी यह साफ़ नहीं कि इस आरओ प्लांट से कितना पानी साफ़ किया जाता है.

पूर्व क्रिकेटर और पिच क्यूरेटर वेंकट सुंदरम के अनुसार पिच के लिए साफ़ पानी ज़रूरी है और सोडियम, पोटेशियम आदि के दूषित पानी से पिच को नुक़सान पहुँचता है.

वह कहते हैं, ''दूषित पानी पिच के लिए ज़हर जैसा है. पिचों पर रसायन मिला पानी डालने से पिच और घास को नुक़सान पहुँचता है.''

उधर, समाचार पत्र डीएनए से बातचीत में पूर्व क्रिकेटर सुरिंदर खन्ना और डीडीसीए कोषाध्यक्ष गोपीमनचंदा ने सूखे के हालात देखते हुए पानी के बेहतर इस्तेमाल की बात की है.

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