'इवन-ऑड में फंसे' सलमान लगाएंगे धक्का

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जाने-माने अभिनेता सलमान ख़ान को भारतीय ओलंपिक संघ ने रियो ओलंपिक 2016 के लिए भारत का गुडविल एम्बैसडर चुन लिया, इसकी पूरी तौर पर घोषणा होनी थी, लेकिन कार्यक्रम के दौरान ख़ूब बदइंतज़ामी दिखी.

कार्यक्रम के समय भारतीय ओलंपिक भवन में भारतीय पुरूष हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह, महिला हॉकी टीम की कप्तान रितू रानी, महिला निशानेबाज़ अपूर्वी चंदेला, महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी मोनिका बत्रा और लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता एम सी मैरीकोम भी मौजूद थीं.

खेल के इन असली सितारों के बीच पूरे कार्यक्रम में बॉलीवुड सितारे सलमान ख़ान ही छाए रहे.

जब खिलाड़ियों की बारी आई तो ऐसी अफ़रातफ़री मची कि उन्होंने वहां से चुपके से खिसकना ही बेहतर समझा.

अंत में खेल पत्रकारों को हाथ मलते हुए लौटना पड़ा.

वैसे कार्यक्रम शुरू होने का समय ढाई बजे का दिया गया था लेकिन सलमान ख़ान और भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारी लगभग दो घंटे देर से पहुंचे.

तब तक खेल पत्रकारों को झुंझलाहट होने लगी थी.

भारतीय ओलंपिक भवन का सबसे निचले तल का कमरा पूरी तरह से टीवी और दूसरे मीडिया से जुड़े पत्रकारों से भरा हुआ था.

ख़ैर जैसे ही सलमान खान की एंट्री हुई, सभी ने पहले तो तालियां बजाई और उसके बाद दनादन सवाल उनके देर से पहुंचने पर शुरू हुआ.

सलमान ख़ान ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि 'ऑड-इवन' में फंस गया था.

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उसके बाद उन्होंने ईमानदारी से माना कि बचपन में उन्होंने तैराकी और साइक्लिंग की लेकिन उन्हें जल्दी ही समझ आ गया कि इसमें बस वह ठीक-ठाक ही है यानी 'जैक ऑफ आल मास्टर ऑफ नन'.

उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार पाकर वह यहां तक भी पहुंच गए हैं लेकिन ओलंपिक खेलों को जितने दर्शक मिलने चाहिए उतने नहीं मिलते.

"क्रिकेट अधिक खेला जाता है इसलिए उसे अधिक दर्शक मिलते है जो बुरा नहीं है. अब अगर एक छतरी के नीचे यानी ओलंपिक में सारे खेल देखने को मिलेंगे तो दर्शक भी अधिक मिलेंगे."

जब सलमान ख़ान से सवाल किया गया कि क्या आप अभी ही जुड़े रहेंगे या बाद में भी तो सलमान ने एक बार फिर चुटकी लेते हुए कहा कि 'मैं तो बाद में भी जुड़ना चाहूंगा लेकिन यह इन दो सज्जनों पर निर्भर है.'

उसके बाद उनकी हंसी छूट गई. उनका साफ तौर पर इशारा भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एन रामचंद्रन और महासचिव राजीव मेहता की तरफ़ था.

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सलमान ख़ान ने बातों-ही बातों में एक बड़ी बात कह दी.

उन्होंने कहा कि जब मेरे जैसा कोई आदमी इस फील्ड में आता है तो एक ही बात दिमाग़ में आती है कि 'हम दाल, चावल और रोटी य फिर एक दो समय की ख़ुराक़ पर बहुत अच्छा कर रहे है.'

उन्होंने कहा, "जिस दिन हमारी बुनियादी सुविधांए बढ़ जाएंगी, अच्छे उपकरण होंगे, कोच होंगे, जो ग़रीब घरों से आते है उन्हे सपोर्ट मिलेगा तभी हमें अधिक पदक मिलेंगे."

इसके बाद सलमान ख़ान ने दिखाया कि वह इस समारोह में पूरी तैयारी के साथ आए हैं.

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उन्होंने जिमनास्टर दीपा करमाकर की बात चलने पर कहा कि उन्होंने उनकी ट्रेनिंग की क्लिप देखी है.

"वह जिस त्रिपुरा से आती है वहां तो कुछ सुविधाए है ही नहीं. उन्होंने अपने हौसलों के दम पर सब कुछ हासिल किया है."

ख़ुद को गुडविल एम्बैसडर बनने पर उन्होंने कहा, "मैं तो बस पीछे से धक्का दे सकता हूं. एक आदमी होता है जिसकी ज़रूरत होती है कि वह हमें सहारा दे सके."

"अब कामयाबी मिलेगी या नहीं ऊपर वाला जाने. मैं तो जैसे एक धक्का मारो, धीरे-धीरे पदक पाने के लिए बस वही."

इसके बाद सलमान ख़ान चले गए और उनके साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारी भी.

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छोटे से स्टेज पर तमाम पत्रकार कभी मैरीकोम तो कभी अपूर्वी चंदेला की तरफ़ भागने लगे.

सरदार सिंह तो दरवाज़े के पीछे गैलरी में खड़े नज़र आए.

मैं भी मोनिका बत्रा से बातचीत करके जैसे-तैसे स्टेज पर पड़ी कुर्सियों के बीच अपूर्वी चंदेला के पास पहुंचा.

अभी सबसे बातचीत शुरू ही हुई थी कि भीड़भाड़ में ज़ोर-ज़ोर से महिला पत्रकारों की आवाज़े गूंजने लगीं, ऐसे तो इंटरव्यू नहीं हो सकता.

मौक़ा पाते ही खिलाड़ी खिसक लिए.

मैरी कोम के पीछे पत्रकार भागे तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया. हालांकि वह पहले सबसे बात कर चुकी थी.

वह तो क़िस्मत अच्छी थी कि बाहर सड़क पर महिला हॉकी टीम की कप्तान रितू रानी से बातचीत हो गई.

वापस लौटते समय मन में एक ही बात आ रही थी कि जो ओलंपिक संघ अपने खिलाड़ियों से बातचीत भी ढंग से ना करा सके उस संघ से क्या उम्मीद की जाए.

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