'.. बुरा न मानूंगा कि आपने मुझे सुंदर नहीं कहा'

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मोहम्मद अली की 74 साल में मौत हो गई है.

उनके परिवार के प्रवक्ता के मुताबिक़ पूर्व हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन और विश्व के जाने-माने खिलाड़ियों में से एक अली की अमरीका के राज्य एरिज़ोना के शहर फीनिक्स में मौत हुई.

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उन्हें गुरुवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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वह सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और 1984 से उन्हें पारकिंसन की बीमारी थी, इस वजह से उनकी स्थिति और अधिक खऱाब हो गई थी.

उनके परिवार ने एक बयान में बताया कि उनका अंतिम संस्कार अली के गृहराज्य केंटकी के लुइविल में किया जाएगा.

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कैसियस मार्सेलस क्ले जूनियर का जन्म 17 जनवरी 1942 को केंटकी में हुआ था.

साल 1960 में रोम ओलंपिक में लाइट हेवीवेट में गोल्ड मेडल जीतने से वह मशहूर हुए थे. 1964 में उन्होंने अपना नाम बदल कर मोहम्मद अली कर लिया था.

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निकनेम "दि ग्रैटेस्टट" से मशहूर अमरीकी अली ने 1964 में सोनी लिस्टॉन को हराकर अपना पहला विश्व ख़िताब जीता था और तीन अलग अवसरों पर विश्व हैवीवेट का टाइटल जीतने वाले पहले बॉक्सर बने थे.

वो कुल 61 मुकाबलों में से शामिल हुए और उनमें से 56 में जीत हासिल की थी. 1981 में उन्होंने बॉक्सिंग से संन्यास ले लिया.

खेल मैगज़ीन से वह "शताब्दी के खिलाड़ी" और बीबीसी से "शताब्दी की खेल शख्सियत" ख़िताब से नवाजे गए. अली अपनी बॉक्सिंग के पहले और बाद में भी किसी खेल के मुक़ाबलों को पहले से ही बात देने के लिए वैसे ही जाने जाते थे जैसे बॉक्सिंग की रिंग के अंदर अपनी कुशलता के लिए.

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वह नागरिक अधिकारों की वकालत करने वाले और खेल, जाति और राष्ट्रयीता के सीमाओं से परे एक श्रेष्ठ कवि थे.

जब पूछा गया कि वह ख़ुद को कैसे याद किया जाना पसंद करेंगे. उन्होंने एक बार कहा था: एक ऐसे इंसान की तरह जिसने कभी अपने लोगों का सौदा नहीं किया. लेकिन अगर वो बहुत ज़्यादा है तो आप कह सकते हैं कि मैं महज़ एक अच्छा बॉक्सर था. और तब मैं इस बात का भी बुरा नहीं मानूंगा कि आपने मुझे सुंदर नहीं कहा."

अली ने रोम ओलंपिक के तुरंत बाद बॉक्सिंग को पेशेगत तौर पर अपना लिया था.

22 साल की उम्र में हैवी वेट टाइटल जीतकर क्ले ने बॉक्सिंग की दुनिया को चकित कर दिया था.

उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि वह लिस्टॉन को हरा देंगे जो कभी हारा नहीं था. लेकिन कुछ ही लोगों को विश्वास था कि वह ऐसा कर सकते थे.

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लिस्टॉन के साथ अपने पहले मुक़ाबले के दौरान ही उनका झुकाव इस्लाम की तरफ़ हो गया था.

उन्होंने इस्लाम क़बूल करने के बाद अपना नाम बदलकर अली कर लिया.

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साल 1967 में अली ने वियतनाम में अमरीकी युद्ध का विरोध करने का निर्णय लिया. इसके लिए उन्हें अपने साथी अमरीकियों की आलोचना भी झेलनी पड़ी.

उन्होंने अमरीकी सेना में शामिल होने से मना कर दिया था. इस वजह से उनका विश्व खिताब और बॉक्सिंग का लाइसेंस छिन गया था. लगभग चार सालों तक वह बॉक्सिंग के मुकाबलों नहीं खेल पाए थे.

साल 1971 में अली बॉक्सिंग रिंग में वापस लौटे बॉक्सिंग के इतिहास के सबसे यादगार मुक़ाबले खेले और जनता में उनका सम्मान वापस लौटा.

न्यूयार्क में आठ मार्च 1971 "शताब्दी के मुक़ाबले" में जो फ्रेज़र से उन्हें पहली बार पेशेगत हार का सामना करना पड़ा. अपने ख़िताब को वापस प्राप्त करने के लिए 30 अक्टूबर 1974 को उन्होंने रंबल इन दि जंगल में जार्ड फोरमैन को आठवें राउंड में हराया.

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अटलांटा में हुए 1996 के ओलंपिक खेलों में उन्होंने ओलंपिक मशाल जलाई और लंदन में हुए 2012 खेलों के उद्घाटन समारोह में ओलंपिक झंडे को फहराया.

पूर्व हैवीवेट विश्व चैंपियन इससे पहले पेशाब की नली में संक्रमण की शिकायत की वजह से दिसंबर 2014 में अस्पताल में भर्ती हुए थे.

अली तीन बार विश्व चैंपियन रहे. पहली बार उन्होंने 1964 में फिर 1974 में और फिर 1978 में विश्व चैंपियनशिप का ख़िताब जीता था.

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