दीपा का प्रोडूनोवा आखिर क्या है

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रियो ओलंपिक में भारतीयों के जेहन मे दो नाम घर कर गए हैं.

दीपा कर्मकार और प्रोडूनोवा. ये दोनों नाम एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं लेकिन कम लोग जानते हैं कि जिमनास्ट दीपा कर्मकार का सबसे खतरनाक वॉल्ट प्रोडूनोवा आखिर है क्या.

यूं तो दीपा एक जिमनास्ट के तौर पर ओलंपिक के फाइनल में पहुंच कर ही इतिहास बना चुकी है लेकिन उनका प्रोडूनोवा वॉल्ट करना जानकारों को हतप्रभ कर रहा है.

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इसके पीछे कई वजहें हैं. एक तो ये ही कि अभी तक के जिमनास्टिक्स इतिहास में सिर्फ पांच महिलाएं ही सही तरीके से प्रोडूनोवा वॉल्ट कर सकी हैं.

ऐसा करने वाली दीपा तीसरी महिला थीं और 2014 में उन्होंने इसी वॉल्ट के ज़रिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक भी जीता था.

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प्रोडूनोवा का इतिहास

प्रोडूनोवा वॉल्ट का तकनीकी या असली नाम है Handspring front double somersault. यानी कि हाथों से उछल कर हवा में दो गुलाटी मारना.

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1998-99 में रूस की एलिना प्रोडूनोवा ने सबसे पहले ये वॉल्ट परफेक्ट किया था जिसके बाद से इसका नाम प्रोडूनोवा वॉल्ट पड़ गया.

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जिमनास्टिक्स में कई वॉल्ट उसे परफेक्ट तौर पर करने वालों के नाम पर रखे गए हैं.

मसलन चेंग, अमानार, मुस्तफीना आदि आदि

जिमनास्टिक्स में प्रोडूनोवा सबसे खतरनाक वॉल्ट माना जाता है और इस समय दुनिया की सबसे अच्छी जिमनास्ट मानी जाने वाली अमरीका की सिमोन बाइल्स भी ओलंपिक में ये वॉल्ट नहीं कर रही हैं.

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लेकिन फिर आप सोच रहे होंगे कि दीपा कर्मकार क्यों ये खतरनाक वॉल्ट करती हैं.

जिमनास्टिक 2013-2016 के नियमों के अनुसार प्रोडूनोवा वॉल्ट को सबसे कठिन वॉल्ट माना गया है और इसे परफेक्ट करने के लिए अंक अधिक मिलते हैं.

नियमों के अनुसार हर वॉल्ट के दो तरह के अंक होते हैं. एक्जिक्यूशन प्वाइंट और डिफिकल्टी प्वाइंट. प्रोडूनोवा में डिफिकल्टी प्वाइंट बहुत अधिक हैं और अगर खिलाड़ी परफेक्ट लैंडिंग नहीं भी करता तो भी उसे अच्छे अंक मिल जाते हैं.

हालांकि अगर इस वॉल्ट के दौरान आप लैंडिंग गलत करते हैं तो आपकी गर्दन टूटने की आशंका सबसे अधिक होती है.

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1998 में एलिना के बाद दो और खिलाड़ियों ने इस वॉल्ट को किया था लेकिन लैंडिंग परफेक्ट नहीं थी. इसके बाद 2014 में जब दीपा ने ये वॉल्ट किया तो वो लगभग परफेक्ट थी और ये करने वाली वो तीसरी महिला थीं.

इसके बाद दो और एथलीटों ने प्रोडूनोवा वॉल्ट किया है.

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14 अगस्त को होने वाले फाइनल में हर एथलीट को दो वॉल्ट करने होते हैं. इवेंट में चुनने के लिए कई रूटीन होते हैं जिसमें हर एथलीट को दो रूटीन चुनने होते हैं.

दीपा अपने फाइनल में प्रोडूनोवा और मुस्तफीना करेंगी जबकि गोल्ड मेडल की प्रबल दावेदार मानी जा रही सिमोन बाइल्स, चेंग वॉल्ट और अमानार वॉल्ट परफॉर्म करेंगी.

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अगर दीपा प्रोडूनोवा कर के स्वर्ण पदक हासिल करती हैं तो ओलंपिक में ये संभवत पहली बार होगा क्योंकि एलिना प्रोडूनोवा को भी ओलंपिक में कभी गोल्ड मेडल नहीं मिला था.

प्रोडूनोवा के खतरों को लेकर जिमनास्टिक की दुनिया में बहस अभी भी जारी है लेकिन इस बहस के बीच दीपा कर्मकार खतरनाक प्रोडूनोवा वॉल्ट को अपने निरंतर अभ्यास के ज़रिए आसान बनाती चली जा रही हैं.

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