आपका ऑफ़लाइन होना इतनी बड़ी बात क्यों है?

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आज पूरी दुनिया ऑनलाइन है. ऐसे में अगर, किसी के ट्वीट पर कुछ घंटों तक जवाब न मिले. किसी के फ़ेसबुक स्टेटस अपडेट को कुछ घंटों तक कोई लाइक न करे, तो दिल की धड़कन बढ़ जाती है.

ऐसे में लोगों के मन में तरह-तरह के ख़याल आने लगते हैं और लगता है कि जैसे पूरी दुनिया आपकी अनदेखी कर रही है.

अमरीका में एक कंपनी है 'यू टर्न' ये ऑनलाइन कंपनी छात्रों को इंटर्नशिप के मौक़े मुहैया कराने में मदद करती है. एक बार किसी ने रात सवा नौ बजे ट्वीट करके मदद मांगी.

जब घंटों तक कंपनी की तरफ़ से किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो इसके सीईओ मार्क बैबिट ने अपने कर्मचारियों को चेतावनी भरा मेल लिखा. ऐसा करना ठीक नहीं है. हम अपने काम से समझौता कर रहे हैं.

हालांकि बैबिट को बाद में ये भी समझ में आया कि उसके कर्मचारी हर वक़्त तो ऑनलाइन हो नहीं सकते. छुट्टी के वक़्त उनका ट्विटर पर सक्रिय रहना संभव नहीं.

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इसलिए बैबिट ने एक तरीक़ा निकाला जिसमें एक कर्मचारी ऐसे देर रात या सुबह किए जाने वाले सवालों के जवाब दे.

ये आज की कारोबारी दुनिया का सच है. इंटरनेट पर दुनिया चौबीसों घंटे जागती है. कारोबार हर वक़्त चलता रहता है. तो आज तमाम कंपनियां चाहती हैं कि उनके कर्मचारी जब दफ़्तर से निकलें तो भी ऑनलाइन उपलब्ध रहें. ज़रूरत पड़ने पर कंपनी का काम करें.

टीम मैनेजर्स के लिए ये ज़रूरत ख़ास तौर से चुनौती बन गई है. जब, उन्हें अपने कर्मचारियों से काम के घंटों के अलावा भी काम कराना होता है.

उनकी निजी ज़िंदगी का सम्मान करते हुए भी उनसे उम्मीद होती है कि वो घर पर रहें तो भी मेल के जवाब दें.

अमरीका के सैन फ्रैंसिस्को शहर की कंपनी ज़ुओरा के प्रमुख टिएन ज़ुओ कहते हैं कि ये इक्कीसवीं सदी के कर्मचारियों के बर्ताव की देन है. इस दौर के युवाओं ने घर और दफ़्तर के काम में फ़र्क करना छोड़ दिया है.

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ज़ुओ कहते हैं, युवा सोशल नेटवर्किंग के ज़रिए कंपनी का भी काम करते हैं और अपने दोस्तों से भी बतियाते रहते हैं. कंपनी के मेल बॉक्स पर ही उनके निजी ई-मेल भी आते हैं, जिसका वो दफ़्तर में बैठे हुए ही जवाब दे देते हैं. इसीलिए घर से ऑफ़िस का मेल लिखने में उन्हें कोई दिक़्क़त नहीं होती.

टिएन ज़ुओ के हिसाब से ये कोई ग़लत बात भी नहीं. वो इसके लिए फ्रेंच विचार वॉल्टेयर का मशहूर बयान याद दिलाते हैं. 'काम हमें बोरियत, ज़रूरत और बुरी आदतों से बचाता है'.

जुओ उम्मीद करते हैं कि उनके कर्मचारी मेल या मैसेंजर के ज़रिए हर वक़्त उपलब्ध रहें. अक्सर होता भी यही है. कई बार जब वो रात दस बसे कंपनी की मैसेंजर सर्विस को चेक करते हैं तो पाते हैं कि उनके कई मातहत उस वक़्त वहां एक्टिव हैं.

बहुत से लोग ये कहते हैं कि काम और निजी ज़िंदगी के बीच अच्छा तालमेल ज़रूरी है. इससे आपका काम बेहतर होता है.

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लेकिन आज बहुत सी कंपनियों के लिए ऐसा तालमेल बिठाना बहुत बड़ी लग्ज़री है. जिसका बोझ वो नहीं उठा सकते. कुछ कारोबार ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे एलर्ट रहना ज़रूरी है.

ज़ुओ इसके बदले में कर्मचारियों को काम के बीच से घूम आने या अपना काम निपटाने की आज़ादी देने की वक़ालत करते हैं.

ख़ुद ज़ुओ ने दफ़्तर से निकलकर अपनी बेटी को डॉक्टर को दिखाया था. अगर आप कर्मचारियों से उम्मीद करते हैं कि वो हर वक़्त ऑनलाइन रहें, तो, आपको भी उन्हें थोड़ी आज़ादी तो देनी होगी.

हर वक़्त ऑनलाइन रहने में ख़तरा ये है कि जल्द ही लोग थकान और दूसरी परेशानियों के शिकार हो सकते हैं.

इसके लिए अमरीका की एक कंपनी के मैनेजर जो क्रॉस एक सलाह देते हैं. वो कहते हैं कि कर्मचारियों को कंपनी के मिशन का हिस्सा महसूस कराया जाए, तो, वो हर वक़्त ऑनलाइन रहने की डिमांड पर ऐतराज़ नहीं करेंगे. उन्हें बस ये महसूस हो चाहिए कि वो कंपनी के लिए अहम हैं.

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हालांकि जो क्रॉस इसमें भी एक पाबंदी रखने की वक़ालत करते हैं. जब हर शख़्स को निजी ज़िंदगी जीने की आज़ादी दी जानी चाहिए.

वैसे बहुत से युवा ऐसे हैं जिन्हें ऑफलाइन होना पसंद नहीं. हालांकि वो हर वक़्त कंपनी का काम नहीं करना चाहते. लेकिन बीच-बीच में कंपनी के मेल देखते रहते हैं.

ऐसे लोगों को इस डर से आज़ादी दिलानी चाहिए कि वो चाहें तो कुछ वक़्त के लिए काम से दूर रह सकते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं. आख़िर काम और निजी ज़िंदगी के बीच तालमेल बनाना भी तो ज़रूरी है.

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