'अमीरों की मांग को पूरा करने वाली कंपनी'

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रईसों के तमाम तरह के शौक़ होते हैं. उन्हें कभी भी अचानक किसी चीज़ की ज़रूरत महसूस होने लगती है. घर पर उनकी ज़रूरतें पूरे करने के लिए तो सारे इंतज़ाम होते हैं. मगर, जब वो विदेश जाते हैं, होटलों में ठहरते हैं, तब उन्हें अचानक होने वाली ज़रूरतें पूरी करने के लिए मददगार चाहिए होते हैं.

आप ये जानकर हैरान होंगे कि दुनिया में ऐसी एक कंपनी है जो होटलों में ठहरने वाले रईसों की मदद का ही काम करती है. इस कंपनी का नाम है 'गोल्डेन कीज़'. ये एक फ्रेंच कंपनी है, जिसका फ्रेंच भाषा में नाम ले क्लेफ्स डिओर है. ये कंपनी 1929 में पेरिस में बनी थी, जिसका मक़सद घर से बाहर घूमने या काम से निकले अमीर लोगों की मदद करना था.

कंपनी ने 1952 से फ्रांस से बाहर सेवाएं देनी शुरू की. आज 'गोल्डेन कीज़' कंपनी के लिए दुनिया भर के होटलों में क़रीब 4 हज़ार लोग काम करते हैं. इस कंपनी का मोटो है, 'दोस्ती के ज़रिए सेवा.'

'गोल्डेन कीज़' के कर्मचारी कमोबेश हर बड़े फाइव या सेवेन स्टार होटलों में मिल जाएंगे. इनका मक़सद ख़ास ग्राहकों को हर तरह की सुविधा मुहैया कराना है. उनकी परेशानियों को दूर करना. क़ानून के दायरे में रहकर वो अपने ग्राहकों की हर तरह से मदद करने की कोशिश करते हैं. हर मांग पूरी करने की कोशिश करते हैं.

अपने शहर से दूर होटल में रुकने आए लोगों को बहुत तरह की ज़रूरतें होती हैं. जैसे ख़ास गिफ्ट का इंतज़ाम करना. तोहफ़े को किसी ख़ास के पास पहुंचाना. किसी रेस्टोरेंट के ख़ास कोने की जगह की बुकिंग. टैक्सी का इंतज़ाम, आने-जाने या दिन भर के खाने का इंतज़ाम. बहुत सी ऐसी ज़रूरतें होती हैं, जो 'गोल्डेन कीज़' के कर्मचारी पूरी करते हैं.

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यूं तो आज बहुत सी रूटीन बुकिंग के काम मोबाइल ऐप से हो जाते हैं. मगर किसी इंसान की मदद से कोई काम लेना एक अलग ही तजुर्बा देता है. फिर तमाम रईस लोग हैं जो कई बार अजीबो-ग़रीब मांग करते हैं. अब ऐेसे ख़ास ग्राहकों को ना कहने का विकल्प तो होता नहीं. इसी मौक़े पर 'गोल्डेन कीज़' कंपनी के कर्मचारी इन ख़ास ग्राहकों के काम आते हैं.

वियतनाम की राजधानी हनोई के सोफीटेल होटल में 'गोल्डेन कीज़' के चीफ़ कर्मचारी फैम कॉन्ग थिन ऐसा ही एक तजुर्बा बताते हैं. वो कहते हैं कि एक बार बड़ी देर रात को एक ग्राहक ने उनसे बड़ा सकुचाते हुए कंडोम की मांग की. उस वक़्त आस-पास की दुकानें बंद हो चुकी थीं. लेकिन स्थानीय होने की वजह से फैम को पता था कि ये चीज़ कहां मिल सकती है. उन्होंने उस शख़्स की ये गुज़ारिश पूरी कर दी. वो ख़ास ग्राहक फैम का बहुत शुक्रगुज़ार हुआ.

'गोल्डेन कीज़' कंपनी का सदस्य बनना बेहद मुश्किल काम है. पहले तो आपके पास होटल मैनेजमेंट की डिग्री हो. फिर आप तीन साल तक होटल की फ्रंट डेस्क पर अच्छा काम करें. आपके काम की कई लोग तारीफ़ करें. तब आपको 'गोल्डेन कीज़' का सदस्य होने के एक कड़ा इम्तिहान देना होता है. फिर बेहद मुश्किल इंटरव्यू होता है. इसके बाद ही आपको 'गोल्डेन कीज़' के ख़ास लोगो वाली चाबियों की पिन पहनने की इजाज़त होती है.

'गोल्डेन कीज़' के सदस्य भले ही एक-दूसरे के मुक़ाबले में खड़े होटलों में काम करत हो, ज़रूरत पड़ने पर वो एक-दूसरे से हमेशा मदद ले सकते हैं. वेस एंडरसन की फ़िल्म, ''द ग्रैंड बुडापेस्ट होटल' में एक कर्मचारी, ऐसी कंसियर्ज सर्विस देने वालों की मदद से अपने एक साथी को होटल से भगाता है. होटल के कर्मचारियों के ये किरदार 'गोल्डेन कीज़' कंपनी के कर्मचारियों से ही प्रेरित थे.

'गोल्डेन कीज़' से जुड़े रहे बुराक इपेकी नाम के ब्रिटिश कर्मचारी बताते हैं कि उनकी कंपनी को अक्सर बड़े, नामचीन लोगों को छुपाकर होटल से निकालना पड़ता है. ख़ास तौर से सेलेब्रिटीज़ को. ऐसे में शहर के बारे में अच्छी जानकारी काफ़ी काम आती है. दूसरे साथियों से अच्छी नेटवर्किंग से भी इसमें काफ़ी मदद मिलती है. अलग-अलग बड़े शहरों में काम करने वाले लोग एक दूसरे से अपनी कंपनी के ज़रिए संपर्क में आते हैं. इससे उन्हे एक-दूसरे की मदद करने में सहूलत होती है.

बुराक बताते हैं कि एक बार न्यूयॉर्क में एक ग्राहक ने एक ख़ास तरह के सॉस को अपने घर पर पहुंचाने की मांग की. क्योंकि अगले दिन उसके घर में एक स्पेशल पार्टी थी. वो सॉस एक ही जगह मिलता था. बुराक ने अपने नेटवर्क के ज़रिए ये बेहद मुश्किल काम पूरा कर दिया. वो ग्राहक उनसे बेहद ख़ुश हुआ.

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'गोल्डेन कीज़' के कर्मचारी अक्सर अपनी कंपनी और ग्राहकों से कोई भी बात उजागर न करने का समझौता करते हैं. क्योंकि अक्सर उनके ग्राहक बेहद रईस और मशहूर लोग होते हैं.

वैसे आज के दौर में बहुत से ऐसे काम रोबोट को सौंपे जा रहे हैं. जापान के हेन-ना होटल की फ्रंट डेस्क पर जापानी महिलाओं जैसे दिखने वाले रोबोट लगाए गए हैं. जो कई तरह की भाषाएं बोलते हैं. ग्राहकों की आंख से आंख मिलाकर बात करते हैं. वो बहुत से कामों में ग्राहकों की मदद करते हैं.

होटल उद्योग के जानकार ब्रिटेन के डेनियल लेसर कहते हैं कि आगे चलकर मेहमाननवाज़ी के सेक्टर में रोबोट का रोल बढ़ने वाला है. अभी तो रोबोट बहुत महंगे हैं. उनके मुक़ाबले लोग इंसानी मददगारों को बेहतर मानते हैं. मगर रोबोट होंगे तो न उन्हें सैलरी देने का झंझट, न उनकी छुट्टी और दूसरी मांगों की फ़िक्र होगी. इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में आगे चलकर रोबोट काफ़ी काम आने वाले हैं.

हालांकि फ़िलहाल तो यूबर और येल्प जैसे ऐप बहुत से काम कर रहे हैं. जैसे टैक्सी बुक करना या फिर कुछ सेवाएं हासिल करने में मदद करना.

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इन चुनौतियों से निपटने के लिए 'गोल्डेन कीज़' के कई कर्मचारी नए तरीक़े सीख रहे हैं, ताकि इन अमीर ग्राहकों की नए मोर्चों पर मदद कर सकें. जैसे कि विलियम चैन. वो शंघाई के पोर्टमैन रिज कार्लटन होटल में काम करते हैं. यहां पर आने वाले ज़्यादातर विदेशी, निवेश के इरादे से आते हैं. इसलिए विलियम चैन, बाज़ार के बारे में, निवेश के नए मौक़ों के बारे में जानकारी जुटाते रहते हैं.

कई बार वो ग्राहकों को बिन मांगी सलाह देते हैं. कुछ लोगों को इससे काफ़ी फ़ायदा मिलता है. कई लोग सलाह नहीं भी मांगते. पर जो लोग विलियम से जानकारी चाहते हैं, उनकी वो खुलकर मदद करते हैं. एक ख़ास तरह का रिश्ता जोड़ लेते हैं. इस तरह वो 'गोल्डेन कीज़' की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)

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