क्या सेना में सेवा देना फिर अनिवार्य हो जाएगा?

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रूस, पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया पर फिर से अपना सिक्का जमाने में जुटा हुआ है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अगुवाई में रूस कई मोर्चों पर अपनी सैन्य ताक़त की नुमाइश कर रहा है. पिछले साल उसने यूक्रेन से क्रीमिया को बलपूर्वक छीन लिया. रूस की सेनाएं ख़ुफ़िया तौर पर पूर्वी यूक्रेन के बाग़ियों की मदद कर रही हैं. इसी तरह बाल्टिक सागर में रूस नए सिरे से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है.

रूस के आक्रामक रुख़ से यूरोपीय देशों में घबराहट है. साथ ही चरमपंथ और हिंसा की बढ़ती घटनाओं से भी ये देश फिक्रमंद हैं. इसीलिए, वो किसी भी हालात से निपटने की तैयारी में जुट गई हैं. इसी वजह से कई यूरोपीय देश एक बार फिर से अनिवार्य सैन्य सेवा का नियम लागू करने जा रहे हैं. इस नियम के तहत देश के हर स्वस्थ युवा को तयशुदा वक़्त सैन्य सेवा में देना होता है.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद बहुत से यूरोपीय देशों ने अनिवार्य सैन्य सेवा को ख़त्म कर दिया था. लेकिन दुनिया में बढ़ती तनातनी के चलते अब कई यूरोपीय देशों, जैसे जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड और स्वीडन में अनिवार्य सैन्य भर्ती को दोबारा शुरू करने पर विचार हो रहा है. रूस के पड़ोसी देशों यूक्रेन और लिथुआनिया ने तो अनिवार्य भर्ती का क़ानून भी पास कर दिया है. वहीं फिनलैंड औऱ नॉर्वे में अब देश के हर स्वस्थ नागरिक के लिए राष्ट्र सेवा को अनिवार्य कर दिया गया है. फिर चाहे वो मर्द हो या औरत.

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यूं तो यूरोपीय देश रूस से बढ़ते ख़तरे को इसकी वजह बता रहे हैं. मगर कई देशों में अनिवार्य सैन्य सेवा का चलन है. जैसे, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में पिछले साल से ही ड्राफ्ट या अनिवार्य सैन्य भर्ती शुरू हुई है. संयुक्त अरब अमीरात, अरब देशों में बढ़ती तनातनी को देखते हुए अपने सुरक्षा इंतज़ाम बेहतर करना चाहता है. इसका मक़सद देश के युवाओं में देशप्रेम का भाव भरना भी है. हां, डायबिटीज और मिर्गी जैसी बीमारियों के मरीज़ों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट है. अगर आप घर के इकलौते कमाऊ मर्द हैं, तो भी आपको इस अनिवार्य देश सेवा से छूट मिलेगी. आपके पैर चपटे हैं तो भी आपको इससे रियायत मिल सकती है.

संयुक्त अरब अमीरात में एक और नियम भी है. अगर आप कोई और नौकरी कर रहे हैं. और आपको देश की ज़रूरत के वक़्त सेना की ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है. तो, आपकी जगह किसी और को उस नौकरी पर नहीं रखा जाएगा. अगर आप प्रमोशन के हक़दार हैं, तो वो भी आपको मिलेगा.

जानकार कहते हैं कि कुछ महीनों की सैन्य सेवा से आपको कई फ़ायदे हो सकते हैं. आपको बहुत सी नई चीज़ें सीखने को मिल सकती हैं. इसका लाभ आपको अपने करियर में भी मिल सकता है.

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इसीलिए लंदन के रहने वाले डेविड हुबार्ड ने फिनलैंड में अनिवार्य सैन्य सेवा में शामिल होने का फ़ैसला किया. डेविड के पास ब्रिटेन और फिनलैंड की दोहरी नागरिकता है. वो फिनलैंड सिर्फ़ ये सैन्य सेवा करने गए. जहां उन्हें फिनिश भाषा के साथ और भी बहुत काम की चीज़ें सीखने को मिलीं. अब डेविड मुश्किल हालात का अच्छे से सामना कर सकते हैं.

वैसे अनिवार्य सैन्य सेवा हर देश में एक जैसी नहीं. रूस में तो इससे बचने के लिए लोग सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत तक देते हैं. रूस में एक साल की सैन्य सेवा ज़रूरी है. मगर जिनके पास पैसे हैं, उनके बच्चे घूस देकर इससे बच निकलते हैं. हालांकि अब रूस की बढ़ती सैन्य ज़रूरत को देखते हुए वहां की सरकार इस नियम को सख़्ती से लागू करने की कोशिस कर रही है.

इसी तरह तुर्की में अच्छी सेहत वाले हर शख़्स के लिए सैन्य सेवा में कुछ दिन बिताना अनिवार्य है. यहां भी पैसे के बूते पर लोग इससे बच निकलते हैं. कई बार तो लोग बीमारी का फर्ज़ी सर्टिफिकेट देकर ख़ुद को अनिवार्य सैन्य भर्ती से बचा लेते हैं. वैसे तुर्की के जो नागरिक तीन साल या इससे ज़्यादा दिनों से देश से बाहर हैं, वो एक हज़ार यूरो देकर इससे बच सकते हैं. और जो लोग सैन्य सेवा में नहीं आते, उन पर जुर्माना भी लगता है. कई लोग इससे बचने के लिए दूसरे देश में जाकर बस जाते है.

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ईरान में भी बहुत से लोग अनिवार्य सैन्य सेवा से बचने के लिए विदेश चले जाते हैं. वहीं कई लोग पैसे देकर इससे अपनी जान बचाते हैं. कई लोग तो इससे बचने को ख़ुद को अनपढ़ घोषित कर देते हैं. ऐसे लोग अगर किसी और काम में कामयाब हुए और बाद में सरकार उनके नाम अनपढ़ों की लिस्ट में डाल देती है. तो, उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.

भारत में अनिवार्य सैन्य सेवा का नियम नहीं है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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