ये देश बुला रहे हैं, आएं और बसे हमारे यहां

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Image caption न्यूज़ीलैंड में कैटांगाटा अपने ख़ाली घर और फ़ालतू पड़ी ज़मीनों के लिए ख़रीदार तलाश रहा

अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव का शोर ख़त्म हो चुका है. डोनल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं. उनके ख़िलाफ़ कई जगह विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. मगर, उनके चुनाव से पहले से ही अमरीका के कुछ लोग अपना देश छोड़कर दूसरी जगह, बसने की सोच रहे थे.

पिछले कुछ महीनों में अमरीका में गूगल सर्च पर नज़र डालें तो लोग अमरीका छोड़कर ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बसने के तरीक़े तलाश रहे थे.

यही हाल ब्रिटेन का है. जब से ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने का फ़ैसला लिया है, बहुत से लोग ब्रिटेन से जाकर दूसरे देशों में बसना चाह रहे हैं. वजह ये कि उन्हें ब्रेक्सिट के बाद तमाम तरह की परेशानियों का सामना करने का डर है.

ब्रेक्सिट वोट के बाद ब्रिटेन से कनाडा जाकर बसने की संभावना तलाशने वालों की तादाद ढाई गुना बढ़ गई है.

वहीं गूगल ट्रेंड के आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में कुछ लोग अपना देश छोड़कर, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यहां तक कि पड़ोसी देश आयरलैंड बसने की संभावना भी तलाश रहे हैं.

ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने के फ़ैसले से अनिश्चितता का माहौल है. लोगों को अपना भविष्य सुरक्षित नहीं दिख रहा. इसीलिए वो अपने लिए दूसरे देशों में मौक़े तलाश रहे हैं.

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Image caption ऑस्ट्रेलिया का तस्मानिया राज्य भी ब्रिटेन के निवासियों को अपनाने को तैयार है

अच्छी बात ये है कि कई देश, इन ब्रिटिश नागरिकों को अपनाने को तैयार हैं.

मिसाल के तौर पर न्यूज़ीलैंड को ही लीजिए. यहां का छोटा सा क़स्बा कैटांगाटा, अपने ख़ाली घर और फ़ालतू पड़ी ज़मीनों के लिए ख़रीदार तलाश रहा है.

पिछले दिनों ये अफ़वाह फैल गई कि इस क़स्बे में लोगों को लाखों डॉलर की नौकरी दी जा रही है. जिसके बाद इस क़स्बे के बारे में जानकारी पाने वालों की बाढ़ सी आ गई. यहां के प्रशासन को बयान जारी करके कहना पड़ा कि, ऐसा कुछ नहीं है. वो बस अपने ख़ाली मकान और ज़मीनें, सस्ते दामों पर लोगों को देने को तैयार हैं.

मगर, ब्रिटेन से ये जगह बहुत दूर है. क़रीब तीस घंटे के सफ़र के बाद ब्रिटेन से लोग डुनेडिन नाम के शहर पहुंचेंगे. वहां से भी कुछ और दूरी पर है कैटांगाटा शहर.

इसलिए यहां बसने का ख़याल कितने ब्रिटिश नागरिकों को लुभाएगा, कहना मुश्किल है. फिर शहर की ज़िंदगी के आदी लोग, इस ग्रामीण, अलसाये से क़स्बे की ज़िंदगी के साथ तालमेल बिठा पाएंगे कि नहीं, सवाल ये भी है.

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Image caption कनाडा के कई और इलाक़ों में भी लोगों के बसने के मौक़े हैं

न्यूज़ीलैंड की ही तरह, ऑस्ट्रेलिया का तस्मानिया राज्य भी ब्रिटेन के निवासियों को अपनाने को तैयार है. ख़ास तौर से उन लोगों को जो डेयरी फ़ॉर्म चलाने का तजुर्बा रखते हैं.

यहां के कई डेयरी फॉर्म आधे दाम पर बेचे जा रहे हैं. ख़रीदार नहीं हैं. मगर, न्यूज़ीलैंड की तरह ब्रिटेन के लोगों को यहां भी आने में दिक़्क़त है. ये जगह भी ब्रिटेन से बहुत दूर है. फिर यहां के मौसम के हिसाब से ढलना भी एक चुनौती होगी.

आईटी इंडस्ट्री में काम करने वाले ब्रिटिश लोगों के लिए, घर के पास मौक़े मिल सकते हैं. जैसे कि पड़ोसी देश आयरलैंड.

यहां तीन हज़ार आईटी प्रोफ़ेशनल्स की ज़रूरत है. यहां का आईटी उद्योग बड़ी तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहा है. लेकिन ज़रूरत के मुताबिक़ यहां कामगार नहीं हैं. इसलिए ब्रिटेन से दूसरे देशों में बसने की सोच रहे लोगों के लिए यहां आने का अच्छा मौक़ा है.

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Image caption अमरीका के डेट्रॉयट शहर में बेरोज़गारी की दर 11 फ़ीसद है

आयरलैंड की आईटी इंडस्ट्री की ज़्यादातर नौकरियां, राजधानी डब्लिन में उपलब्ध हैं. मगर कॉर्क और लाइमरिक जैसे शहरों में भी नौकरी मिलने की उम्मीद है.

उत्तरी अमरीका के कई शहर और क़स्बे भी अपने यहां ब्रिटिश नागरिकों का स्वागत करने को तैयार हैं. जैसे कि कनाडा का शहर मैनीटोबा.

यहां की आबादी तेज़ी से बूढ़ी हो रही है. कामगारों की तादाद घट रही है. इसलिए यहां का प्रशासन चाहता है कि बाहर से आकर लोग यहां बसें. इसीलिए यहां आने वालों को सस्ती क़ीमत पर मकान मुहैया कराए जा रहे हैं.

अमरीकी सीमा से लगे पाइपस्टोन क़स्बे का प्रशासन भी बर्तानवी लोगों के स्वागत के लिए तैयार है. यहां पर सस्ती दरों पर लोगों को ज़मीन और मकान दिए जाने का ऑफर है.

शर्त ये है कि ज़मीन लेने के तीन महीने के अंदर आपको मकान बनाना होगा. यहां का प्रशासन आपको मकान बनाने और कारोबार शुरू करने के लिए क़रीब 25 हज़ार डॉलर का कर्ज़ देने को तैयार है. कई लोग तो यहां आकर बसने भी लगे हैं.

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Image caption कनेक्टिकट का न्यू हैवेन शहर

कनाडा के कई और इलाक़ों में भी लोगों के बसने के मौक़े हैं. जैसे कि विनीपेग शहर के आस-पास के इलाक़े.

मंदी की मार झेल रहे कुछ अमरीकी शहर भी बाहर से आकर बसने वालों को अच्छे ऑफर दे रहे हैं. जैसे कि कनेक्टिकट का न्यू हैवेन शहर.

यहां आकर बसने वालों को यहां का प्रशासन अस्सी हज़ार डॉ़लर तक की मदद दे रहा है. इसमें किराए पर मकान लेने के पैसे से लेकर, घर बनाने के लिए बीस हज़ार डॉलर तक की रकम शामिल है.

हां, इन शहरों में काम खोजना आसान नहीं होगा. जैसे कि अमरीका के डेट्रॉयट शहर में बेरोज़गारी की दर 11 फ़ीसद है. वहीं न्यू हैवेन में सात फ़ीसद.

डेट्रॉयट में जुर्म भी बहुत होते हैं. यानी ऐसे वीरान हो रहे शहरों में आकर लोग बसें, इसके लिए यहां के लोगों को बेहतर ऑफ़र के साथ आना होगा. लेकिन, अगर आप बस ब्रिटेन छोड़कर बाहर बसना चाहते हैं, तो, इन विकल्पों में से एक को चुना जा सकता है.

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