अच्छा वक्ता होना सफल करियर की गारंटी

  • 2 अप्रैल 2017
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक़्त लोकप्रियता के शिखर पर हैं. इसमें उनके भाषणों का बड़ा योगदान हैं. वो बहुत अच्छे वक्ता हैं. शानदार भाषण देते हैं. मोदी की कामयाबी में इसका बड़ा योगदान माना जाता है.

सिर्फ़ राजनीतिक जीवन में ही नहीं, पेशेवर ज़िंदगी में भी अच्छा वक्ता होना आपकी तरक़्क़ी की बुनियाद बन सकता है. और अगर आप लोगों के सामने नहीं बोल पाते, डर लगता है तो आपकी कामयाबी की रफ़्तार धीमी हो जाएगी. आपके हाथ से सिर्फ़ इस वजह से तरक़्क़ी के कई मौक़े निकल जाएंगे क्योंकि आप लोगों के सामने बोल नहीं सकते.

दुनिया में बहुत से लोग होते हैं जो इस डर के शिकार होते हैं. अमरीका के कैलिफोर्निया स्थित चैपमैन यूनिवर्सिटी ने 2014 में एक सर्वे किया था. इसमें शामिल पच्चीस फ़ीसद से ज़्यादा लोगों ने कहा कि उन्हें भीड़ के सामने बोलने से डर लगता है.

इसका डर का सीधा असर आपके करियर पर पड़ सकता है. आज तमाम कंपनियां मैनेजर लेवल की नौकरियां देते वक़्त आपके अंदर ये ख़ूबी तलाशती हैं.

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कंपनियां चाहती हैं कि आप लोगों के सामने अच्छे से अपनी बात रख सकें. आप प्रेज़ेंटेशन दे सकें. मैनेजमेंट की बाक़ी ख़ूबियां देखने की बारी तो बाद में आती है.

पहली शर्त तो पब्लिक स्पीकिंग क्वालिटी की ही है. लेकिन बहुत से लोग हैं जिन्हें दफ़्तर में अपने साथियों को संबोधित करने या प्रेज़ेंटेशन देने के नाम से ही सिहरन होने लगती है. ये लोग पब्लिक स्पीच से इतना डरते हैं कि इसके लिए वो अपना सम्मान खोने से भी नहीं डरते.

उनके हाथ के तरक्की के कई मौक़े निकल जाते हैं. मगर, वो बोलने के डर से उबर नहीं पाते. जबकि एक सर्वे के मुताबिक़ 70 फ़ीसद लोगों को ये पता था कि बोलने की कला करियर में कामयाबी के लिए बेहद ज़रूरी है.

जो लोग दफ़्तर में या सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण नहीं दे पाते, उनके डर का असर उनके काम पर पड़ता है.

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आज दुनिया में बहुत सारा काम कंप्यूटर के ज़रिए या ऑनलाइन हो रहा है. मगर भाषण देने की, प्रेज़ेंटेशन देने की अहमियत भी बढ़ती जा रही है.

आज कंपनियों में पैनल डिस्कशन होते हैं. सिर्फ़ सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने से काम नहीं चलता. आपके अंदर भीड़ को संबोधित करने की ख़ूबी होनी चाहिए. तभी तो आप अपने काम, अपनी ताक़त से दुनिया को मुरीद बना सकेंगे.

मशहूर कारोबारी सलाहकार और लेखक हार्वे कोलमैन कहते हैं, "आज आपकी कामयाबी के लिए आपका काम, आपकी इमेज और आपके काम की चर्चा, तीनों बेहद ज़रूरी हैं. इनमें सबसे ज़्यादा अहमियत आपके काम की चर्चा की होती है.''

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हार्वे के मुताबिक कामयाबी में इसका 60 फ़ीसद योगदान होता है. आपकी इमेज का आपकी तरक़्क़ी में 30 फ़ीसद योगदान होता है. वहीं आपके काम का महज 10 फ़ीसद योगदान आपकी तरक़्क़ी में होता है.

साफ़ है कि आपके लिए सार्वजनिक तौर पर बोलने की आदत बनाना कितना ज़रूरी है. आज पेशेवर ज़िंदगी में कामयाबी के लिए ये बड़ी शर्त बन चुकी है. आज नौकरी के लिए तमाम इंटरव्यू के दौरान पैनल डिस्कशन या प्रेज़ेंटेशन की कला को आज़माया जाता है.

कई बार काम के दौरान आपको वीडियो कांफ्रेंस में अपना प्रेज़ेंटेशन देना होता है. इसमें ज़रूरी होता है कि आप अपनी बात को साफ़ शब्दों में दूर बैठे लोगों को समझा सकें. नाकामी, आपकी तरक़्क़ी पर सीधा असर डालती है. अब अगर आप लोगों के सामने बोलने से डरते हैं, तो ज़ाहिर है ये आपके करियर के लिए नुक़सानदेह हो सकता है.

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कनाडा की मशहूर TED talks ने लोगों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है. इसकी शुरुआत कनाडा में 1984 में हुई थी. जिसमे तकनीक, डिजाइन और मनोरंजन पर लोगों को खुलकर बोलने का मौक़ा दिया जाता था.

आज TED talks के वीडियो ऑनलाइन देखे जाते हैं जिसमें तमाम एक्सपर्ट बीस मिनट तक किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं.

आज TED talks एक अरब से ज़्यादा बार देखी जा चुकी हैं और इनका सौ से ज़्यादा ज़ुबानों में तर्जुमा भी हो चुका है. इन्हें देखकर आप पब्लिक स्पीकिंग के अपने डर को दूर कर सकते हैं.

बहुत से लोग अपने इस डर का सामना ही नहीं करना चाहते. वो सोचते हैं कि साल में एक या दो बार ही तो ऐसा करने की ज़रूरत होती है. फिर वो उसका सामना करने के बजाय उससे बचने के ज़रिए तलाशते रहते हैं.

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असल में खुलकर बोलने का हमारा डर हमारे दिमाग़ में रहता है. हमारा दिमाग़ डर को ज़्यादा पहचानता, समझता है. जबकि इनाम या ख़ुशी को बाद में और कम देखता है.

जानकार कहते हैं कि जब भी हम बोलने के लिए खड़े होते हैं, डर हमारे दिमाग़ पर हावी हो जाता है. हमारी धड़कनें बढ़ जाती हैं. पसीना आने लगता है.

इससे निपटने का सबसे आसान तरीक़ा होता है कि हम पहले से इसकी तैयारी कर लें. जिस मुद्दे पर बोलना है उसकी समझ बेहतर करें.

आपको हर भाषण का पूरा रट्टा लगाने की ज़रूरत नहीं. सिर्फ़ शुरुआत के एक-दो पैराग्राफ याद कर लें. बाक़ी की चीज़ों को स्लाइड के तौर पर याद करने की कोशिश करें. अपने दिमाग़ में इन स्लाइड्स को याद कर लें.

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आपको भाषण की शुरुआत में जो दिक़्क़त होगी, उससे निपटने में आपको शुरुआत के याद किए गए पैराग्राफ काम आएंगे. फिर आगे की बातें आप अपने ज़हन में याद की गई स्लाइड्स के ज़रिए समझा सकते हैं. यानी ज़हन में बोलने वाली बातों की ख़ूबसूरत स्लाइड बनाकर रखना, आपके लिए काफ़ी काम का हो सकता है.

सबसे अहम बात ये है कि पब्लिक स्पीच से डरने वाले लोग अपने बारे में बहुत ज़्यादा सोचते हैं. ज़रूरत इस सोच को सुनने वालों पर केंद्रित करने की है क्योंकि उनकी भी उतनी ही ज़िम्मेदारी है कि वो आपकी बात को ध्यान से सुनें और समझें.

आप इन बातों की मदद से सार्वजनिक रूप से बोलने के अपने डर से उबर सकते हैं.

शुरुआत तो करिए क्योंकि डर के आगे जीत है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)

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