बोतलबंद हवा का जोर पकड़ता चोखा धंधा

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पैसे कमाने के बहुत से तरीक़े होते हैं. दुनिया में कई लोग तो ऐसे हैं जो हवा से पैसे कमा रहे हैं! जी हां, आप यक़ीन भले न करें, मगर, है ये सौ फ़ीसद सच्ची बात.

कुछ लोग डर की हवा से पैसे कमा रहे हैं. चलिए आपको समझाते हैं कि पूरा माजरा क्या है. जैसे आप साफ़ पानी पीने के लिए बोतलबंद पानी ख़रीदते हैं.

वैसे ही, साफ़-सुथरी सांस लेने के लिए आप कैन में बंद शुद्ध हवा भी अब ख़रीद सकते हैं. यही है डर की हवा का नया कारोबार, जो बड़ी तेज़ी से फैल रहा है.

दुनिया में प्रदूषण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. शहरों में सांस लेना दूभर हो रहा है. धुंध की वजह से दिल्ली से बीजिंग तक अक्सर प्रदूषण के काले बादल छाए रहते हैं.

दुनिया में हर साल 55 से 70 लाख लोग प्रदूषण की वजह से बेवक़्त मर जाते हैं.

भारत और चीन में हर साल प्रदूषण से क़रीब तीस लाख लोगों की जान चली जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह शहरों में बढ़ती ख़राब हवा है.

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प्रदूषित देशों में व्यापार

गाड़ियों से निकली ज़हरीली गैसें, कारखानों और जेनरेटर से निकलता धुआं और फ़सलें जलाने से उड़ती राख, इस प्रदूषण की प्रमुख वजहें हैं.

इन्हें रोकने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं. दिल्ली और बीजिंग में तो साल के कई महीनों तक सांस लेने के लिए साफ़ हवा मिलना कमोबेश नामुमकिन रहता है.

यहां रहने वाले अगर सिगरेट नहीं भी पीते हैं, तो भी ज़हरीली हवा उनके फेफड़ों में समाती रहती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए अब आ गए हैं फ्रेश एयर कंटेनर.

यानी डिब्बाबंद हवा. कई कंपनियां ऐसी हैं जो दूर-दराज़ के इलाक़ों से साफ़ हवा को डिब्बाबंद करके चीन और भारत जैसे प्रदूषित देशों में बेच रही हैं.

ऐसी ही एक कंपनी है कनाडा की, वाइटैलिटी. इस कंपनी के चीफ एक्ज़ीक्यूटिव मोसेस लैम ने डिब्बाबंद हवा बेचने की शुरुआत मज़ाक़िया तोहफ़ों के तौर पर की थी.

लेकिन लोगों ने उनके इस मज़ाक़ को बहुत सीरियसली लिया. नतीजा ये कि आज उनका डिब्बाबंद शुद्ध हवा का कारोबार दिन दूनी-रात चौगुनी रफ़्तार से तरक़्क़ी कर रहा है.

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भारत भी खरीदार

कनाडा के एडमॉन्टन शहर में स्थित वाइटैलिटी कंपनी, वहां के रॉकी पर्वतमाला से शुद्ध हवा को डिब्बों में बंद करके बेचती है.

एक कैन की क़ीमत क़रीब 24 डॉलर या 1600 रुपए है. इससे आप 160 बार सांस ले सकते हैं.

कंपनी के सीईओ मोसेस लैम बताते हैं कि उनकी ये डिब्बाबंद शुद्ध हवा के चीन, दक्षिण कोरिया और भारत में बहुत से ख़रीदार हैं.

इन दिनों वाइटैलिटी की शुद्ध हवा के दस हज़ार डिब्बे हर महीने चीन में बिकते हैं. मोसेस को उम्मीद है कि जल्द ही ये आंकड़ा 40 हज़ार को पार कर जाएगा.

उन्होंने भारत में भी हाल में ही डिब्बाबंद हवा बेचनी शुरू की है. मोसेस को उम्मीद है कि भारत में जल्द ही वो हर महीने शुद्ध हवा के दस हज़ार डिब्बे बेचने लगेंगे.

ऐसा ही काम ब्रिटिश कंपनी एथाएयर कर रही है. ये कंपनी ब्रिटेन के ग्रामीण इलाक़ों से हवा शुद्ध हवा जमा करके जार मे बंद करके बेचती है.

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शुद्ध हवा

एक जार की क़ीमत 103 डॉलर या क़रीब 7 हज़ार रुपए है. एथाएयर के संस्थापक लियो डे वाट्स ने ये काम लोगों को पर्यावरण के लिए जागरूक करने के लिए शुरू किया था.

उन्होंने इसे 'एयर फार्मिंग' या हवा की खेती का नाम दिया. शुद्ध हवा बेचने से एथाएयर जो पैसे कमाती है, उसे सस्ते ब्रीदिंग मास्क बनाने के काम में इस्तेमाल किया जाता है.

डे वाट्स कहते हैं कि उनके साफ़ हवा के जार कई लोग सजावट के लिए भी ख़रीदते हैं. लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो सांस लेने के लिए शुद्ध हवा चाहते हैं.

वो भी इन्हें ख़रीदते हैं. हवा बेचने के लिए डि वाट्स की आलोचना भी हुई है. लोग उन्हें हवा के नाम पर ठगी करने का मुल्ज़िम ठहरा चुके हैं.

लेकिन वाट्स को इन आरोपों से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. उनकी डिब्बाबंद हवा का सबसे बड़ा ख़रीदार चीन है.

हालांकि वो ये नहीं बताते कि उनका ये हवा का कारोबार कितना फैल चुका है. लेकिन डे वाट्स ये कहते हैं कि जो लोग शुद्ध हवा ख़रीद सकते हैं, उन्हें वो हवा बेचते हैं.

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तिकड़म या कारोबार

और जो इतनी महंगी हवा का ख़र्च नहीं उठा सकते, उन्हें वो मास्क बेचते हैं. हालांकि वैज्ञानिक हवा बेचने के इस कारोबार को लेकर ज़्यादा उत्साहित नहीं हैं.

अब तक रिसर्च से ये साबित नहीं हुआ है कि डिब्बाबंद हवा से आपकी सेहत को बहुत फ़ायदा होता है. ज़्यादातर वैज्ञानिक इसे तिकड़म या कारोबार का हथकंडा मानते हैं.

प्रदूषण के ख़तरे से डरे लोगों को सिर्फ़ डिब्बाबंद हवा ही नहीं बेची जा रही है. कई और लोग इस डर का दूसरे तरीक़े से फ़ायदा उठा रहे हैं.

मिसाल के तौर पर स्वीडन के कारोबारियों फ्रेडरिक केम्पे और अलेक्ज़ेंडर जर्टस्ट्रॉम को ही लीजिए. फ्रेडरिक और अलेक्ज़ेंडर घूमने के लिए अहमदाबाद आए थे.

यहां प्रदूषण के चलते अलेक्जेंडर का दबा हुआ दमे का मर्ज़ उभर आया. इसी से दोनों को ख़याल आया कि वो क्यों नहीं लोगों को मास्क बेचने का धंधा शुरू करते.

फ्रेडरिक और अलेक्ज़ेंडर ने फटाफट मास्क बेचने का कारोबार शुरू कर दिया. उन्होंने देखा कि जो मास्क बिक रहे हैं वो बेकार हैं.

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नाइट्रोजन ऑक्साइड

न उनका डिज़ाइन अच्छा है और न ही वो प्रदूषण से बचाते हैं. इसीलिए उन्होंने कम लागत में डिज़ाइनर मास्क बनाकर बेचने शुरू कर दिए.

फ्रेडरिक और अलेक्जेंडर ने एयरिनम नाम की कंपनी बनाकर मास्क बेचने शुरू किए.

वो आज 66 डॉलर से लेकर 75 डॉलर तक के मास्क बेचते हैं, जो लोगों को प्रदूषित हवा से बचाते हैं.

फ्रेडरिक कहते हैं कि मास्क पहनने से आपको प्रदूषण से काफ़ी राहत मिलती है. हालांकि ये मास्क गाड़ियों से निकलने वाली ज़हरीली नाइट्रोजन ऑक्साइड को नहीं रोक पाते.

मगर, हवा में तैरती काफ़ी गंदगी को छानकर आपको सांस लेने में मदद करते हैं. पूरी दुनिया में डिज़ाइनर मास्क की मांग बढ़ती जा रही है.

चीन, अमरीका और ब्रिटेन में कई कंपनियां डिज़ाइनर मास्क का कारोबार कर रही हैं. इनकी क़ीमत 33 से 100 डॉलर के बीच होती है.

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बोतलबंद हवा

रिसर्च से पता चलता है कि मास्क पहनने से आपको प्रदूषण से लड़ने में काफ़ी मदद मिलती है.

हालांकि कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि मास्क को लेकर दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे हैं. हाल ही में बाज़ार में एक और प्रोडक्ट आया है, जिसका नाम है एयरशील्ड.

ये बच्चों को टहलाने वाली गाड़ी को चारों तरफ़ से बंद करके बनाया गया है. इसका डिज़ाइन लिथुआनिया के डोमिनीकास बुडिनास ने तैयार किया था.

जिसके लिए उन्हें डिज़ाइन इनोवेशन का इनाम भी मिला था. आज धरती की बिगड़ती आबो-हवा पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन गई है.

इसका डर लोगों को सेहत की फिक्र करने को मजबूर करता है. डर की यही हवा लोगों के लिए कारोबार का ज़रिया बन गई है.

तो अगर आप भी क़ीमत अदा कर सकते हैं तो बोतलबंद पानी पीने के साथ बोतलबंद हवा ख़रीदकर शुद्ध सांस लीजिए.

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