बीमारी छुपाकर जीने की मुश्किल चुनौती

इमेज कॉपीरइट Science Photo Library

विकलांगता कई तरह की होती है. किसी को दिखाई नहीं देता. तो, किसी के हाथ-पैर या शरीर के दूसरे हिस्से में कमी होती है, जिसकी वजह से वो आम लोगों जैसी ज़िंदगी नहीं गुज़ार सकते.

मगर, दुनिया में कई ऐसी भी दिक़्क़तें या फिर बीमारियां होती हैं, जो लोगों को आम ज़िंदगी जीने से रोकती हैं. ऐसी छुपी हुई दिक्कतों को लोग बताना नहीं चाहते. लेकिन इसकी वजह से उन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी बिताने में बहुत परेशानी होती है.

इमेज कॉपीरइट isabella mcgough

लंदन की इज़ाबेला मैक्गो को ही लीजिए. उन्हें मिर्गी के दौरे आते हैं. वो इस बात को सबको बताना नहीं चाहतीं. मगर उन्हें इस दिक़्क़त के साथ एक्टिंग का अपना ख़्वाब पूरा करने में काफ़ी चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं. ख़र्च निकालने के लिए वो एक बार में काम करती हैं. फिर वो पढ़ाती भी हैं. मगर, इज़ाबेला तमाम चुनौतियों से निपटते हुए एक्टिंग में नाम कमाना चाहती हैं.

इस ख़्वाब की राह में उनके मिर्गी के दौरे आड़े आ सकते हैं. उन्हें कैमरा फ़ेस करने या फ्लैशलाइट से दिक़्क़त नहीं. मगर कई बार उनका काम पर जाने का मन नहीं होता. ऐसे मे वो बहाने तलाशती हैं. सच बताना नहीं चाहतीं. क्योंकि इज़ाबेला को लगता है कि सच बोलने पर उनके हाथ के काम कई मौक़े निकल जाएंगे. लोग उनके जैसे मिर्गी के दौरे के शिकार शख़्स को काम पर नहीं रखना चाहेंगे.

नौकरी जाने के डर से क्या लोग ज्यादा मेहनत करते हैं?

वो 5 पुरानी मशीनें जो कभी काम करती थीं...

इमेज कॉपीरइट jimmy isaacs

क्यों छुपाते हैं बीमारी ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में क़रीब एक अरब लोग ऐसे हैं जो बीमारी छुपाते हुए जी रहे हैं. किसी को डिप्रेशन की बीमारी है. तो, किसी को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं. किसी को एड्स है. तो, किसी को मांसपेशियों में कभी-कभी भयानक दर्द की शिकायत होती है.

ऐसे लोग अपनी ये परेशानी छुपाए रहते हैं. उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने अपनी परेशानी बता दी, तो उन्हें काम करने के मौक़े नहीं मिलेंगे. दफ़्तर में भेदभाव होगा.

ऐसा होता भी है.

ब्रिटेन के जिमी आईज़ैक्स एचआईवी पीड़ित हैं. जब उन्होंने अपनी कंपनी में इस बात को बताया, तो उनके काम के घंटे कम कर दिए गए. उनकी तनख़्वाह घटा दी गई. आख़िर में जिमी को नौकरी छोड़नी पड़ी.

घर से काम करने से करियर को नुक़सान

इमेज कॉपीरइट Getty Images

हमदर्दी दिखाती हैं कंपनियां

2011 में कनाडा में हुए सर्वे के मुताबिक़ 88 फ़ीसद लोग डिप्रेशन, एड्स और मिर्गी के दौरे जैसी बीमारियां छुपाते हैं. ब्रिटेन में ऐसे लोगों के लिए काम करने वाली संस्था स्कोप के गाय शुदुआ बताते हैं कि अगर वो अपनी ये बीमारी बताते हैं, तो उन पर दबाव बढ़ जाता है. फिर वो ये कहने में संकोच करते हैं कि फलां काम वो वक़्त पर नहीं निपटा सकेंगे, या फिर उनके काम के घंटे बदले जाएं.

एचआईवी और मिर्गी के दौरे, ये दो ऐसी बीमारियां जिनसे आपके काम पर काफ़ी असर पड़ सकता है.

हालांकि कई देशों ने इन्हें विकलांगता के तौर पर मान्यता दी है. विकलांगता के दायरे में आने पर लोगों को स्पेशल ट्रीटमेंट मिल जाता है. वो अपनी सहूलत के हिसाब से काम के घंटे चुन सकते हैं.

आने-जाने की दिक़्क़त का हवाला देकर घर से काम करने की इजाज़त हासिल कर सकते हैं.

बहुत सी कंपनियां और संगठन ऐसे लोगों के साथ हमदर्दी रखते हैं. लंदन की रहने वाली एमेलाइन मे डिप्रेशन और मांसपेशियों में अचानक उठने वाले भयंकर दर्द से पीड़ित हैं.

वो आजकल जिस कंपनी में काम करती हैं, उसने उनके लिए ख़ास कुर्सी का इंतज़ाम किया है. साथ ही उस कंपनी ने उन्हें इलाज के लिए वक़्त से पहले घर जाने की इजाज़त भी दे रखी है.

करियर में तरक्की चाहिए तो गिरगिट बनिए

बोतलबंद हवा का जोर पकड़ता चोखा धंधा

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कमतर न समझें

स्कोप के गाय शुदुआ कहते हैं कि ऐसी छुपी हुई विकलांगता के शिकार लोग अक्सर जमकर मेहनत करते हैं, ताकि वो खुद को बाक़ियों से कमतर न समझें.

लोग उनके बारे में बुरा नज़रिया न पालें. शुदुआ सलाह देते हैं कि कंपनियों को ऐसे लोगों को कुछ सहूलतें देकर अपने साथ जोड़ना चाहिए.

इससे वो सच्चाई और ईमानदारी से बेहतर काम करेंगे.

ऐसे लोगों को मदद देने वाली कंपनी ELAS ग्रुप के डैनी क्लार्क कहते हैं कि छुपी हुई विकलांगता के शिकार लोगों को अपनी परेशानी छुपानी नहीं चाहिए.

वो कंपनियों को सलाह देते हैं कि ऐसे लोगों का ख़ास ख़याल रखा जाना चाहिए. उन्हें बीमारी को देखते हुए कुछ छूट दी जानी चाहिए. इससे काम का माहौल बेहतर होगा.

छुपी हुई विकलांगता के शिकार लोग स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं चाहते. वो चाहते हैं कि साथी कर्मचारी और कंपनी उनकी परेशानियों को समझें, हमदर्दी रखें.

अपनी इस कमी की भरपाई ऐसे लोग अक्सर ज़्यादा मेहनत करके कर लेते हैं. बस उन्हें अपनी चुनौतियों से निपटने के लिए मदद का हाथ चाहिए.

(बीबीसी कैपिटल पर इस स्टोरी को इंग्लिश में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी कैपिटल को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)