पाला 'ज़िद्दी' बॉस से पड़ा, तो निपटने के गुर

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Image caption प्रतीकात्मक तस्वीर

हरेक का पाला कभी-न-कभी किसी ऐसे बॉस से पड़ता है, जिसके साथ काम करना बेहद मुश्किल होता है. बॉस के व्यक्तित्व और उनके कामकाज के तरीकों को पहचानने से आपकी काफ़ी दिक्कतें हल हो सकती हैं.

यह कोई राज़ की बात नहीं कि कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ने के साथ-साथ ज़िम्मेदारियों के दबाव से कई लोग बेहद ज़िद्दी और सनकी हो जाते हैं, और उनके मातहत काम करने वालों को उन्हें झेलना पड़ता है.

लेकिन सभी ज़िद्दी बॉस भी एक जैसे नहीं होते. अमरीकी अदालत के दस्तावेज़ों के मुताबिक ऐबरक्रॉम्बी ऐंड फ़िच के पूर्व सीईओ माइक जेफ्री ने अपने निजी जेट विमान के कर्मचारियों के लिए पहनावे और व्यवहार के बेहद कड़े और सनक भरे नियम लागू किए थे.

यहां तक कि पुरुष कर्मचारियों के लिए परफ़्यूम की मात्रा भी तय थी. दूसरी ओर, याहू की पूर्व सीईओ मारिसा मेयर ने स्वयं माना है कि वह बेहद छोटी-छोटी बातों को भी अपने नियंत्रण में रखना चाहती थीं.

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Image caption कोर्ट में दाख़िल दस्तावेज़ों के मुताबिक ऐबरक्रॉम्बी ऐंड फ़िच के पूर्व सीईओ ने अपनी यात्राओं को लेकर कड़े नियम बनाए थे

बीबीसी से बातचीत में विशेषज्ञों के एक समूह ने पांच तरह के ऐसे बॉस बताए, जिनके साथ काम करना चुनौतीपूर्ण होता है. उन्होंने हरेक से निपटने के तरीक़े भी बताए.

अत्यधिक अहंकारी और आत्ममुग्ध बॉस

अहंकारी बॉस का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक और दबंग होता है. वे चाहते हैं कि सब चीज़ें उनके नियंत्रण में रहें, सब का ध्यान उन्हीं पर रहे और सब लगातार उनसे वफ़ादारी जताते रहें. वह हर सफलता का श्रेय ख़ुद लेना चाहते हैं और हर ग़लती का दोष औरों पर मढ़ते हैं.

'डिसआर्मिंग द नार्सिस्ट' की लेखक वैंडी बेहरी कहती हैं, 'ऐसे अधिकारी दूसरों से जुड़ नहीं पाते क्योंकि उनमें सहानुभूति की भावना कम होती है.'

वह आगे कहती हैं, ''उनके सारे अहंकार, बड़बोलेपन, दूसरों को धमकाने और नियंत्रण की चाहत के पीछे असुरक्षा की गहरी भावना और अपनी अक्षमता का बोध होता है. इसी को छिपाने के लिए वे ऐसे व्यवहार करते हैं.''

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इस तरह के बॉस के साथ काम करना बेहद ख़तरनाक है. माना यह जाता है कि ऐसे बॉस की बात मानते रहें तो वे आपको बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं.

लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि उनके किए वायदों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता. इसके अलावा, उनके साथ काम करते हुए बेहद सावधान रहने और थोड़ा दूरी बरतने की भी ज़रूरत होती है ताकि अपनी असफलता का ठीकरा वे आप के सिर न फोड़ सकें.

माइक्रोमैनेजर

माइक्रोमैनेजर ऐसे बॉस होते हैं जो अपने मातहत के हर काम में दखलअंदाज़ी करते हैं. उन्हें अपना नियंत्रण ख़त्म होने का डर सताता रहता है. वे लगातार काम की प्रगति जांचना चाहते है और पूरे हो चुके कार्यों की समीक्षा करना चाहते हैं.

वे चाहते हैं कि हर बात उन्हें पता हो, हर काग़ज़ उनकी नज़र से गुज़रे और उन्हें हर पत्र की प्रति भेजी जाए. स्वतंत्रचेता, अनुभवी और अपने काम में दक्ष कर्मचारियों के लिए ऐसे बॉस के साथ काम करना कठिन होता है.

'सीक्रेट्स टु विनिंग ऐट ऑफ़िस पॉलिटिक्स' की लेखक मेरी जी. मैकलेंत्रे के मुताबिक, 'माइक्रो मैनेजर बॉस के साथ काम करने के लिए यह समझना चाहिए उनके इस व्यवहार की वजह चिंता है. उनके व्यवहार की स्वाभाविक प्रतिक्रिया में आप जितना उन्हें दूर रखना चाहेंगे वे उतनी ही दखलअंदाज़ी करेंगे.'

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कामकाज की प्रगति की लगातार जानकारी न मिलने से वे और भी चिंतित हो जाते हैं. इससे उन्हें पता नहीं चलता कि क्या चल रहा है और साथ ही उन्हें यह लगने लगता है कि आप उनसे कुछ छिपा रहे हैं, कुछ बता नहीं रहे. ऐसे में वे आपके काम पर और कड़ी नज़र रखेंगे और ज़्यादा से ज़्यादा दखलंदाज़ी करेंगे.

ऐसे बॉस का विश्वास जीतने के लिए उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी दें और बताएं कि आप क्या कर रहे हैं. इससे वे आपकी तरफ से निश्चिंत रहेंगे और आपको अपना काम ज़्यादा सहजता से करने देंगे.

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स्वप्नदर्शी बॉस

जैसे-जैसे अधिकारी ऊंचे पद पर पहुंचते हैं, कंपनी के रोज़मर्रा के कामकाज से दूर होते जाते हैं. वास्तविकताओं से उनका कोई लेना-देना नहीं रह जाता और ऐसे में कई बार वे कंपनी के सामने बेहद ऊंचे और असंभव लक्ष्य रख देते हैं.

इन स्वप्नदर्शी अधिकारियों के पास अपने हवाई लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कोई व्यावहारिक योजना भी नहीं होती.

लेकिन बॉस के असंभव लक्ष्य को सीधे-सीधे नामुमकिन कह देना भी मुमकिन नहीं हो पाता. उनका अहम आहत हो सकता है. बेहतर होगा कि ऊंचे लक्ष्यों के लिए बॉस की तारीफ करें, इनमें से हासिल हो सकने वाले और व्यावहारिक लक्ष्यों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करें, पर साथ ही इन लक्ष्यों से जुड़ी कठिनाइयों की ओर भी उनका ध्यान दिलाएं.

अटलांटा की एक बुटीक कार्पोरेट प्रशिक्षण कंपनी में व्यावसायिकता से जुड़े मामलों की अध्यक्ष डाना ब्राउनली कहती हैं, 'ऐसा कर आप उन्हें सीधे न कहने के बजाय उन्हें सही सलाह देने का काम करते हैं और संभावित चुनौतियों से आगाह करते हैं. बॉस को असलियत से वाकिफ़ कराने का यह ज़्यादा कारगर तरीका है.

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'कभी कुछ तो कभी कुछ' यानी भ्रमित बॉस

अगर लक्ष्य लगातार बदलते जाएं तो हासिल कैसे होंगे? यही दिक्कत है भ्रमित अधिकारी के साथ काम करने में. अपने ऊपर भरोसे की कमी और सही दिशा तय कर पाने की अक्षमता के कारण ऐसे बॉस हर दिन एक नया लक्ष्य, एक नया फ़रमान जारी करते हैं.

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Image caption याहू की पर्व सीईओ ने माना है उनका रवैया 'माइक्रोमैनेजर' वाला था

ब्रिटेन की संस्था क्रंच अकाउंटिंग द्वारा 1000 कर्मचारियों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक कर्मचारियों को अपने बॉस में यही दो आदतें यानी लक्ष्य तय न कर पाना (32%) और निर्णय क्षमता का अभाव (21%) जैसी बातें सबसे ज़्यादा खलती हैं.

ब्राउनली के मुताबिक, ''ऐसे बॉस के साथ आपको चतुराई से काम लेना होगा और अनिर्णय की आदत से बाहर निकालने में उनकी मदद करनी होगी. आपको ख़ुद आगे आना होगा और सटीक सवाल कर उनसे सही जानकारी निकलवानी होगी.

उनसे काम की प्राथमिकता तय करने को कहें. अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारियों के बारे में भी उनसे बार-बार पूछते रहें ताकि कोई गड़बड़ होने पर दोष अनावश्यक आपके सिर न मढ़ा जाए.

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मनमानी करने वाले बॉस

कुछ अधिकारियों की आदत होती है- मनमानी करना और सिर्फ़ अपनी चलाना. वे दूसरों के विचारों को कोई तवज्जो नहीं देते और टीमवर्क की कोशिशों को सफल नहीं होने देते. उनके आधिपत्यवादी रवैये के कारण कर्मचारियों के लिए काम के उनके तरीके पर सवाल उठाना बेहद मुश्किल होता है.

आईएमडी बिजनेस स्कूल, स्विट्ज़रलैंड के अध्यक्ष जीन फ्रैंकिस मंजोनी कहते हैं, ''ऐसे अधिकारी के साथ रचनात्मक बातचीत का एक ही तरीका है कि पहले आप उद्देश्य पर सहमत हों और फिर उसे हासिल करने के तरीके पर बात करें. आपको तरीके पर सवाल उठाना है तो लक्ष्य के बारे में सहमत हुए बिना इस बारे में बातचीत नहीं हो सकती.''

वैसे मंजोनी यह भी चेतावनी देते हैं कि अपने बॉस को ऊपर बताए गए विशेषणों से नवाज़कर आप अंतत: अपने आप को तसल्ली ही देते हैं. इनके साथ काम करना मुश्किल है, ऐसा सोचने से काम करना और भी मुश्किल हो जाएगा. बेहतर होगा कि आप बॉस को संदेह का लाभ दें और उनसे रचनात्मक संबंध बनाने की कोशिश करें.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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