मैक्डॉनल्ड के लोगो का क्या है राज़?

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आपने दुनिया में बहुत सी मेहराबों के बारे में सुना होगा, देखा, होगा जिनकी तारीखी अहमियत है. जैसे सेंट लुईस में 192 मीटर ऊंचा गेटवे मेहराब, या दक्षिणी स्पेन में सैकडों घोड़ों की नाल के शक्ल वाली मेहराबें, स्पेन के कार्डोबा की मस्जिद की मेहराबें वग़ैरह.

लेकिन शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक मशहूर मेहराब ऐसी है, जिसका ताल्लुक़ किसी बादशाह या सल्तनत से नहीं. उसे बड़े-बड़े इंजीनियरों ने भी नहीं बनाया है. इस मेहराब का नाम इतिहास के पन्नों में भी दर्ज नहीं है. फिर भी दुनिया भर में लोग उसे जानते हैं. यह है एक कॉर्पोरेट कंपनी का लोगो. मशहूर फास्ट फूड कंपनी मैक्डोनाल्ड का लोगो.

जी हां, मैक्डोनाल्ड के क़रीब तीस हज़ार रेस्टोरेंट दुनिया के 119 देशों में फैले हुए हैं. रोज़ क़रीब सात करोड़ लोग इन रेस्टोरेंट में आकर मैक्डी बर्गर, फ्रेंच फ्राइज़ और कोल्ड ड्रिंक का लुत्फ़ लेते हैं.

कंपनी का लोगो अंग्रेज़ी भाषा के अक्षर M से शुरू होता है. ये M दो सुनहरी मेहराबों की शक़्ल का दिखता है. पिछले अस्सी सालों में इसमें कई बार बदलाव हुए हैं.

मैक्डोनाल्ड्स का यह सफ़र 1937 में अमरीका के लॉस एंजिलिस शहर से शुरू हुआ था. तब पैट्रिक मैक्डॉनल्ड ने मोनरोविया एयरपोर्ट के बाहर 'द एयरड्रोम' से एक हॉट डॉग स्टैंड लगाया था. इसमें उनके दो बेटे रिचर्ड और मॉरिस भी मदद करते थे.

तीन साल बाद पैट्रिक यह हॉट डॉग स्टैंड सैन बर्नार्डिनो ले आए. यहीं पर आठ साल बाद पैट्रिक के दोनों बेटों ने इसे फास्ट फूड चेन के तौर पर रिलॉन्च किया. वे यहां उस वक़्त बर्गर बेचने वाली कंपनियों के मुक़ाबले के लिए आधे दाम पर बर्गर बेचने लगे, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहक जुटाए जा सके. इसका नाम रखा, 'मैक्डोनाल्ड के मशहूर हैमबर्गर'.

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1952 में मैक्डॉनल्ड के दोनों बेटे डिक और मैक ने अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने और अधिक लोगों को इससे जोड़ने की बात सोची. डिक ने अपनी फ्रैंचाइज़ी के लिए साइनबोर्ड बनाने के लिए लॉस एंजिलिस के दो मशहूर आर्किटेक्ट स्टैनले क्लार्क मेस्टन और चार्ल्स फ़िश की मदद ली.

डिस ने आधे गोले जैसे एक लोगो का डिज़ाइन बनाया हुआ था. स्टैनले मेस्टन ने इसे दो आधे गोलों में तब्दील कर दिया, जो अंग्रेज़ी के M जैसे दिखने लगे. मेस्टन ने इस डिज़ाइन को 25 फुट ऊंची गोल्डन शीट से साइनबोर्ड में बदला, ताकि सड़क से गुज़रने वाले हर इंसान की नज़र इस पर पड़े.

साल 1953 में अमरीका के एरिज़ोना में जब मैक्डॉनल्ड की पहली फ्रैंचाइज़ी खोली गई तो कंपनी के इस लोगो के साथ उसकी शुरुआत हुई.

मैक्डॉनल्ड बंधु अपने कारोबार से काफ़ी खुश थे. लेकिन अपने ज़माने के मशहूर जैज़ संगीतकार और रेडियो जॉकी रे क्रॉक ने फास्ट फूड के कारोबार में काफ़ी उम्मीदें दिखीं.

पहले तो रे क्रॉक ने डिक और मैक की कंपनी में फ्रैंचाइज़ी मैनेजर के तौर पर नौकरी की. छह साल बाद रे क्रॉक ने डिक और मैक से उनकी कंपनी 27 लाख डॉलर में ख़रीद ली. हालांकि क्रॉक ने इस कंपनी को बुलंदियों तक पहुचाने में बहुत मेहनत की और इसे बहुराष्ट्रीय कंपनी बना दिया.

डिक और मैक को कंपनी बेचने पर भारी नुक़सान उठान पड़ा था. लेकिन रे क्रॉक ने उनसे एक वादा किया था. क्रॉक ने कहा था कि दुनिया में जब भी कहीं कोई मैक्डॉनल्ड का आउटलेट खोला जाएगा, उसकी रॉयल्टी दोनो भाइयों को दी जाएगी. लेकिन यह वादा सिर्फ मौखिक था. मैक और डिक दोनों इतने भोले थे कि क्रॉक से उन्होंने लिखित नें कुछ भी नहीं लिया. यहां तक कि कंपनी का नाम भी वो अपने पास बचा कर नहीं रख पाए.

लेकिन इन दोनों भाइयों के साथ जो चालाकी की गई थी, उसके बारे में सभी लोग जान गए थे. कुछ सालों बाद इनकी कहानी पर जॉन ली हैन्कॉक ने एक फिल्म बनाई और इसके पोस्टर में लिखा- 'उसने किसी का आइडिया लिया और अमरीका ने उसे खाया'.

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इस फिल्म का पोस्टर के आने के बाद 1968 में क्रॉक ने कंपनी के लोगो में एक बार फिर से बदलाव किया. इस मर्तबा जो लोगो डिज़ाइन किया गया, उसमें पुराने लोगों की झलक तक नहीं बची रही.

अमरीका में फास्ट फूड का कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा था. बाक़ी दुनिया भी तेज़ी से फास्ट फूड की दीवानी बनती जा रही थी. हालांकि साथ ही साथ लोग फास्ट फूड खाने के नुक़सान को लेकर भी फ़िक्रमंद थे. 2004 में मोटापे पर एक फिल्म बनाई गई 'सुपर साइज़ मी', जिसने फास्ट फूड के नुक़सान की तरफ लोगों का ध्यान खींचा.

इसके बाद मैक्डॉनल्ड के नाम की वह शोहरत कमज़ोर पड़ने लगी, जो पचास और साठ के दशक में उसे हासिल हुई थी.

मैक्डॉनल्ड की सुनहरी मेहराब आज जुझारू अंतरराष्ट्रीय पूंजीवाद, उपभोक्तावाद और अमरीकी संस्कृति का प्रतीक बन गया है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसे तोड़ा ना जा सके.

कई देशों में मैक्डॉनल्ड के इस मेहराब के रंग में बहुत से बदलाव किए गए. साल 1993 में अमरीका के एरिज़ोना सूबे में जब पहला मैक्डॉनल्ड रेस्टोरेंट खोला गया तो वहां इसके लोगो का रंग फिरोज़ी रखा गया था. वह वहां के क़ानून के हिसाब से सही था और स्थानीय माहौल के साथ घुल मिल गया. इसी तरह 2010 में कैलिफ़ोर्निया में काली मेहराब को जगह दी गई और फ्रांस में सफेद रंग की मेहराब के साथ मैक्डॉनल्ड का नया लोगो देखने को मिला.

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Image caption मैक्डॉनल्ड के तत्कालीन सीईओ मैक क्रॉक ने लोगो के डिज़ायन में कई अहम बदलाव किए.

बहरहाल, इस लोगो ने हर दौर के कलाकारों को भी खूब आकर्षित किया. ऑस्ट्रेलिया के कलाकार बेन फ्रॉस्ट ने फ्रेंच फ्राइज़ के अनगिनत कंटेनर्स का कार्टून कैनवस बनाने में इस्तेमाल किया. साल1998 में टोक्यो के म्यूज़ियम में कंटेपरेरी आर्ट की नुमाइश में मासातो नाकामुरा ने मैक्डॉनल्ड के मेहराबों को जगह दी.

तस्वीरों की इस प्रदर्शनी को ख़ुद मैक्डॉनल्ड ने प्रायोजित किया था, क्योंकि मासातो के हर फोटो में कंपनी की सुनहरी मेहराबें नज़र आ रही थीं. इसीलिए कंपनी ने इसे अपने प्रचार का एक ज़रिया बना लिया.

कहा जा सकता है एक कंपनी का यह लोगो बहुत से तजुर्बों और कई दौर से गुज़रा है. इसने हर दौर में इसने अपनी अलग पहचान बनाई है. इसकी कामयाबी यही है कि दुनिया कि किसी ऐतिहासिक मेहराब के बारे में लोग जानते हों या ना नहीं, लेकिन मैक्डॉनल्ड के लोगो को हर कोई जानता है.

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