क्यों संभाल कर रखा है आइंस्टीन का दिमाग?

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Image caption फ़्लोरेंस में रखी है गैलीलियो की उंगुली

मौत के बाद ज़िंदगी का कैसा रूप होगा?

इस बारे में तमाम तरह की बातें होती हैं. मगर एक चीज़ का तो आपको यक़ीन होगा कि मरने के बाद आपके शरीर के अंगों की नीलामी नहीं होगी.

हाल ही में एक ऑनलाइन वेबसाइट ने मरे हुए लोगों के अंगों की नीलामी शुरू की थी जिसकी शिकायत भी की गई थी.

कई देशों में गुज़र चुके लोगों के अंगों को सहेजकर रखने का चलन है. बहुत जगह इनकी इबादत होती है. कई बार मशहूर लोगों के अंगो के नाम पर जालसाज़ी भी होती है.

श्रीलंका के कैंडी शहर में एक मंदिर में आज भी भगवान बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है. इसी तरह तुर्की के शहर इस्तांबुल में मुहम्मद साहब की दाढ़ी रखी होने का दावा किया जाता है. रोम की सेंट जॉन लैटेरन बैसिलिका में ईसा मसीह की गर्भनाल सहेजकर रखी जाने के दावे भी किए जाते हैं.

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Image caption सेंट जॉन लैटेरन बैसिलिका में ईसा मसीह के गर्भनाल रखे होने का दावा किया जाता है

यह तो हुई उन लोगों की बात जिन्हें इंसान से बढ़कर भगवान के बराबर दर्जा दिया जाता है. पर ऐसे और भी बहुत से लोग हैं जिनके अंगो को सहेजकर रखा गया है. चलिए आज ऐसे ही कुछ मशहूर लोगों के जतन से रखे अंगों से आपको रूबरू कराते हैं.

इटली के मशहूर वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली की एक उंगली और अंगूठा इटली के फ्लोरेंस शहर में नुमाइश के लिए रखे गए हैं. उनके शव से ये अंग 1737 में उस वक़्त निकाल लिए गए थे जब उनक शव एक क़ब्र से दूसरी क़ब्र तक ले जाया जा रहा था.

अब गैलीलियो की बनाई दूरबीन के साथ ही उनकी उंगलियों और रीढ़ की एक हड्डी को फ्लोरेंस के संग्रहालय में रखा गया है. गैलीलियो के अनुयायी इस संग्रहालय को एक तीर्थ के तौर पर देखने के लिए आते हैं.

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Image caption नैपोलियन बोनापार्ट का लिंग काट कर रख लिया गया था.

फ्रांस के मशहूर राजा नेपोलियन बोनापार्ट के आख़िरी दिन अंग्रेज़ों की क़ैद में गुज़रे थे. साल 1821 में जब नेपोलियन की मौत सेंट हेलेना द्वीप पर हुई तो जिस अंग्रेज़ सर्जन ने उनके शव का पोस्ट मॉर्टम किया, उसने नेपोलियन का लिंग काट लिया था.

डॉक्टर ने उसे बाद में महंगी क़ीमत पर नीलाम कर दिया. इसे इटली के एक पादरी ने ख़रीदा था. बीसवीं सदी में लंदन के एक क़िताबफरोश ने ऊंचे दाम पर ख़रीदा. फिर एक अमरीकी वैज्ञानिक ने इसे क़रीब तीन हज़ार डॉलर में ख़रीद लिया.

साल 2007 में इस अमरीकी वैज्ञानिक की मौत के बाद 2016 में उसके संग्रह की चीज़ों की नीलामी की गई. इसमें सायनाइड की वो शीशी भी थी जिससे जर्मन कमांडर हर्मन गोरिंग ने सायनाइड खाकर ख़ुदकुशी की थी.

जर्मन मूल के अमरीकी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन जीनियस थे. उनकी मौत के बाद 1955 में उनकी आंखें निकालकर न्यूयॉर्क में एक सेफ़ में रख दी गईं.

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Image caption आइंस्टीन के दिमाग के टुकड़े और आंखें आज भी रखी हुई हैं.

इसी तरह उनके दिमाग़ को पड़ताल के लिए निकाल लिया गया था जिस पर बरसों रिसर्च होती रही.

बाद में उनके दिमाग़ के टुकड़ों को उनकी आंखों के डॉक्टर हेनरी अब्राम्स को सौंप दिया गया था. हालांकि आइंस्टाइन के दिमाग़ के टुकड़े तो बाक़ी दुनिया ने देख लिए. मगर उनकी आंखें आज भी अंधेरे डब्बे में क़ैद हैं.

अमरीकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन से जुड़ी हुई एक परखनली अमरीका के मिशिगन शहर के संग्रहालय में रखी है.

कहते हैं कि इस परखनली में थॉमस एडिसन की छोड़ी हुई आख़िरी सांस क़ैद है. लाइट बल्ब, फोनोग्राफ और कैमरे का आविष्कार करने वाले एडिसन ने 1931 में आख़िरी सांस ली थी.

Image caption श्री लंका में गौतम बुद्ध के दांत रखे होने का दावा किया जाता है

जिस परखनली में उन्होंने सांस छोड़ी थी, उसे उनके डॉक्टर ने कॉर्क लगाकर बंद कर दिया था. उसे आज तक मिशिगन के संग्रहालय में सहेजकर रखा गया है. इसे बाद में एडिसन के बेटे चार्ल्स ने अपने पिता के दोस्त हेनरी फ़ोर्ड को दे दिया था.

फ़ोर्ड ने इसे अपने नाम से बने संग्रहालय में रखवा दिया.

साल 2011 में अमरीका के अल पासो शहर के एक दुकानदार ने दावा किया था कि उसके पास कुख्यात मेक्सिकन बाग़ी जनरल पैंचो विला की वो उंगली है जिससे वो बंदूक की ट्रिगर दबाते थे.

पैंचो की 1926 में हत्या कर दी गई थी. उनके शव को तीन साल बात डकैतों ने क़ब्रिस्तान से खोदकर निकाल लिया था. बाद में जनरल पैंचो के शव के टुकड़ों के अलग-अलग लोगों के पास होने के दावे किए जाते रहे.

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Image caption थॉमस एडिसन की आख़िरी सांसें इस परखनली में क़ैद हैं

जिस अमरीकी दुकानदार ने यह दावा किया कि उसके पास पैंचो की उंगली है, वह यह बात साबित करने को राज़ी नहीं था. बरसों इस पर बहस होती रही. आज तक डेव नाम का वो दुकानदार पैंचो के नाम से वो उंगली बेच नहीं पाया है.

आख़िर क्या वजह है कि लोग गुज़र चुके लोगों के अंगों में इतनी दिलचस्पी दिखाते हैं? शायद किसी बड़े और नामी इंसान की ज़िंदगी इतनी राज़दार होती है कि उससे जुड़ी हर चीज़ से एक कहानी बना ली जाती है.

यही अंग बहुत से लोगों को गुज़र चुके इंसान के आस-पास होने का एहसास कराते हैं. जैसे आइंस्टीन के डॉक्टर अब्राम्स ने कहा था कि इस महान वैज्ञानिक की आंखें उनके पास होने का मतलब है कि आइंस्टीन आज भी ज़िंदा हैं.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)

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